अगर आपकी उम्र 60 से ज़्यादा है और
आपको म्यूज़िक में थोड़ी दिलचस्पी है
तो यह 12 मिनट का वीडियो
आपको न सिर्फ़ सबसे अच्छे म्यूज़िक से,
बल्कि सबसे अच्छे गानों से भी मिलवाएगा
वीडियो में पहले गाने की शुरुआती लाइन
सुनने के बाद, आप सोचेंगे —
यह मेरा पसंदीदा गाना है
और जैसे-जैसे वीडियो आगे बढ़ेगा
आपको हर नए गाने की शुरुआत पिछले
वाले से ज़्यादा पसंद आएगी...
फेफड़ों की सफाई और खांसी के लिए आयुर्वेदिक काढ़ा।
फेफड़ों (lungs) में जमी बलगम और पुरानी सूखी खांसी से राहत पाने के लिए एक घरेलू नुस्खा .
लाल प्याज 1 (कटा हुआ)
नींबू 1 (टुकड़ों में कटा हुआ)
दालचीनी 1 छोटा टुकड़ा
अदरक 1 छोटा टुकड़ा (कटा हुआ)
लहसुन 3 कलियाँ
पानी 2 कप
एक बर्तन में 2 कप पानी डालें।
इसमें कटा हुआ प्याज, नींबू, दालचीनी, अदरक और लहसुन डाल दें।
इस मिश्रण को लगभग 10 मिनट तक अच्छी तरह उबालें।
उबालने के बाद इसे छान लें। आपका 'पावरफुल कॉम्बो' काढ़ा तैयार है।
बलगम से राहत यह फेफड़ों में जमी जिद्दी बलगम को साफ करने में मदद करता है।
सूखी खांसी: पुरानी और सूखी खांसी को शांत करने में प्रभावी है।
श्वसन मार्ग (Respiratory Track) यह सांस लेने वाली नली को साफ करता है जिससे सांस लेना आसान हो जाता है।
इसे आप इस्तेमाल कीजिए सुबह डेली रोजमर्रा की जिन्दगी में बहुत फायदा करती है।
वीडियो को जरूर देखे👇
“100 मीटर नहीं, 100 पीढ़ियों का सवाल है अरावली।”
आज प्रकृति हारी तो कल इंसान हारेगा।
अरावली कोई आँकड़ा नहीं, यह पानी, हवा और जीवन की ढाल है।
#SaveAravali#SaveAravaliHills#अरावली_बचाओ
"विकास के नाम पर विनाश का रास्ता"
भारत की सबसे प्राचीन पर्वतमाला अरावली आज अपने अस्तित्व की सबसे बड़ी लड़ाई लड़ रही है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के एक निर्देश के बाद 100 मीटर से कम ऊँचाई वाली पहाड़ियों को “पहाड़” न मानने की व्याख्या सामने आई है, जिसने अरावली के विशाल भूभाग को कानूनी संरक्षण से बाहर करने का खतरा पैदा कर दिया है। यह केवल शब्दों का खेल नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी परिणाम राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और पूरे उत्तर-पश्चिम भारत के पर्यावरणीय भविष्य को सीधे प्रभावित करने वाले हैं।
अरावली पर्वतमाला लगभग 692 किलोमीटर तक गुजरात से लेकर दिल्ली तक फैली है और इसे लगभग तीन अरब वर्ष पुरानी पर्वत श्रृंखला माना जाता है। इसका दो-तिहाई हिस्सा राजस्थान में स्थित है, जहाँ यह जलवायु संतुलन, वर्षा चक्र और भूजल रिचार्ज की रीढ़ के रूप में कार्य करती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि अरावली न होती, तो पश्चिमी, मध्य और दक्षिण भारत का बड़ा भूभाग रेगिस्तान में बदल चुका होता। ऐसे में इस प्राकृतिक ढाल को कमजोर करना दीर्घकालिक पर्यावरणीय आत्मघात से कम नहीं है।
फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया के आँकड़े इस संकट की गंभीरता को और स्पष्ट करते हैं। देश में मैप की गई 12,081 पहाड़ियों में से केवल 1,048 यानी महज 8.7 प्रतिशत ही 100 मीटर की ऊँचाई के मानक पर खरी उतरती हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि अरावली का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा इस नई व्याख्या के बाद कानूनी सुरक्षा खो सकता है। यह स्थिति खनन, रियल एस्टेट और निजी परियोजनाओं के लिए रास्ता खोलती है, जबकि पर्यावरण और स्थानीय समुदायों के लिए यह विनाश का संकेत है।
अरावली केवल पहाड़ियों की श्रृंखला नहीं है। यह 300 से अधिक जीव-जंतुओं और पक्षियों का प्राकृतिक आवास है, लाखों पशुपालकों के लिए चारागाह है और बनास, साबरमती तथा लूणी जैसी नदियों का उद्गम स्थल भी है। इसकी चट्टानी संरचना वर्षा जल को रोककर उसे जमीन के भीतर पहुँचाती है, जिससे पूरे क्षेत्र में भूजल रिचार्ज होता है। पहले से ही जल संकट से जूझ रहे पश्चिमी राजस्थान के लिए अरावली का कमजोर होना सूखे को स्थायी बना देने जैसा होगा।
सरकार की पर्यावरण नीति की वास्तविक तस्वीर जोजरी नदी की उपेक्षा और खेजड़ी वृक्षों के साथ हो रहे व्यवहार से भी साफ होती है। खेजड़ी, जिसे राजस्थान का राज्य वृक्ष माना जाता है और जो रेगिस्तानी पारिस्थितिकी तंत्र की जीवनरेखा है, आज योजनाबद्ध कटाई का शिकार बन रहा है। सरकारी आँकड़ों और जमीनी आकलनों के अनुसार, सोलर परियोजनाओं और औद्योगिक लीज़ के नाम पर अब तक लगभग 26 लाख खेजड़ी पेड़ काटे जा चुके हैं, जबकि आने वाले समय में करीब 50 लाख और खेजड़ी पेड़ों की कटाई की तैयारी की जा रही है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि एक पूर्ण विकसित खेजड़ी पेड़ के साथ अन्य पेड़ो को तैयार होने में लगभग 100 वर्ष लगते हैं, जिससे मरुस्थल के इस अनमोल पारिस्थितिकी तंत्र पर दीर्घकालिक और गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
एक पेड़ औसतन 1,200 किलोलीटर ऑक्सीजन प्रतिवर्ष देता है। इस आधार पर, जो 26 लाख पेड़ काटे गए, वे हर साल लगभग 25 करोड़ किलोलीटर ऑक्सीजन प्रदान करते थे जो अब पूरी तरह बंद हो चुकी है। पेड़ों के कटने और बड़े पैमाने पर ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना के कारण तापमान में 3 से 4 डिग्री तक वृद्धि दर्ज की गई है। पर्यावरणविदों के अनुसार, पश्चिमी राजस्थान में बारिश कम होने का यह एक प्रमुख कारण बन गया है। तापमान बढ़ने और आवास नष्ट होने के चलते रेगिस्तान के कई छोटे जीव भी विलुप्ति के कगार पर पहुँच गए हैं। जबकि यही पारिस्थितिकी तंत्र है जो न्यूनतम पानी में पनपता है, मिट्टी को बाँधकर मरुस्थलीकरण को रोकता है, पशुओं के लिए चारा देता है और स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार है।
विडंबना यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने अतीत में अरावली की रक्षा के लिए ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। 1990 के दशक से लेकर एम.सी. मेहता बनाम यूनियन ऑफ इंडिया जैसे मामलों में कोर्ट ने राजस्थान और हरियाणा में अनियंत्रित खनन पर रोक लगाई और यह स्वीकार किया कि इससे होने वाला पर्यावरणीय नुकसान अपूरणीय है। ऐसे में आज उसी अरावली को कमजोर करने वाली व्याख्या सामने आना न केवल चिंताजनक है, बल्कि न्यायिक परंपरा के भी विपरीत प्रतीत होता है।
राजस्थान में अरावली पर्वत माला को बचाने के लिए लोग सड़कों पर हैं, लेकिन कॉरपोरेट दबाव में बिक चुकी मीडिया को यह संघर्ष दिखाई नहीं देता है। मीडिया की चुप्पी भी इस अपराध में भागीदारी है। #SaveAravalli
"नेहरू हाजिर हो.."
प्रो. मनोज झा जी आज नेहरू पर मुकदमे की अपनी मांग को दोहराते हुए।
"जिन ओहदेदारों को मलहम लगाना चाहिए वो नमक की बोरी लेकर ज़ख्मों पर छिड़कते है।"
~मा० सांसद मनोज कुमार झा
इस पूरी बहस को सुनिए और संभव हो तो सत्ता पक्ष के लोग इसपर गंभीरता से विचार कीजिए
4th ग्रेड (चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी) का एग्जाम देने पहुंची युवती का सेंटर दूर था | पास खडे़ वृद्ध व्यक्ति के पास आकर बोली अंकल सेंटर दूर है। तुरन्त अंकल रिक्शा को बुलाते है। लड़की कहती है मेरे पास पैसे नहीं है। पास खड़ा पुलिसकर्मी पैसे देने की कोशिश करता है पर👇➡️
#परीक्षा
परिवार में नये सदस्य (बिटिया) के आगमन पर प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से बधाई देने वाले सभी शुभचिंतक साथियों व डूंगरपुर राजकीय जिला चिकित्सालय के समस्त स्टाफ को धन्यवाद जोहार।
@roat_mla Congratulations 🎉🎉 and it's a good initiative that leader of our country are using same hospital and school like a true indian public.
Its really inspiring...
Congratulations once again 🎈👏👏
बांसवाड़ा-डूंगरपुर सांसद राजकुमार रोत ने पत्नी का प्रसव राजकीय जिला चिकित्सालय में करवाकर एक अच्छा संदेश दिया है। वरना आजकल सरपंच भी निजी पांच सितारा अस्पताल में प्रसव या अन्य इलाज करवाते हैं।
राजकुमार रोत की पत्नी ने सरकारी अस्पताल में बेटी को जन्म दिया है। जिस दिन सांसदों, विधायकों, मंत्रियों और अफसरों के बच्चे सरकारी अस्पताल में पैदा होने लगेंगे और सरकारी स्कूलों में पढ़ने लगेंगे उस दिन सरकारी स्कूलों और सरकारी अस्पतालों की स्थिति भी सुधर जाएगी।
राजकुमार रोत डबल बधाई के पात्र हैं।
@roat_mla
सुनील ग्रोवर सिर्फ लोगों की मिमिक्री नहीं करते, वो उनके बोल चाल को भी हूबहू कॉपी कर लेते हैं!
आज वो गीतकार गुलज़ार बने हैं, जिसे देखकर गुलज़ार साहब खुद देखकर चौंक जायेंगे!
अद्भुत कलाकार हैं @WhoSunilGrover भाई आप, सलाम है भाई आपको ❤️❤️