मिलावटखोरी के कारण प्रतिवर्ष 20 लाख लोग बीमार होते हैं और 02 लाख अकाल मृत्यु होती है।
ऑस्ट्रेलिया में मिलावटखोरी पर न्यूनतम 10 साल की सजा होती है और भारत में?
@PMOIndia@HMOIndia
इस भाई ने Mumbai के Kalyan Railway Station पर किसीको छोड़ने गया था ।
उन्होंने Platfrom Ticket भी लिए लेकिन Train आने में 4 घंटा Late कर दिया !
इस लेट के कारण वो भी Station के अंदर रह गए लेकिन जब वो बापस जा रहे थे उनको TTE ने ₹500 फाइन मार दिया !क्योंकि टिकट का वैल्यू 2 घंटा तक रहता है।
लेकिन मुद्दे की बात ये है कि इसमें आम आदमी का दोष कहा है 🤔 Train के लेट के कारण हम क्यों पैसा दें ?Train की बजह से तो ये नौबत आई ना ।
Railway को इस नियम को Change करना चाहिए या Train को Right time पर चलना चाहिए इसके कारण जनता क्यों पैसा दे ?
पंजाब में बेरोज़गार युवा GenZ Students शांतिपूर्वक प्रोटेस्ट कर रहे थे तो तानाशाह केजरीवाल-मान ने कुछ इस तरह उनपर बेरहमी से लाठियाँ चलवाई।
देखिए कैसे क्रूरता से युवाओं को मारा-घसीटा जा रहा है…
एक युवक अपनी पत्नी और बच्ची के साथ नाइट शो देखकर लौट रहा है, पुलिस जिसका काम सुरक्षा देना है उसका सवाल उसके रात में लौटने।पर है, उसके साथ मारपीट की गई बाइक की चाभी छीन ली गई..ये छत्तीसगढ़ का धमतरी जिला है
हिन्दू धर्म को अपशब्द कहे ब्राह्मणों को गाली दी देश विरोधी नारे लगे शाहीन बाग बनाने की तैयारी की
पुलिस स्टेशन के बाहर छोड़ो अंदर घुस के पीटूँगा
5 बजे अधिवक्ताओं का एक दल @DCPNewDelhi को याचिका देगा
@CPDelhi@DelhiPolice@HMOIndia
शेयर नहीं कर सकते तो छोड़ दो सोशल मीडिया
कुछ दिन पहले भाजपा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने सुप्रीम कोर्ट में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा:
"अगर इस देश में धार्मिक हिंसा भड़काने के लिए कोई जिम्मेदार है, तो वह सुप्रीम कोर्ट और उसके जज हैं!"
उनके इस बयान से बड़ा विवाद खड़ा हो गया और विपक्षी दलों ने उनकी कड़ी आलोचना की। हालांकि, जाने-माने वैज्ञानिक, लेखक और वक्ता आनंद रंगनाथन जी @ARanganathan72 ने दुबे का पूरा समर्थन करते हुए एक वीडियो बयान जारी किया। धाराप्रवाह अंग्रेजी में रंगनाथन जी ने सुप्रीम कोर्ट से 9 शक्तिशाली सवाल पूछे। ये सवाल बहुत महत्वपूर्ण हैं। नीचे हिंदी में एक संक्षिप्त सारांश दिया गया है, जिसे अब सभी के समझने के लिए अंग्रेजी में अनुवादित किया गया है:
आनंद रंगनाथन जी के सुप्रीम कोर्ट से 9 सवाल:
1. 'कश्मीर मुद्दे पर दोहरे मापदंड:' सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को हटाने के खिलाफ विपक्षी दलों की याचिकाओं पर तुरंत विचार किया। लेकिन जब 1990 के दशक में कश्मीरी हिंदुओं के खिलाफ़ अत्याचारों के बारे में याचिकाएँ दायर की गईं - जैसे जबरन विस्थापन, घरों पर कब्ज़ा, मंदिरों को तोड़ना, हत्याएँ, बलात्कार और सामूहिक पलायन - तो उन्हें कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि, "यह बहुत पहले हुआ था।" *क्या यह दोहरा मापदंड नहीं है? क्या इससे हिंदुओं में गुस्सा नहीं पैदा होता? क्या यह धार्मिक संघर्ष का कारण नहीं बनता?
2. 'वक्फ बोर्ड के दुरुपयोग पर चुप्पी:` सुप्रीम कोर्ट अब वक्फ बोर्ड के सुधारों को लेकर चिंतित है। लेकिन पिछले 30 वर्षों में, वक्फ बोर्ड ने अवैध रूप से संपत्ति जब्त की, करों से परहेज किया और एक समानांतर न्यायिक प्रणाली संचालित की - फिर भी कोर्ट चुप रहा। यदि सुधारों को इस्लाम के लिए खतरा माना जाता है, तो हिंदू भूमि पर मस्जिद और दरगाह बनाना कैसे स्वीकार्य था? वक्फ बोर्ड ने 2 मिलियन से अधिक हिंदुओं की संपत्ति जब्त की। सुप्रीम कोर्ट चुप रहा। अगर यह धार्मिक पक्षपात नहीं है, तो क्या है?
3. `मंदिरों का धन कहीं और खर्च किया जाता है, हिंदुओं पर प्रतिबंध:` हिंदू मंदिरों पर सरकार का नियंत्रण है। उनकी आय का उपयोग मदरसों, हज यात्राओं, वक्फ बोर्ड, इफ्तार दावतों और ऋणों के लिए किया जाता है। लेकिन हिंदू धार्मिक गतिविधियों पर प्रतिबंध हैं। हिंदू अधिकारों से संबंधित याचिकाएँ अक्सर खारिज कर दी जाती हैं। अल्पसंख्यकों को हमेशा विशेष प्राथमिकता दी जाती है। *क्या यह उचित है? या यह हिंदुओं के गुस्से को भड़काने का एक तरीका है?
4. `हिंदुओं के खिलाफ शिक्षा में भेदभाव:` शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत, हिंदू स्कूलों को अल्पसंख्यकों के लिए 25% सीटें आरक्षित करनी चाहिए। लेकिन मुस्लिम और ईसाई संस्थानों को इस नियम से छूट दी गई है। हजारों हिंदू स्कूलों को बंद करना पड़ा, और हिंदू बच्चे अब गैर-हिंदू संस्थानों में पढ़ते हैं। *क्या यह धर्म परिवर्तन को बढ़ावा नहीं दे रहा है? सुप्रीम कोर्ट इस एकतरफा नियम को क्यों नहीं देखता?
5. `स्वतंत्र भाषण का पाखंड:` जब हिंदू बोलते हैं, तो इसे “घृणास्पद भाषण” कहा जाता है। जब दूसरे बोलते हैं, तो इसे "अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता" कहा जाता है। नुपुर शर्मा ने केवल हदीस से उद्धरण दिया, और न्यायालय ने इसे घृणास्पद भाषण कहा। लेकिन जब स्टालिन और अन्य नेताओं ने सनातन धर्म को "बीमारी" कहा, तो न्यायालय चुप रहा। *क्या यह न्याय है?
6. `हिंदू परंपराओं पर पक्षपातपूर्ण प्रतिबंध:` सर्वोच्च न्यायालय ने दशहरा पशु बलि जैसी हिंदू प्रथाओं पर प्रतिबंध लगा दिया। लेकिन ईद के दौरान सामूहिक हलाल पशु वध के बारे में कोई सवाल नहीं उठाया गया। जन्माष्टमी के दौरान, दही हांडी समारोह में ऊंचाई प्रतिबंध का सामना करना पड़ता है। लेकिन मुहर्रम से संबंधित हिंसा के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। दिवाली के पटाखों को पर्यावरण के लिए हानिकारक कहा जाता है, लेकिन क्रिसमस की आतिशबाजी की कोई आलोचना नहीं होती। *क्या यह भेदभाव नहीं है?
7. `पूजा स्थल अधिनियम हिंदू पुनर्स्थापना को रोकता है:` 1991 के पूजा स्थल अधिनियम में यह अनिवार्य किया गया है कि 15 अगस्त, 1947 तक के स्थानों के धार्मिक चरित्र को नहीं बदला जाना चाहिए। यह कानून हिंदुओं को उन प्राचीन मंदिरों को पुनः प्राप्त करने से रोकता है जिन्हें नष्ट कर दिया गया था या परिवर्तित कर दिया गया था। राम मंदिर के लिए कई दशकों तक लड़ाई लड़नी पड़ी। कई अन्य मंदिरों पर अतिक्रमण जारी है। *क्या यह ऐतिहासिक अन्याय नहीं है?
8. `केवल हिंदू परंपराओं को निशाना बनाना:` सबरीमाला मामले में, न्यायालय ने हिंदू भावनाओं को ठेस पहुँचाई। कुछ हिंदू मंदिरों में केवल पुरुषों या केवल महिलाओं के रीति-रिवाजों का पालन किया जाता है।
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खोड़ा में अपने हिंदू परिवार को न्याय दिलाने के लिए आज सुबह से ही मुझे रोका हुआ है,
लेकिन मैं किसी भी सूरत में पीछे नहीं हटूंगा।अपने परिवार को न्याय दिलाकर ही दम लूंगा।हिंदू रक्षा दल के सभी योद्धा मौके पर मौजूद हैं
पुलिस की वर्दी लोगों के प्रति सम्मान और सुरक्षा के लिए मिलती है, कुछ लोगों ने इसे अकड़ और गुंडई का प्रतीक बना दिया है, अब हर आदमी अपनी सुरक्षा के लिए वीडियो बनाए तभी इससे निजात मिलेगी वरना शोषण होना तयं है।
पश्चिम बंगाल में वर्षों से खुले आम घुसपैठिए भारत के नागरिक बनकर रह रहे थे।सबको पता था फिर भी देश के ‘so called’ पत्रकारों ने इस खबर को छुपाए रखा।कभी मुश्किल सवाल नहीं पूछे, कोई मुहिम नहीं चलाई।क्या ये देश के साथ बेईमानी नहीं है?
यही हैं OG GODI MEDIA !
इन्हें पहचानिए!
PM मोदी ने जो बोला वो करो,
दुनिया का बैंड बजा हुआ है, लेकिन भारत में सबको गैस, पेट्रोल, डीजल, राशन सब मिल रहा है।
इसलिए PM ने जो बोला वो करिए, कम ईंधन का इस्तेमाल करिए।
: जैकी श्रॉफ, बॉलीवुड अभिनेता
AC सर्विस के नाम पर मार्केट में गजब स्कैम चल रहा है.
इस महिला को सुनिए 👇
इन्होंने अर्बन कंपनी वालों को अपनी 4 AC सर्विस करने के लिए बुलाया था
AC सर्विस करने आए टेक्नीशियन ने 3 AC का गैस खत्म बता दिया
महिला को संदेह हुआ. इस महिला ने AC सर्विस कैंसिल कर दिया
बदले में अर्बन कंपनी वालों ने इनसे पेनल्टी ले लिया
और फिर जब महिला ने लोकल टेक्नीशियन बुलाया तो उसने कहा कि AC में गैस तो ठीक है, कौन बोल रहा है गैस ख़त्म है ?
गजब खेल चल रहा भाई
बिहार दारोगा पटना ट्रैफिक पुलिस नए दरोगा साहब को ट्रेनिंग दीजिए
गजब Police युवा दरोगा साहब बोल रहे हैं मेरा मशीन से चलान नहीं कटेगा इसलिए घुस दे दो
बिहार दरोगा साहब 7000 रिश्वत मांग रहे थे
लड़के की माँ को कैंसर है
SI नये-नये दरोगा बने हैं पेपर पर पूरा प्लान समझ दिए थे कितना घुस देगा तब तुम्हारा गाड़ी छूटेगा
बेचारा चलान भरने के लिए तैयार था लेकिन गाड़ी थाने में भेजवा दिए हैं
अब आप लोगों को करना क्या है पता है ना ?