Booked a Tatkal Sleeper ticket today from kanpur central to New Delhi.
Filled every detail in seconds, but IRCTC kept showing- "We are experiencing high load."
Tried repeatedly, Then my ID got locked out. Minutes later, every seat was gone.
So the question is - who actually gets these Tatkal tickets?
Genuine passengers or a system designed to fail common people every morning?
If lakhs of users face the same "high load" issue daily, why has it still not fixed it?
Or is the chaos itself benefiting someone?
@IRCTCofficial@RailMinIndia@AshwiniVaishnaw
Koderma-Barkakana doubling project across Jharkhand, approved by the Cabinet.
- Distance: 133 km
- Cost: ₹3,063 Cr
✅ Will save 163 Cr kg CO2 (= planting 7 Cr trees)
✅ Most efficient rail line b/w Patna & Ranchi
✅ Enhanced connectivity to 938 villages & 15 lakh population
@askshivanisahu Pura Jharkhand Police Corporation me dooba hua hai Jharkhand k sabhi district ka yahi haal hai, Ye Police wale Morning se hi Logo se Paise loot te hai or Evening me ussi Paise ko apne Rank k anusar Distribution karte hain
हर उद्दंड पुलिस को इसी तरह के लत���ड़ की आवश्यकता है। साथ ही, पुलिस कमिश्नर या एसपी को उतने ही दिन जेल में रखा जाए, जितने दिन से अन्य को रखते हैं और स्टेट से केस लड़ने की पूरी फीस वसूल कर वापिस की जाए। ये साले खुल्लमखुल्ला गुंडई करते हैं।
दिल्ली हायकोर्ट के जज यशवंत वर्मा घर पर नहीं थे और घर में आग लग गई। पत्नी ने फायर ब्रिगेड बुलाया। आग बुझाते समय एक कमरे में नोटों की गड्डियों का ढेर मिल गया। पुलिस और चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ���ो सूचित किया गया।
खन्ना साहब ने इसे ‘बहुत गंभीर’ मानते हुए कॉलेजियम की मीटिंग बुला ली और तुरंत कहा कि इनका तो ‘ट्रांसफर’ होना चाहिए। पाँच सदस्यों के कॉलेजियम में ‘कुछ लोगों’ ने कहा कि केवल ट्रांसफर करने से न्यायपालिका में लोगों की आस्था कम होने का संकट हो सकता है।
संजीव खन्ना ने ट्रांसफर से आगे कुछ नहीं किया है। आप सोचिए कि कैश का पहाड़ मिला घर में और उसका कोई हिसाब नहीं होगा, पर भारत का मुख्य न्यायाधी�� केवल ट्रांसफर कर रहा है। उसने निलंबन का भी नहीं सोचा, बस यह कहा कि जो काम दिल्ली में कर रहे हो, वो इलाहाबाद में करो।
ये है हमारी न्यायपालिका। और किसी भी नौकरी में, भ्रष्टाचार उजागर होने पर निलंबन के साथ जाँच बैठती है, पर संजीव खन्ना ने सोचा होगा कि क्या पता यशवंत जी घर से बैंक चला रहे हों! या सूद लेन-देन का व्यापार करते हों जिससे गरीबों की सहायता होती हो?
आखिर राम मनोहर मिश्रा ने कल जो पॉक्सो केस में निर्णय दिया, वो क्यों नहीं दिया जाएगा? चीफ जस्टिस को ही जुडिशरी के सम्मान की कोई चिंता नहीं है।
जो पहाड़ पर चढ़ता है वो झुककर आगे बढ़ता है..
जो पहाड़ से नीचे उतरता है, वो सीधा अकड़कर उतरता ह���..
बस इसी से समझ लीजिए..
जो झुककर चल रहा हो, वो सफलता की तरफ बढ़ रहा होगा..
जो अकड़कर चल रहा होगा, वो शिखर से नीचे उतर रहा होगा.