किसी और की नहीं बल्कि काँग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की ज़िम्मेदारी बनती है क्योंकि टिकट बंटवारे की सूई उन पर ही आकर ठहरती है। उनको नैतिकता के आधार पर इस्तीफ़ा दे देना चाहिए। अगर वे अब भी बने रहे तो कांग्रेस की और हार के लिए तैयार रहें।
अगर किसी के प्रोटेस्ट से सरकारी स्कूल की बिल्डिंग ठीक हो जाती है, टीचर की नियुक्ति होने लगती है तो ऐसे प्रोटेस्ट ठीक हैं!
किसी के चंद मिनट स्कूल आने से स्कूल के प्रति जागरूकता बाद रही है तो ऐसा डिस्टर्ब होना ठीक है!
पूरे साल सरकारी स्कूल को जनगणना से लेकर हर काम में लगाने से शिक्षण कार्य प्रभावित नहीं होता है तो इससे भी नहीं होना चाहिए!
चलिए इस चर्चा को और थोड़ा आगे बढ़ाते हैं!
राम मंदिर निर्माण का रास्ता तब साफ हुआ, जब सुप्रीम कोर्ट ने भगवान रामलला विराजमान के पक्ष में फैसला सुनाया। लेकिन क्या आपको पता है कि 1989 से पहले हिंदू पक्षकारों में से किसी ने भी विवादित जमीन पर दावा नहीं किया था।
गोपाल सिंह विशारद ने राम जन्मभूमि पर पूजा की अनुमति मांगी। निर्मोही अखाड़ा ने मंदिर प्रबंधन अपने हाथ में सौंपने की मांग की थी। तात्कालीन गृहमंत्री और कांग्रेस नेता बूटा सिंह ने अपनी कानूनी समझ का इस्तेमाल करते हुए विश्व हिंदू परिषद (VHP) को बहुत महत्वपूर्ण सुझाव दिया।
जब राम मंदिर आंदोलन जोर पकड़ने लगा और तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने विवादित परिसर का ताला खुलवा दिया तब तत्कालीन गृहमंत्री बूटा सिंह ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता शीला दीक्षित के जरिए विश्व हिंदू परिषद के अशोक सिंघल को संदेश भेजा। सरदार बूटा सिंह ने दीक्षित के जरिए सिंघल को बताया कि हिंदू पक्ष की ओर से दाखिल किसी मुकदमे में जमीन का मालिकाना हक नहीं मांगा गया है और ऐसे में उनका मुकदमा हारना तय है। उसके बाद रामलला को पक्षकार बनाया गया था। @chitraaum@VinodAgnihotri7
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सिर्फ़ दो ही संभावनाएँ हैं।
या तो रक्षा मंत्री @rajnathsingh ने जब संसद को संबोधित किया तो उनकों यह जानकारी ही नहीं थी कि छह सैनिक शहीद हो चुके थे। यदि ऐसा है, तो यह उस मंत्री पर गंभीर प्रश्नचिह्न है, जिसे उसी मंत्रालय के मामलों की जानकारी नहीं है जिसका वह नेतृत्व कर रहे हैं।
या फिर उन्हें सच्चाई मालूम थी और इसके बावजूद उन्होंने संसद को गुमराह करना चुना। यह उससे भी अधिक गंभीर है, क्योंकि इससे यह सिद्ध होता है कि यह सरकार लोकतंत्र के मंदिर में, शपथ के साथ, देश से झूठ बोलती है।
जो भी सच हो, कुछ तथ्य नहीं बदलते -
हमारे छह वीर जवानों ने कर्तव्य निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। लेकिन उनके बलिदान को छिपाया गया। उन्हें वह सम्मान और मान्यता नहीं दी गई जिसके वे हकदार थे। और उनके परिवारों से वह पारदर्शिता भी छीन ली गई जिसकी वे अपेक्षा रखते थे।
यह हमारे सैनिकों का अपमान है, और कोई भी सच्चा देशभक्त इस पर मौन या संतुष्ट नहीं रह सकता।
अब ये स्वीकारा गया है कि ऑपरेशन सिंदूर में 6 भारतीय सैनिक शहीद हुए
पर सुनिए
संसद में 28 जुलाई 2025 को जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्ष को ललकारते हुए कहा था
“आपको प्रश्न पूछना है तो यह पूछिए की क्या इस ऑपरेशन में हमारे जवान सैनिकों को कोई क्षति हुई? तो उसका उत्तर है नहीं”
और इस पर सत्ता पक्ष ने जमकर ताली बजायी थी… मेज़ थपथपाई थी
Telegram के फाउंडर पावेल ड्यूरोव ने भारत सरकार द्वारा Telegram पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध की आलोचना की है।
पावेल ड्यूरोव का कहना है कि कुछ लोगों द्वारा परीक्षा प्रश्नपत्र लीक साझा किए जाने की वजह से Telegram पर रोक लगाना भारत के 15 करोड़ से अधिक सामान्य यूजर्स को दंडित करने जैसा है, न कि उन लोगों को जिन्होंने कथित तौर पर पेपर लीक किया है।
टीमएसी के बागी सासंदों के विलय के बाद NCPI पार्टी अचानक चर्चाओं में है...3 साल पहले बंगाल के पति-पत्नी ने इस पार्टी का गठन किया था...पति उत्तिया कुंडू पार्टी के अध्यक्ष है और पत्नी शेउली कोषाध्यक्ष है...हावड़ा में इसका दफ्तर है....पार्टी ने 2023 में त्रिपुरा चुनाव में 4 उम्मीदवार उतारे थे...टोटल 1 हजार 198 वोट मिले...मजे की बात है कि चुनावी पोस्टर में पार्टी का नारा था-अपने अधिकारों को बचाने के लिए दलबदलुओं को नकारें....त्रिपुरा चुनाव बाद यह पार्टी गायब हो गई.....अब इस पार्टी को अचानक 20 सांसद मिल गए हैं....
हाल ही में दिल्ली में आयोजित कांग्रेस की प्रभारी PCC चीफ की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने दिखाई नाराजगी!
खड़गे ने बैठक में राजस्थान PCC चीफ गोविंद डोटासरा से जताई नाराजगी…और कहा सबको साथ लेकर चलें…प्रदेश में आपकी बहुत शिकायतें है! (सूत्र)
#Rajasthan
अयोध्या के राम मंदिर में दान में हुई चोरी को लेकर ट्रस्ट ने योगी सरकार से SIT बना कर जांच कराने की मांग की है. पर नियमों के हिसाब से तो CBI के पास ये मामला जाना चाहिए था. केंद्र सरकार ने ट्रस्ट का गठन किया. ट्रस्ट के 15 में से 12 सदस्य भी केंद्र की तरफ से ही तय हुए.
"जब कोई विदेशी ताकत किसी भारतीय की हत्या करे, तो PM को बोलना पड़ता है, लेकिन मजाल है जो ये एक शब्द बोल जाएं..."
◆ LoP राहुल गांधी ने कहा
@RahulGandhi | Rahul Gandhi | @narendramodi | Narendra Modi
प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी केंद्र सरकार को इस बात के लिए घेरा करते थे कि वह आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को दुनिया में अलग-थलग करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति पर दबाव डाले।
अब क्या मौजूदा केन्द्र सरकार वैसा ही दबाव अमेरिकी राष्ट्रपति पर डाल पा रही है? नाह!
उल्टा ट्रंप तो पाकिस्तान की शान में एक से बढ़ कर एक कसीदे पढ़ते नहीं थक रहे!
गर्भवती महिलाओं जैसी संवेदनशील और सम्मान से जुड़ी बात पर राजस्थान के चिकित्सा मंत्री श्री गजेंद्र सिंह खींवसर का बयान बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है।
जिस पद पर बैठा व्यक्ति प्रदेश की माताओं-बहनों के स्वास्थ्य और सम्मान की जिम्मेदारी रखता है, उससे ऐसी टिप्पणी की उम्मीद नहीं की जा सकती। यह सिर्फ एक बयान का मामला नहीं, बल्कि महिलाओं के प्रति सोच और संवेदनशीलता का सवाल है।
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी को इस मामले में स्पष्ट कदम उठाते हुए मंत्री जी से सार्वजनिक रूप से माफी मंगवानी चाहिए।
बीजेपी ने नारा दिया था — “बहुत हुआ महिलाओं पर अत्याचार, अबकी बार मोदी सरकार।”
लेकिन सवाल आज भी वही है — महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा पर सिर्फ नारे चलेंगे या जिम्मेदारी भी तय होगी?
यह केवल महिलाओं के सम्मान का नहीं, बल्कि समाज की सोच का भी प्रश्न है।
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी को इस मामले में स्पष्ट रुख अपनाते हुए मंत्री जी से सार्वजनिक रूप से माफी मंगवानी चाहिए।
@RajCMO@BhajanlalBjp
NEET,CUET,CBSE को लेकर कांग्रेस एक देश व्यापी आंदोलन की तैयारी कर रही है।छात्रों की नाराज़गी को लेकर कांग्रेस इस आंदोलन को हर ज़िले तक लेकर जाएगी।और शायद इसी लिए कल सभी महासचिव,प्रभारी और प्रदेश अध्यक्षों की बैठक दिल्ली में बुलाई गई है।
Genz Outreach
मीनाक्षी नटराजन के मामले में कांग्रेस पार्टी 4 बजे तक चुनाव आयोग के जावाब का इंतजार करेगी। आयोग से अगर राहत नहीं मिला तो पार्टी आज ही कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी..ताकि कल सुबह इस मामले की सुनवाई हो सके..
क्रास वोटिंग के डर से काँग्रेस अपने मध्यप्रदेश और झारखंड के विधायकों को दूसरे राज्य में भेजने की तैयारी कर रही है।लेकिन इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता।हरियाणा के विधायकों को हिमाचल प्रदेश भेजा गया था,फिर भी क्रास वोटिंग हो गई।ख़रीदने वाले और बिकने वालो के तार पहले ही जुड़ जाते हैं।