भगवान राम के नाम पर जितना लूटना था लूट लिया
अब राम के नाम पर कुछ मिलने वाला नहीं है
इसलिए अब इनको एक ही सहारा है बाबा 😅
#UGC_RollBack#DiyaKumariWithNariShakti
Netflix कभी घूसखोर दलित, मुसलमान या फिर यादव नाम से सीरीज बनायेगा ?
ऐसा करने की कोशिश भी करेगा, तो नेटफ़्लिक्स बर्बाद हो जाएगा
लेकिन ब्राह्मण सबसे आसान टारगेट है, इसलिये ये काम आसानी से कर सकता है।
जातिवादी कंपनी को भारत में काम करने का अधिकार नहीं मिलना चाहिये।
#ShameOnNetflix
@politics4bihar जी आप सवर्ण आयोग बिहार के अध्यक्ष है मामला दरभंगा का है
250। ब्राह्मणों के खिलाफ फर्जी एससीएसटी एक्ट लगाया गया क्या यही सामाजिक न्याय है
आप निवेदन है मामले में जांच करवाए पीड़ितों को न्याय दिलवाने का काम करें
#बिहार#BiharNews#दरभंगा@NitishKumar
@ews_army@AnilAgarwal_Ved
में अनिल अग्रवाल जी से कहना चाहता हूं कि आप देख ही रहे है, जाति के नाम पर सरकार किस प्रकार से सवर्णों का शोषण कर रही है दोहरा रवैया अख्तियार किए हुए है तो आपसे निवेदन है कि दान अपने समाज के सुपात्र को ही दे कृपात्र को नहीं ताकि समाज आगे बढ़ सके
यह डबल इंजन की सरकार हो या ट्रिपल इंजन की।
इनके कानून व्यवस्था हो या नीति नियम सब कुछ फेल हो चुका है। आज पूरा देशवासी यूजीसी के खिलाफ लिख रहा है आप भी लिखिए
#UGC_RollBack
सामान्य वर्ग क्यों हाशिए पर है?
सामान्य वर्ग (General Category) के 'हाशिए' पर होने या खुद को उपेक्षित महसूस करने के पीछे कई सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक कारण बताए जाते हैं। यह एक जटिल विषय है जिस पर समाज में अलग-अलग राय है।
1. आरक्षण और अवसर (Reservation and Opportunities)
सामान्य वर्ग के युवाओं के बीच सबसे बड़ी चिंता प्रतिस्पर्धा को लेकर है।
सीमित सीटें: सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षण संस्थानों में 50% से अधिक सीटें आरक्षित हैं। इसके कारण सामान्य वर्ग के मेधावी छात्रों को बहुत ऊंचे कट-ऑफ का सामना करना पड़ता है।
आर्थिक चुनौती: सामान्य वर्ग में भी एक बड़ा हिस्सा आर्थिक रूप से कमजोर है, जिन्हें पहले किसी विशेष सहायता का लाभ नहीं मिलता था (हालांकि अब EWS आरक्षण लागू किया गया है)।
2. राजनीतिक प्रतिनिधित्व और वोट बैंक
भारत की राजनीति अक्सर जातिगत समीकरणों के इर्द-गिर्द घूमती है।
वोट बैंक: राजनीतिक दल अक्सर पिछड़ी जातियों और दलित वर्गों को लुभाने के लिए विशेष योजनाओं और वादों की घोषणा करते हैं क्योंकि वे एक बड़ा वोट बैंक हैं।
मजबूरी: सामान्य वर्ग को अक्सर एक 'साइलेंट' या बिखरा हुआ मतदाता माना जाता है, जिससे कई बार उनकी मांगें मुख्यधारा की राजनीति में पीछे छूट जाती हैं।
3. सामाजिक धारणा (Social Perception)
ऐतिहासिक संदर्भ: ऐतिहासिक रूप से सामान्य वर्ग को 'विशेषाधिकार प्राप्त' (Privileged) माना गया है। इस धारणा के कारण, उनकी वर्तमान समस्याओं (जैसे बेरोजगारी या गरीबी) को अक्सर उतनी गंभीरता से नहीं लिया जाता जितनी अन्य वर्गों की समस्याओं को।
4. आर्थिक बदलाव
कृषि और पारंपरिक व्यवसायों में गिरावट आने के कारण सामान्य वर्ग के उन परिवारों पर भारी दबाव पड़ा है जो आर्थिक रूप से संपन्न नहीं थे। प्राइवेट सेक्टर में कौशल (Skills) की मांग बढ़ी है, और जिनके पास संसाधनों की कमी है, वे पिछड़ते जा रहे हैं।
5. सुरक्षा और कानून
कुछ लोगों का तर्क है कि कुछ विशेष कानूनों (जैसे SC/ST Act) के दुरुपयोग की घटनाओं के कारण भी इस वर्ग में असुरक्षा की भावना पैदा हुई है।
निष्कर्ष:
आज का सामान्य वर्ग, विशेषकर युवा पीढ़ी, खुद को एक ऐसी स्थिति में पाता है जहाँ उसे बिना किसी विशेष सरकारी संरक्षण के अत्यधिक प्रतिस्पर्धी माहौल में खुद को साबित करना होता है। सरकार ने इस असंतोष को कम करने के लिए 10% EWS (Economically Weaker Section) EWS आरक्षण की शुरुआत की लेकिन ये उसी तरह है जैसे राष्ट्रपति का पद
#सामान्य_वर्ग
#EWS
आज भोपाल सभी सवर्ण समाज के लोगों ने मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया और जोरदार प्रदर्शन हुआ कुछ लोगों ने अपनी गिरफ्तारी भी दी
राष्ट्रीय सवर्ण आर्मी भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष Suraj Prasaad Chubey जी और राष्ट्रीय महासचिव सुमित मिश्रा बुंदेलखंड प्रांत और उनकी टीम मौजूद रहीं
जब तक संतोष वर्मा पर FIR और उसकी गिरफ्तारी नहीं हो जाती तब सवर्ण समाज चुप नहीं बैठेगा
#एससीएसटीएक्ट_मुर्दाबाद #जातिगत_आरक्षण_मुर्दाबाद
आज रवि किशन जी ने (SC ST) क़ानून के दुरूपयोग की बात संसद में उठा कर एक नयी बहस की शुरुआत की है
उन्होंने सरकार से मांग की कि लोक हित में बनाये गये कानूनों का गलत उपयोग कर फर्जी मुकदमे दर्ज कराने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए
उन्होंने उन अधिकारियों की भी जवाबदेही तय करने की माँग की जिनकी अक्षमता के कारण ये फर्जी मुक़दमे लंबे समय तक चलते रहते हैं
रवि किशन ने अपने भाषण सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और दिशा निर्देशों का भी ज़िक्र किया
सराहनीय पहल लेकिन ओबीसी सरकार क्या इनकी बात को प्रमुखता देगी ?
बड़ा सवाल ये भी है कि आने वाले UP चुनाव के मद्देनजर ये बयान दिलवाया गया हो
जो भी हो 5% जो अभी तक सवर्ण संगठित हुए है ये उसका नतीजा भी हो सकता हैं सोचो 50% भी संगठित हो गए तो नजारा ही कुछ और होगा
सुमित मिश्रा
राष्ट्रीय महासचिव
राष्ट्रीय सवर्ण आर्मी भारत
#सवर्ण_एकता_जिंदाबाद
#एससीएसटीएक्ट_मुर्दाबाद #जातिगत_आरक्षण_मुर्दाबाद #14_दिसंबर_भोपाल_कूच
दलित, जातिवाद समाप्त करने के लिए सवर्ण लड़की की ही मांग क्यों करते हैं?
किसी दूसरी दलित जातियों या जनजातियों के साथ अपनी लड़की का सम्बन्ध क्यों नहीं करते हैं?
अथवा अपनी लड़की का विवाह किसी बेरोजगार ब्राह्मण लड़के के साथ करके जातिवाद खत्म करने की बात क्यों नहीं करते?
लाखों बेरोजगार गरीब ब्राह्मण लड़के हैं जो किसी दलित उच्च अधिकारी, सांसद, विधायक, मंत्री,की बेटी से सहर्ष विवाह के लिए तैयार बैठे हैं।
दरअसल बात न तो जातीय भेदभाव की और न विवाह सम्बन्ध की है। पांच पीढ़ियों से हराम का जातीय आरक्षण खाकर इनकी मानसिकता कुंठित हो गई है। ये कुंठित लोग किसी न किसी बहाने दिन रात सिर्फ सवर्णो को अपमानित करके, जातिवादी नफ़रत फैलाने का काम करते हैं। इन्हें पता है कि एससी-एसटी एक्ट जैसे जातिवादी कानून इन्हें पूरी कानूनी सुरक्षा दे रहे हैं, जातीय संगठन इनका अंध समर्थन करते हैं। इसलिए बेखौफ होकर जातिवादी नफ़रत फैलाते हैं।
अंतर्जातीय विवाह से जाति समाप्त करके की बात चरम मूर्खतापूर्ण विचार है। हर साल लाखों की संख्या में अंतर्जातीय विवाह होते हैं, स्वयं अम्बेडकर ने भी अंतर्जातीय विवाह किया था।लेकिन आज तक किसी की भी जाति समाप्त नहीं हुई। अंतर्जातीय विवाह करने के बाद भी उनकी संतानें, सरकारी जाति प्रमाण पत्र बनवाकर पीढ़ी दर पीढ़ी आरक्षण का लाभ उठा रहे हैं।
अंतर्जातीय विवाह की बात सिर्फ सवर्णो के साथ क्यों?
दलितों जनजातियों और ओबीसी की हजारों जातियां आपस में विवाह सम्बन्ध बनाकर जातिवाद समाप्त करने का प्रयास क्यों नहीं करते हैं? क्या दलितों पिछड़ों को आपस में विवाह से कोई ब्राह्मण रोकने जाता है?
कुछ भी कर लो, पांच पीढ़ियों से आरक्षण की भीख पर पलने वाले आरक्षणखोर किसी भी कीमत पर मुफ्त की सुविधाएं और आरक्षण छोड़ने को तैयार नहीं। अपनी जाति से सर्वाधिक चिपके रहने वाले वही लोग हैं जिन्हें सबसे ज्यादा आरक्षण का लाभ मिल रहा है। आरक्षण बनाए रखने के लिए ये निरंतर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करते हैं जिससे समाज में हिंसा हो और ये उस हिंसा को जातीय भेदभाव बताकर,अपने हराम के आरक्षण का बचाव कर सके।
आरक्षण के सहारे करोड़पति अरबपति हो चुके दलित भी, जातीय आरक्षण और मुफ्त की सरकारी छूट नहीं छोड़ना चाहते हैं इसलिए बार बार कहते हैं कि आरक्षण का गरीबी से कोई लेना-देना नहीं। जबकि आज भी असली भेदभाव आर्थिक ही है।
अंतर्जातीय विवाह के लाखों उदाहरण है, लेकिन एक भी उदाहरण ऐसा नहीं मिलेगा जब किसी मंत्री सांसद ने अपनी बेटी की शादी किसी गरीब मजदूर से की हो।
#आरक्षण_हटाओ_देश_बचाओ
ब्राह्मण समाज की बहु बेटियों पर इस प्रकार की टिप्पणी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी
UP पुलिस से और लखनऊ पुलिस से निवेदन है कि इस पर तुरंत कार्रवाई की जाए
ऐसे लोग समाज की एकता को छिन्न भिन्न करने में लगे हुए है
@Uppolice@lkopolice@myogiadityanath@ChubeySuraj@Adv_Anil_Mishra