भारत ने आजादी के बाद, सिर्फ एक युद्ध में हार पायी है. चीन के साथ 1962 का युद्ध. इसमें भारत का 38,000 किलोमीटर एरिया हाथ से निकल गया. ये लगभग केरल जितना बड़ा इलाका है. चीन तब असम के अंदर तक आ गया था और पश्चिम बंगाल भी खतरे में आ गया था.
लेकिन इस हार के समय भारतीय सेना की कमान जिनके हाथों में थी यानी जनरल पीएन थापर, उन्होंने न इस्तीफा दिया, न उनको हटाया गया. बल्कि पुरस्कार के तौर पर उनको अफगानिस्तान में भारत का राजदूत बनाया गया.
थापर की नेहरू परिवार से रिश्तेदारी थी. उनको अपने से सीनियर लेफ्टिनेंट जनरल एसपीपी थोराट की अनदेखी कर सेना प्रमुख बनाया गया था.
पत्रकार करण थापर जनरल पीएन थापर के पुत्र हैं. इतिहासकार और वामपंथी रोमिला थापर भी करीबी रिश्तेदार हैं.
इस समय दूसरे प्रमुख जनरल थे बीएम कौल. यानी नेहरू जी के प्रिय लेफ्टिनेंट जनरल बिज्जी. पूर्वी सीमा के प्रभारी. वे लड़े ही नहीं. उनको भी ससम्मान विदायी दी गई. कोई जांच नहीं, कोई जिम्मेदारी नहीं. विदायी के बाद उनको दिल्ली की सरकारी कोठी में रहने दिया गया.
उनके बारे में नेहरू ने खुद जो लिखा है, उसे बता दूं तो विवाद हो जाएगा.
@Arjun_homecare जो लोग विकास की उपेक्षा करके, पर्यावरण संरक्षण के लिये प्रदर्शन कर रहे हैं, पहले वे अपने आलीशान बंगले और बड़ी बड़ी गाड़ी छोड़ें तथा कच्चे मकानों और साइकिल की सवारी को अपनाएं. अन्यथा पश्चिमी देशों के इशारों पर ना नाचे
सामाजिक न्याय के असली योद्धा नीतीश कुमार हैं, भाषण के साथ राशन की भी व्यवस्था कराते हैं। कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न भी दिलाते हैं और गरीब महिलाओं को आर्थिक रूप से ताकतवर भी।
लोग इनसे डरते भी नहीं, हां प्रशासन जरूर कुछ मनमानी कर लेता है लेकिन जनता का बड़ा हिस्सा खुश रहता है।
बिहार के अति पिछड़े-पिछड़े समाज सावधान...
अगर गलती से भाजपा का मुख्यमंत्री बन गया, बिहार के अति पिछड़ा -पिछड़ा को रोज अपमान सहना पड़ेगा.भाजपा मनुवादी पार्टी....
@INCBihar@INCMumbai@INCOBCDept@RJDforIndia
कांग्रेस के नेता या INDIA के अन्य नेता स्वयं इस मामले पर सुसुप्तावस्था में हैं। दरअसल किसी मुद्दे को लेकर इनमे एका नहीं है। अकरला राहुल गांधी जितना परिश्रम करें लेकिन उनकी पार्टी में दूसरे और तीसरे गेयर के नेता तो अजगरी स्वभाव के हैं, अर्थात खा के पड़ जाना ।