भाई तू ब्लैक में अपनी टिकट बेच तुझे राम मंदिर से क्या लेना।तुम तो वहां हॉस्पिटल बनवाना चाहते थे अब तुम्हारे पेट में दर्द क्यों हो रहा है तुम हिन्दू तो हो नहीं तुम तो सेकुलर हो।क्योंकि इस देश में हिन्दू होना गुनाह है। और तूम जैसो की नजर में चुभता है
जब मैं कहता हूँ ED पार्टी (BJP) “चंदा चोर” है तो कुछ लोग मुझसे नाराज हो जाते हैं।
अब ज़रा ध्यान से सुनिए,
जब प्रभु श्री राम के मंदिर के मंदिर में चंदा चोरी और जमीन ख़रीद के नाम पर घोटाला चल रहा था, उस वक़्त 2020 से 2024 तक मोदी का सबसे क़रीबी ज्ञानेश कुमार ट्रस्ट का सदस्य था।
इनका काम प्रशासनिक समन्वय, सरकारी प्रक्रियाओं, सुरक्षा, भूमि, विकास और अन्य सरकारी मामलों में ट्रस्ट की सहायता करना होता था।
लेकिन ये तो चंपत राय के साथ मिलकर प्रभु श्रीराम का मंदिर लूटने में जुटे थे।
जाँच इसकी भी होनी चाहिए की ED पार्टी ने कितना पैसा लूटा।
महमूद गज़नवी ने सोमनाथ का मंदिर लूटा।
ED पार्टी ने प्रभु श्री राम का मंदिर लूटा है।
भारत को जोड़ने का रास्ता संविधान, सामाजिक न्याय और बराबरी से जाता है, न कि विभाजन, भेदभाव और श्रेष्ठता की राजनीति से।
कल्याण कर्नाटका के लिए Article 371 (J) जैसे कदमों ने लाखों लोगों को अवसर दिए, लेकिन आज भी सबसे बड़ी लड़ाई संविधान की उस भावना को बचाने की है जो हर भारतीय को समान अधिकार और सम्मान देती है।
जो विचारधारा समाज को जोड़ने के बजाय बाँटने का काम करती है, वह देश को मजबूत नहीं, कमजोर करती है। भारत की असली ताकत उसकी विविधता, समावेशिता और भाईचारे में है।
#DilSeWithKapilSibal
चोट उँगली में थी और दोष पूरे शरीर को देते रहे । उँगली नीतीश थे और शरीर लालू जी । कितनी आसानी से लालू जी को खलनायक बना दिया गया और खलनायक को नायक बनाकर पूजते रहे । पिछले बीस पच्चीस सालों में क्या हासिल किया बिहार ने,मीडिया ने लालू जी के कार्यकाल को बनाया बीमारू कहा । मीडिया ने ही नीतीश को कहा विकास पुरुष,खैर हमे नीतीश से कोई लेना देना नही क्योंकि ऐसे लोगों से क्या ही उलझें,आज कुछ,कल कुछ,परसो कुछ,न ज़ुबान का ठिकाना और न ही किरदार का कोई ठिकाना । कुर्सी के लिए किसी को भी पाया बना लेने वालों पर बात ही बेईमानी है । ख़ैर अब वह ख़ुद पैदल हो गए हैं ।
सारी ज़िन्दगी जिन्होंने लालू पर परिवारवाद का आरोप लगाया,वह खुद अपनी औलाद को बुढ़ापे में लेकर खड़े थे ।।यह थी नैतिकता,कम से कम लालू जी ने जनता की आंख में धूल तो नही झोंकी ।
हम आते हैं लालू यादव पर,उनके ऊपर चवन्नी छाप भी उठकर भृष्टाचारी का आरोप लगा देते हैं । वह भी चारा चोर कहकर खी खीखी करते हैं जिनमें राजनैतिक अक़्ल एक रत्ती से भी कम है । यह मासूम लोग हैं, इन्हें टीवी में बैठा एंकर बता देता है फलाने चोर हैं, यह चोर चोर बकने लगते हैं । टीवी का एंकर कह देता है कि फलाने महान हैं, विकास पुरुष हैं । यह उसके नाम ले लेकर लहालोट होते हैं । यह कभी भी पलट कर अपने इर्द गिर्द नही देखते हैं ।
लालू के ज़माने में हुए अपराध को देखते वक़्त सूक्ष्मदर्शी इस्तेमाल करते हैं और वर्तमान सत्ता के अपराध झाँकने में अपनी मटर जैसी आँखे इस्तेमाल करते हुए पर्दा डाल देते हैं । ज़रा बिहार के
अगल बगल के मुख्यमंत्री को भी देखें,उन्होंने अपने राज्यों में बिहार से ज़्यादा काम किया है। जबकि वह आते जाते रहे हैं । यूपी को ही ले लें,नीतीश के समकक्ष मुलायम सिंह यादव,मायावती या राजनाथ सिंह,सबने इनसे बेहतर काम कम वक्त में किया है ।
अखिलेश यादव के पाँच साल के काम तो नीतीश अगले पचास साल में भी नहीं कर सकते थे । नीतीश एक ढोल थी जो सिर्फ लालू लालू लालू कहकर बज रही थी । लालू को गरियाओ और सत्ता पाओ । लालू को गले लगाओ और सत्ता पाओ । यानी सत्ता सिर्फ एक नाम से मिलती,लालू और लालू । लालू बूढ़े हुए,राजनीति से हटे,नीतीश शून्य हो गए ।
लालू कभी नैतिकता में नीचे नही गिरे,कभी घिनौनी राजनीति नही की । कभी अपशब्द नही बोले, बस देशज अंदाज़ में तफरीहन बातें की । गलतियाँ उतनी ही कि जितनी हमारे देश के तमाम विख्यात नेता करते रहे और काम भी उतना ही किया ।अब लालू लंबी जेल की सज़ा काटकर ज़मानत पर है, यही प्रमाण है उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता का और उस सत्ता के डर का जो हुक़ूमत, लालू की आंख देख सहम जाती है ।
क्या समझते हैं कि लालू के वक़्त जज मॉर्निंग वॉक पर नही जाया करते थे । क्या समझते हैं कि लालू फ़ैसले मैनेज नही कर सकते थे। दूसरे तमाम नेताओं की तरह अपने ऊपर से मुकदमे हटा नही सकते थे क्या । कितने ही प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने ख़ुद पर से आपराधिक मुकदमे खुद ही खत्म कर लिए,तो क्या लालू यह नही कर सकते थे ।सब कर सकते थे मगर नही किया गया । सलाखों को कुबूल किया, तभी न्यायालय पर आपको भरोसा है ।
हमने बहुत से गुंडों को बहुत ऊंचे पद पर बैठे देखा है । आप भी देख रहे हैं, तब भी आपको लगता है कि लालू गलत थे ।
एक बार लालू के सर लगे इल्ज़ाम को देखिएगा,रुपयों की गिनती कर लीजिएगा और यह भी देखिएगा उतने रुपये में आजका सत्ताधीश कितने विधायक खरीदकर चुनी हुई सरकार गिराता है ।
वह बेहिया लोग लालू पर सवाल उठाते हैं, जो विधायक-सांसद खरीदने वाले के सामने सर झुकाया करते हैं । ईमानदार हो तो सर उठाकर उसको भी इतना ही कोसो जो लालू के सर मढ़े भ्रष्टाचार की कीमत में केवल एक या डेढ़ विधायक ही खरीद पाता। जबकि उसने बीसों को खरीदा है, सोचो कितना खर्च किया होगा । सरकारें गिराई हैं, पार्टियां तोड़ी हैं, क्या यह सब बीफ ईमानदारी से हुआ है । इन विधायक चोरों को पर्दे में छिपाकर । उन्हें ज़बरदस्ती चाणक्य का दर्जा देते हुए,ज़रा भी शर्म नही आती दोगले आपको ।
जो सांसद और विधायक चुरा लें, दूसरे दलों में पैसा फेंककर टूट करें,अकूत दौलत से दल तोड़ डालें,वह चाणक्य हैं और लालू भ्रष्टाचारी । अगर जाति की।कुंठा न हो तो सच दिखाई दे कि इस समय सबसे बड़ा भ्रष्टाचारी कौन है ।
लालू का जेल मे रहना और लालू को बदनाम करना, दोनों से किसी की चुनावी दुकान चलती है । लालू जेल में हैं, यह भी उनकी ईमानदारी है । बहुत पहले लिखा था कि राहुल को इस भारत मे अगर आज किसी से राजनीतिक दीक्षा लेनी चाहिए, वह सिर्फ लालू प्रसाद यादव हैं । राहुल ने तो आगे बढ़कर लालू जी को गले लगा लिया,उनके साथ देखकर तबियत खिल उठती है ।
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@CJP_4_Bihar बैंगन की औलाद देश ये भी बता के हम आजाद नहीं हुए थे बल्कि सरकार की शक्तियां स्थानांतरण हुई थी और नेहरू को ईसाइयों ने अपना गुलाम PM बनाया था और दिन हमारी अर्थव्यवस्था विश्व में 4 नम्बर पर थी नेहरू कांग्रेस ने देश को कर्ज में डुबो दिया
@ajitanjum तुम जैसे पत्रकारों को मैने नेताओं के तलवे चाटते देखा हैं जब हिंदुस्थान आजाद हुआ तब हमारी अर्थव्यवस्था 4 नंबर थी और इन इन काले अंग्रेजों ने उसे 15 नंबर पर लाके छोड़ा था।तेरा काम चाटुकारिता करना है तू कर
चंदा चोरों गद्दी छोड़ो।
प्रभु श्रीराम के नाम पर चढ़ावे में चोरी कई गिरफ़्तार 20 लाख बरामद किए गए।
CCTV में पकड़ी गईं चोरी।
आख़िर इन चंदा चोरों के पक्ष में क्यों खड़ी है BJP?
BJP को कितना कमीशन मिलता है?
चोर भाई के क्या हाल है फिल्म की टिकट खा गए स्कूल के टाट कुर्सी बैंच,लैटरीन, मूत्रालय,खा गए पंजाब में किसानों का खाद बीज खा गए
रोड खा गए भैंसों का गोबर खा गए शराब पी गए मुर्गे खा गए।PAK को ख़ुफ़िया खबर ओर बोडर बेच कर खा गए
"कोयला खा गए, गैस खा गए, तेल खा गए, SAIL खा गए, एयरपोर्ट खा गए, रोड खा गए, पोर्ट खा गए, पेपर लीक में हजारों करोड़ खा गए, और अब भगवान श्री राम को भी नहीं बख्शा। मंदिर के चढ़ावे में भी चोरी कर ली।
'चंदा चोरों, गद्दी छोड़ो।'"
चंदा चोरों गद्दी छोड़ो।
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के नाम पर चंदा चोरी करने वालों को जेल भेजो।
चंपत राय जी क्या आप प्रभु श्रीराम की मूर्ति पर हाथ रखकर सौगंध खा सकते हैं कि चंदाचोरी नहीं हुई?
ख़ान Sir की पूरी बात ध्यान से सुनिए एक सच्चे इंसान को बदनाम करने के लिए भाजपा के हिंदू मुस्लिम और युवाओं को बाँटने के एजेंडा में मत फँसिए।
ख़ान Sir वही हैं जिन्होंने लाखों बच्चों को न्यूनतम शुल्क में पढ़ाया कभी हिंदू मुसलमान नहीं देखा।
इन्होंने तो सम्राट सरकार की तारीफ़ भी की ऐसे में ख़ान Sir को टारगेट करना ठीक नहीं।
मामले की गहनता से निष्पक्ष जाँच कराई जाए।