लोकतंत्र का सबसे कड़वा प्रसाद अब पत्रकारों को लाठियों के रूप में दिया जा रहा है। जंतर-मंतर पर पत्रकार राहुल कोटियाल के साथ हुई कथित पुलिस कार्रवाई यह सवाल खड़ा करती है कि क्या अब सच दिखाना भी अपराध बन गया है? अगर सत्ता को कैमरे और कलम से इतना भय है, तो समझिए डर जनता से नहीं !
केशव थलवाल को सुद्धोवाला जेल भेजा जाना दुर्भाग्यपूर्ण , उत्तराखंड क्रांति दल केशव को न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है
#i_stand_with_keshav_thalwal
देवभूमि उत्तराखंड के वीर सपूत, पेशावर कांड के महानायक वीर चंद्र सिंह गढ़वाली जी की पुण्यतिथि पर शत-शत नमन। उनका साहस, त्याग और वीरता उत्तराखंड के हर युवा के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। जेल से लौटकर भी उन्होंने अपने प्रदेश और जनता के लिए जीवन समर्पित किया।
आज फिर एक पत्रकार की हत्या कर दी गई। वो सिर्फ पत्रकार नहीं था, वो पहाड़ का सच्चा सपूत था। उसने सत्ता के भ्रष्टाचार और सिस्टम की पोल खोलने का साहस किया, हर छोटे-बड़े मुद्दे पर बेबाकी से बोला… और इसके बदले उसे इनाम मिला हत्या का!
आख़िर कब तक इस राज्य में सच को कुचला जाता रहेगा?
आन्दोलन तो खत्म कर दिया गया है, पुष्पा जानता है कि 15 लाख कभी खाते में नहीं आयेंगे, सीबीआई जांच नहीं होगी, हां पेपर निरस्त किया जा सकता है वो फिर हो जायेगा और नौकरी उन्ही को मिलनी है जिनको मिलनी तय की गयी है।
धन्य हैं आन्दोलनकारी और धन्य है पुष्पा
केशव प्रकरण में पहाड़ विरोधियों की अलग टीम सामने आ गयी है, उसकी पुरानी वीडियो डाल के का साबित करना चाहते हो?? पुलिस वाली से अभद्रता की कह रहे हो पुलिस वाली कितनी दूध की धुली थी वो??
I stand with Keshav Singh
उत्तराखंड के लोगो ने भृष्टाचार और अपराधों को इस कदर पचा लिया है कि अब रोज रोज रेप हत्त्या, किसी को पीटना, किसी की नौकरी छीन देना आम बात हो चुकी है।
वही बात है जबतक चोट तुम्हे नही लगेगी दर्द भी नही होगा
मैं खुद इस बात का गवाह हूँ कि उत्तराखंड पुलिस का एक आम नागरिक के साथ क्या व्यवहार होता है, और आप सभी भी अच्छे से जानते है,केशव थलवाल तो फिर भी इनके काले कारनामे उजागर करने में लगा हुआ था