अब जब इतने नए तरह के केस आ रहे हैं, तो मोदी जी को मोदी एक्ट में कुछ नए संशोधन भी करने चाहिए। वैसे भी आठ वर्ष तो हो गए हैं, ब्राह्मणवादियों ने यातना के नए तंत्र विकसित कर लिए हैं जैसे कि परीक्षा में फोन पर तो बैन था, पर आप बताइए कि फोन में AI नहीं चला सकते!
पूरी दुनिया अभी AI कर रही है, भोजपुरी में गाना बन गया है और IIT में बच्चों को रोका जा रहा है, अतः मोदी जी शीघ्र ही इसमें संशोधन करें कि दलित भाई ओपन बुक और ओपन AI एग्जाम दे सकते हैं।
यदि वो पकड़े जाएँ तो उन्हें उसी समय दो लाख रुपए का अवार्ड दिया जाए, और यह राशि पकड़ने वाले शिक्षक से ली जाए।
इसके बाद, मोदी जी अगर चाहें तो, मतलब एकदम ही मन हो तो, ऐसा भी कर सकते हैं कि भारत में कोई भी दलित, कहीं भी, किसी भी कारण से मरे, डूब जाए, हृदयाघात से मरे, किडनी फेल हो जाए, लीवर का रोग हो, बुखार लग जाए, दस्त हो जाए, या जो भी कुछ अनुचित टाइप का उसको फील हो, तो बगल में जो सबसे निकटस्थ जनरल कैटेगरी का व्यक्ति हो, उसके पूरे परिवार, या उसकी इच्छा हो तो उसके पूरे गाँव पर SC Act लगवा सकते हैं।
और भी कर सकते हैं, पर वो सब यूपी चुनाव के बाद होगा ताकि 2029 में मोदी जी का जलवा बरकरार रहे।
IITs को attack इसलिए किया जा रहा है क्योंकि यहाँ हमारे best brains, engineers पहुँचते हैं। Engineering देश और दुनिया को चलाती है। सीधी सी चीज़ है, अगर engineering न हो, soft या hard, nothing will work.
जब IITs के ऊपर इस तरह से attack होने लगे, बार-बार होता रहे। उसके बाद क्या होगा कि सारे professors, जो भी जहाँ पे हैं, वो डर जाएंगे, बच्चे डर जाएंगे।
हमने UGC Act का विरोध क्यों किया था? यही कारण था।
campuses में छात्र सिर्फ प्रो. से नहीं सीखता; college campus या hostel, playground, canteen, other activities ऐसी जगहें होती हैं, जहाँ आप स्वयं भी interact करते हैं। और वो interaction can be very informal.
वहाँ पर आपस में बच्चों का, मतलब रंग के कारण, नाम के कारण, पिता के नाम के कारण, tone के कारण, जिस जगह से आया उसके कारण, आपस में हँसी मज़ाक का एक तरीका (बेहद लाइट) होता है।
आप सोचिए कि कोई दूसरी जाति का हो और वो पढ़ रहा हो, समझ में नहीं आ रहा हो उसको, या इधर-उधर वो देख रहा हो और बोल दे, आपकी जाति का नाम लेकर कि साला तुम लोग को इसीलिए नहीं आने देते। इस तरह से उसको बोल दो, तो वो केस file कर देगा।
वो न करे, Flying Squad सुन रहा है, वो कर देगा। Equity Squad चल रहा है। इस कारण हमने UGC का विरोध किया था।
नया कीवर्ड राजनैतिक बाजार में आया है: ओबीसी एट्रोसिटी एक्ट आ जाएगा। सपा-कॉन्ग्रेस कह रही है कि ले आएँगे सत्ता में आते ही, भाजपा कह रही है कि ये लोग ले ही आएँगे इसीलिए कमल को वोट दो। चटुआ सेल भी कह रहा है कि हाँ ब्रो, अब क्या करोगे GC वालों!
सत्य यह है कि तीनों ही पार्टियाँ ओबीसी को ही लुभाने के लिए कार्य कर रही है। जो काम कॉन्ग्रेस-सपा भविष्य में करने को बोल रही है, वह भाजपा ने 14/01/26 को यूजीसी के माध्यम से कर दिया है।
कुछ दिन पहले जाट-गुर्जर के नाम पर कह रहे थे कि वो लोग जंतर मंतर पर आ जाएँगे तो तुम लोग कहाँ जाओगे GC वालों। इन लोगों मे जाट-गुर्जरों को गुंडा मान लिया है, जबकि सत्य यह है कि ये लोग खेल, शिक्षा, कृषि जैसे हर क्षेत्र में उतने ही अच्छे हैं जितने अन्य जातियों के लोग। अतः इनके नाम पर डराना बंद करो।
सवर्णों को डरा कर ओबीसी-एससी की राजनीति अब नहीं चलेगी। उसका पटाक्षेप हो चुका है। सब ज्ञानी हैं, खाली तुम्हीं समझदार नहीं हो।
जिस घर में चोरी के लिए घुसा, उस घर के लोगों पर ही STSC एक्ट लगा दिया 🤦
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मोदी ने भारत को मजाक बना दिया है पूरी दुनिया के सामने 😭
How? By filing cases under the "Atrocious" Act against erudite professors in premier institutions for preventing "young talent" from cheating in examinations.
20 साल जेल में एक निर्दोष व्यक्ति Fake SC/ST केस में सड़ता रहा, फिर अदालत से बरी हुआ, लेकिन UP सरकार के मुताबिक यह “मानवाधिकार उल्लंघन” नहीं है।
विष्णु तिवारी को मुआवज़ा देने से इनकार करते हुए सरकार ने NHRC को यही जवाब दिया।
शायद किसी सवर्ण या ओबीसी का 20 साल की आज़ादी छीन लेना भी अब ‘मानवीय आधार’ में नहीं आता!
यही वह दृश्य है जहाँ योग्यता, @narendramodi के भीड़तंत्र के समक्ष झुक कर बिछ जाने के सामने, कलम निकाल कर अपनी अंतिम यात्रा का आरंभ कर रही है।
डायरेक्टर केदारे साहब शांत हैं, 18 माँगें हों या 180, वो स्वीकार कर लेंगे क्योंकि @PMOIndia से कारण बताओ नोटिस आ जाएगा कि आपसे एक छोटा सा प्रोटेस्ट नहीं सँभलता, जबकि हमने तिलचट्टों के प्रोटेस्ट में पूरे देश को बताया है कि करना क्या है।
भीड़ ही ‘लोकतंत्र’ का ‘लोक’ है, अतः वह जो भी कहे, वह जाँच से पहले ही कर दीजिए। मुझे थूकने की इच्छा हो रही है किसी के मुँह पर!
#WATCH | Mumbai, Maharashtra: Students at IIT Bombay hold a protest in support of Professor Suryanarayana Doolla, who has been suspended from the deanship of IIT Bombay
"हम जेल में थे, हमारे माँ बाप खत्म हो गए, दो भाई खत्म हो गए, उनके दाहसंस्कार के लिए भी नहीं निकलने दिया! जेल में हमको मारते पीटते थे! आज भी हम ठीक से चल नहीं पाते!"
-विष्णु तिवारी
बता दें कि विष्णु तिवारी को 20 साल तक जेल में फ़र्ज़ी SC/ST एक्ट लगाकर रखा गया!
और इनको 20 साल बाद, बाइज़्ज़त बरी होने के बाद भी आजतक कोई मुआवजा नहीं मिला!
किसी इंसान की जिंदगी खत्म हो गयी, लेकिन सरकार ने एक पैसा नहीं दिया! जबकि करोड़ों rupye SC/ST एक्ट में दिये जाते हैं औऱ फ़र्ज़ी केस साबित होने के बाद भी वसूले नहीं जाते!
धन्यवाद @roypranesh को विष्णु तिवारी की आवाज़ जनता तक पहुंचाने के लिए!
जब दलित भाइयों को अंबेडकर जी ने शेरनी का दूध पिला दिया और वे आरक्षण के शेर पर बैठकर IIT, IIM में पहुँच ही गए, तो फिर उनसे पढ़ाई, रटने और Practical करने को क्यों कहा जाता है?
आखिर 8 सेमेस्टर में करीब 150 परीक्षाएँ क्यों, सीधी Degree और नौकरी क्यों नहीं?
Dear @iitbombay students!
It is high time that you reclaimed your campus from the blue casteist bigot infestation and did away from the bullshit that the government has forced upon you.
Go outside your dorm rooms. Organise in large numbers and kick these bastards out of your campus, as they are hired hooligans who travel from Delhi to spread caste hate on your soil.
Your college is a sovereign place. Your professor is a father figure. Your classroom is your soil to nourish your wisdom. Your hostel is a place for discussing life, lessons and projects.
Support what is right. Support the teachers that shape you, make you, guide you and push you to your limits. If you back out today, your will be ashamed of your deeds in future.
Go out! Light a candle. I am happy that some of you are organising marches. Shun classes till this political crap settles. make up for lost classes on Sundays, if need be. But, this is an important moment of your life. Be a part of it.
Thieves and thugs shouldn't sit among you. Cheaters can not and mus not be promoted by the system. The government or their stooges cannot dictate academia.
Reclaim your campus.