मैंने किरयाना स्टोर से 2000 रूपये का सामान खरीदा, किरयाना वाले ने पूछा कैसे pay करेंगे?
मैंने उसके स्कैनर पर Upi कर दिया
मैंने 2000 रूपये pay किये UPI Payments
द्वारा, कोई चार्ज नहीं लगा.
पर किरयाना वाले ने उसी वक़्त सप्लायर को पेमेंट किया 10 हज़ार रूपये तो उसको 50 रूपये का चार्ज लग गया.
अगले दिन मैंने फिर किरयाना स्टोर से 2000 रूपये का सामान खरीदने गया तो मुझे वही सामान 2050 रूपये का मिला.
ये भविष्य की स्टोरी बताती है कि UPI फ्री नहीं है
दुकानदार पर टैक्स लगेगा तो जेब ग्राहक की ही ढीली होंगी.
डायरेक्ट नहीं लगा सकते, पर इंदिरेक्ट्ली तो लगा दिया है. ये है डिजिटल इंडिया 😊
शुभेंदु अधिकारी के मंदिर में बैठकर मछली खाने के दावे पर भाजपाइयों की धार्मिक भावनाओं को साँप क्यों सूँघ गया? अब मंदिर की पवित्रता पर पहरा देने वाले कहाँ हैं? धर्म के ठेकेदारों, साफ़ बताओ - आस्था का अपमान खाने से होता है या खाने वाले की पार्टी देखकर तय होता है?
आरक्षण पर अखिलेश यादव को ज्ञान देने वालो का इस ट्वीट पर स्वागत है मोदी जी का खास बच्चा श्री श्री चिराग़ पासवान आरक्षण पर कुछ कह रहा है औक़ात हो तो पलट कर दो शब्द कह कर दिखाए .
“पानी नहीं मूत पिलाएँगे”. दलितों के ख़िलाफ़ ज़हर उगलने वाले और उनको सार्वजनिक तौर पर अपमानित करने वाले इस जातिवादी को देखिए। माननीय सुप्रीम कोर्ट से कहना है की ये किसी कमरे के अंदर नहीं बल्कि सार्वजनिक रूप से कहीं गई बात है। @DelhiPolice
-नीले अंडों से आजादी
-एससी-एसटी से आजादी
-आरक्षण से आजादी
-चन्द्रशेखर रावण को दे देंगे आजादी
-5हजार साल से पानी नहीं पीने दिया, इसबार भी नहीं पीने देंगे
-पानी नहीं पीने दिया, अब मूत पिलाएंगे
ये शब्द हैं उन लोगों के जो कल दिल्ली जंतर-मंतर पर आरक्षण ख़त्म करने के लिए गये थे। खुद को सवर्ण बोलते हैं और दूसरे लोगों से खुद को ऊंचा समझते हैं
आप लोग खुद देखिए इन लोगों की मानसिकता किस स्तर तक गिरी हुई है। बोलते हैं कि जातिवाद नहीं है लेकिन खुलेआम दूसरी जातियों को नीचा दिखा रहे हैं। कितना जहर भरा हुआ है इनके भीतर दूसरी जातियों को लेकर जिसकी कोई सीमा नहीं है
आज 21 वीं सदी के जिस दौर में पूरा विश्व विज्ञान व प्रौद्योगिकी की तरफ आगे बढ़ रहा है, ये लोग इस संकीर्ण नीच सोच से बाहर नहीं आ पा रहे हैं..!!😑
“3,000 साल तक पढ़ाई लिखाई पर केवल ब्राह्मणों का हक तक 100% आरक्षण था ,10% समुदाय ने 100% सीटें घेरी 3,000 साल तक अब 70 साल से परेशान हो रहे है”
— विकास दिव्यकीर्ति (UPSC टीचर)
ये कितने बेवकूफ लोग हैं जंतर मंतर पर जाकर ऐसी बकवास कर रहे हैं।
फिर इसके बाद "आरक्षण" खत्म करने की मांग करते हैं।
इनकी ऐसी ही सोच और करतूतों की वजह से तो आरक्षण लागू हुआ था— इन्हीं लोगों से SC/ST को बचाने लिए "आरक्षण" लागू किया गया था।
आरक्षण विरोधियों पर इतना प्रेम क्यों लुटा रही भाजपा?
दिलचस्प है कि इन्हें सिर्फ़ ‘आरक्षण विरोधी’ भी नहीं कहा जा सकता - क्योंकि EWS आरक्षण से इन्हें कोई दिक्कत नहीं। विरोध है तो SC-ST-OBC के आरक्षण का! और इनके एक दिन के धरने पर ही यूपी के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक खुद सामने - प्रेस कॉन्फ्रेंस, बातचीत और केंद्रीय मंत्री से बात कराने का आश्वासन!
दूसरी तरफ़ दलित-पिछड़े नौजवान अपने आरक्षण और हक़ के लिए महीनों सड़कों पर बैठे रहे, लेकिन सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। 69,000 शिक्षक भर्ती का आरक्षण विवाद भूल गए क्या?
वाह! क्या ग़ज़ब की तत्परता है - दलित-पिछड़ों का आरक्षण बचाने वालों के लिए बेरुख़ी और उसका विरोध करने वालों के लिए पूरी सरकार हाज़िर!
अब भी भाजपा की राजनीति का चरित्र समझने के लिए कोई और सबूत चाहिए?
🚨 बिना टिकट पकड़े गए भाजपा नेता 🚨
👉 AC COACH में सफ़र कर रहे BJP नेता और उनके साथी के पास TTE पहुंच गया, जैसे ही टिकट पूछा नेता जी फायर हो गए।
👉 टीटीई ने कहा टिकट दिखाओ नेतागिरी नहीं, इतना सुनते ही नेता जी ने फर्जी आरोप लगाते हुए कहा मोदी जी को गाली दे रहे हो अभी तुम्हारी नौकरी लेता हूं।
👉 टीटीई ने कहा कहां के नेता हो, नेता जी ने कहा सांसद विधायक के साथ मेरा उठना बैठना है, 22 साल से BJP में हूं, बक्सर के किसी भी अधिकारी को फोन लगाकर मेरे बारे में पूछो सब बता देंगे।
परबतसर विधायक श्री रामनिवास गावड़िया जी का आभार।
तृतीय श्रेणी शिक्षकों के वेतन संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे को राजस्थान विधानसभा में अतारांकित प्रश्न के माध्यम से उठाकर आपने हजारों शिक्षकों की आवाज़ को सदन तक पहुँचाने का सराहनीय कार्य किया है।
#pay_protection
तो फिर रामलीला मैदान से रात में क्यों सलवार कमीज़ पहन कर भागे थे लाला जी! क्यों उतरे थे रामलीला मैदान में?और 2014 के बाद याददाश्त क्यों चली गई काले धन और करप्शन को लेकर?
2012 में दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के मेडिकल कॉलेज में SC-ST MBBS छात्रों को फिजियोलॉजी में जानबूझकर बार-बार फेल किया गया, जबकि एनाटॉमी और बायोकेमेस्ट्री में वे पास थे.
जब हाईकोर्ट की निगरानी में री-एग्जाम हुआ, सभी छात्र पास हो गए. मुंगेकर कमिटी ने जातिगत भेदभाव की पुष्टि की,
जातिवाद है तो आरक्षण है, यह गरीबी उन्मूलन प्रोग्राम नहीं है, और मैरिट सिर्फ़ एक गुब्बारा है, जब आरक्षण नहीं था कौन सा अविष्कार कर दिया यह बताओ मनु की औलादों,
एक सुई तक का अविष्कार नहीं कर पाए तुम लोग, आज भी निजी संस्थाओं में आरक्षण नहीं है वहां भी कुछ उखाड़ नहीं पाए हो,
दलित पिछड़ा कमजोरो को पीछे कर दो अपने आप मैरिट उभर आएगी इसी स्ट्रेटजी के साथ तुम लोग चलते हो, तुम्हारे रोम रोम में सिर्फ जातिवाद है।