@UPPCLLKO@myogiadityanath@myogioffice@dm_ghaziabad sir loni bhopura पर थोड़ा ध्यान दें रात के 04: 00 बजे से 09:30 तक बिजली नहीं, रोड पर जल जमाव चरम पर है, गड्डे किसी खतरनाक घटना का निमंत्रण दे रहा है, @nkgurjar4bjp ji please देखे delhi metro rail society (DMWO) road से पानी
Class-7 Batch Junnon 2027
Teacher name- Dev ( Science)
क्लास में पढ़ाने से ज्यादा गाना गाते और फालतू की बात करते है कितने छपरी टीचर भर्ती है अधिकतर गाना गाते रहते है लेकिन ये कुछ ज्यादा हीl
कृपया संगयान ले
@physics__wallah@PhysicswallahAP
My Smart Prepaid Meter No. 7253945904 (Lucknow) is showing a negative balance of around ₹3200, yet the electricity supply is not being disconnected. In a prepaid system, power should be cut off once the balance is exhausted/negative. @UPPCLLKO@MVVNLHQ@MVVNLmd@uppcl
#यूपी रेरा या “रजिस्ट्रेशन मशीन”?
नोएडा से लखनऊ तक लाखों होम बायर्स फंसे, फिर भी बिल्डरों को खुली छूट क्यों?
उत्तर प्रदेश में घर खरीदना अब सिर्फ एक निवेश नहीं, बल्कि कई परिवारों के लिए कानूनी और आर्थिक संघर्ष बन चुका है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ और गोरखपुर तक हजारों होम बायर्स वर्षों से अपने फ्लैट, रिफंड और कब्जे के लिए लड़ रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन बिल्डरों के पुराने प्रोजेक्ट्स आज तक पूरे नहीं हुए, जिन पर हजारों शिकायतें लंबित हैं, उन्हीं बिल्डरों या उनके समूहों को नए आवासीय और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स की मंजूरी आखिर किस आधार पर दी जा रही है?
क्या UP-RERA खरीदारों की सुरक्षा संस्था है या केवल “प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी” बनकर रह गई है? अभी रेरा ने
नये आवासीय व व्यावसायिक प्रोजेक्ट सात जिलों में फिर संस्तुति दी है ।
आदेश बहुत, जमीन पर असर कितना?
UP-RERA दावा करता है कि उसने हजारों मामलों में राहत दिलाई और करोड़ों रुपये वापस करवाए। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और कहानी कहती है।
हजारों खरीदारों का आरोप है कि:
RERA से आदेश मिलने के बाद भी बिल्डर भुगतान नहीं करते।
बिल्डर नए प्रोजेक्ट लॉन्च कर रहे हैं जबकि पुराने अधूरे पड़े हैं
यानी सवाल यह है कि यदि आदेशों का पालन ही नहीं हो रहा, तो फिर RERA की “कानूनी ताकत” आखिर कितनी प्रभावी है?
नोएडा-ग्रेटर नोएडा: अधूरे सपनों की राजधानी
पश्चिमी यूपी देश के सबसे बड़े रियल एस्टेट संकट क्षेत्रों में बदल चुका है।
Amrapali, Jaypee, Unitech, Supertech, 3C जैसे मामलों ने लाखों परिवारों को प्रभावित किया।
हजारों फ्लैट वर्षों से अधूरे
खरीदार EMI और किराया दोनों भरने को मजबूर
कई परियोजनाओं में निर्माण बंद
इसके बावजूद बाजार में नए टावरों और नई स्कीमों की लॉन्चिंग जारी है।
सवाल यह है कि:
क्या RERA पहले पुराने प्रोजेक्ट्स की “फोरेंसिक ऑडिट” कर रहा है?
क्या खरीदारों का पैसा दूसरे प्रोजेक्ट्स में डायवर्ट हुआ?
क्या डिफॉल्टर बिल्डरों को नई मंजूरी देने से पहले उनकी वित्तीय और कानूनी स्थिति जांची जाती है?
यदि नहीं, तो फिर यह नियमन नहीं, केवल औपचारिकता दिखाई देती है।
सबसे बड़ा आरोप: “एक हाथ से नोटिस, दूसरे हाथ से मंजूरी”
रियल एस्टेट विशेषज्ञों और खरीदार संगठनों का आरोप है कि:
एक ओर RERA बिल्डरों को नोटिस भेजता है
दूसरी ओर उन्हीं समूहों की नई परियोजनाएं रजिस्टर होती रहती हैं
यानी दंड और अनुमति साथ-साथ चल रहे हैं।
यदि कोई बिल्डर हजारों खरीदारों को वर्षों तक फ्लैट नहीं दे पाया, तो क्या उसे नई परियोजना बेचने का नैतिक और कानूनी अधिकार होना चाहिए?
क्या RERA केवल कागजी निगरानी कर रहा है?
कई खरीदारों का आरोप है कि:
साइट निरीक्षण बहुत सीमित हैं
प्रोजेक्ट प्रगति रिपोर्ट्स बिल्डरों के भरोसे स्वीकार की जाती हैं
फंड डायवर्जन की गहराई से जांच नहीं होती
खरीदारों की शिकायतों पर कार्रवाई धीमी रहती है
यानी सिस्टम का बड़ा हिस्सा “सेल्फ-डिक्लेरेशन मॉडल” पर चल रहा है।
यही कारण है कि:
कई परियोजनाओं में वास्तविक निर्माण प्रगति और RERA पोर्टल डेटा में भारी अंतर बताया जाता है
खरीदारों को समय पर वास्तविक स्थिति नहीं मिलती
और जब संकट गहराता है, तब तक हजारों करोड़ फंस चुके होते हैं
बड़ा सवाल: क्या RERA बिल्डरों पर निर्भर हो गया है?
विशेषज्ञों का कहना है कि रियल एस्टेट सेक्टर में सरकारें निवेश और निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा देना चाहती हैं।
ले
यदि नए प्रोजेक्ट्स रुकते हैं, तो राजस्व प्रभावित होता है
स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन और विकास शुल्क घटता है
बिल्डर लॉबी का आर्थिक प्रभाव बड़ा है
ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या खरीदारों का हित वास्तव में प्राथमिकता में है?
होम बायर्स पूछ रहे हैं:
1. जिन बिल्डरों पर हजारों शिकायतें हैं, उन्हें ब्लैकलिस्ट क्यों नहीं किया जाता?
2. RERA आदेशों का पालन न करने पर गिरफ्तारी या संपत्ति कुर्की कितनी हुई?
3. कितने बिल्डरों की नई मंजूरी पुराने डिफॉल्ट के बावजूद दी गई?
4. कितने प्रोजेक्ट्स का स्वतंत्र वित्तीय ऑडिट हुआ?
5. क्या खरीदारों के पैसे की वास्तविक ट्रैकिंग होती है?
असली संकट भरोसे का
RERA बनने के बाद उम्मीद थी कि रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता आएगी।
लेकिन आज भी हजारों परिवार अदालतों, अथॉरिटी और बिल्डरों के बीच फंसे हैं।
सबसे गंभीर बात यह है कि:
जिन लोगों ने “RERA Approved Project” देखकर निवेश किया, वही आज सबसे ज्यादा ठगा महसूस कर रहे हैं।
@PMOIndia@AmitShah@UPCMOffice@cmohry@brajeshpathakup@kpmaurya1@uprera@ChiefSecyUP@sanjaychapps1@IasAlok@CeoNoida@CeoYeida@InfoDeptUP@UPSIDA@mdhsiidc@OfficialGMDA@DC_Gurugram@_InvestUP@RSSorg@BJP4India
पिछले साल अक्टूबर के महीने में @Flipkart से iPhone 16 खरीदा था और उसके साथ ये चार्जर भी खरीदा था अब सिर्फ 5 महीने में ही चार्जर ने काम करना बंद कर दिया।
फोन और चार्जर की एक साल की वारंटी होती है इसलिए हम @Apple के सर्विस सेंटर पर गए तो उन्होंने कहा कि ये चार्जर डुप्लिकेट है इसलिए हम कुछ नहीं कर सकते।
फिर @flipkartsupport से संपर्क किया जो कि बहुत मुश्किल से होता है क्योंकि अब सीधे एजेंट से फोन पर बात नहीं होती आपको पहले उनके AI चैटबॉट से चैट करनी पड़ती है और चैट में बकवास करने के बाद बहुत देर बाद वो आपकी बात अपने एजेंट से करवाते हैं तो बड़ी मुश्किल से बात हुई और उन्होंने कहा कि अगर एप्पल वाले मना कर रहे हैं तो आप उनसे डिनाई लैटर ले लीजिए ये लिखवाकर कि चार्जर डुप्लीकेट है उसके बाद हम आपकी शिकायत दर्ज कर लेंगे।
अब इस बात के लिए एप्पल वाले तैयार नहीं हुए और कहने लगे कि हम फेक प्रोडक्ट पर कुछ लिखकर नहीं दे सकते फिर थोड़ी बहस हुई और उन्होंने सीनियर से बात की जिसमें उन्होंने नया तरीका बताया होगा तो हमसे बोले कि ठीक है हम डिनाई लैटर दे देंगे लेकिन पहले आप बिल दीजिए तो हमने बिल डाउनलोड कर दे दिया फिर वो अपने सीनियर के पास लेकर गए और वापस आकर बोले कि इसमें सीरियल नंबर नहीं है पहले आप बिल पर सीरियल नंबर लिखवाकर लाइए तब हम डिनाइ लैटर देंगे।
अब फिर से फिल्पकार्ट से कॉन्टैक्ट किया ठीक वैसे ही पहले चैट की उनके साथ फिर उन्होंने बात करवाई तो उन्होंने कहा ठीक है आप चार्जर के फोटो हमें भेजिए हम 23 मार्च तक बिल की नई कॉपी दे देंगे।
मतलब 23 मार्च को बिल की नई कॉपी मिलेगी उसके बाद फिल्पकार्ट वाले कंप्लेंट लेंगे उसके बाद पता नहीं कब तक चार्जर मिल पाएगा...❓
पता नहीं कौन झूठ बोल रहा है वैसे चार्जर तो कहीं से भी डुप्लिकेट नहीं लग रहा लेकिन कुछ कह नहीं सकते क्योंकि आजकल नकली सामान बनाने वाले भी किसी से कम नहीं हैं
फिलहाल तो एप्पल और फिल्पकार्ट दोनों खुद को सही बता रहे हैं और इसमें कस्टमर यानि कि हम फुटबॉल बने हुए हैं...
#apple
#appleiphone
#flipkart
#JagoGrahakJago
@AppleSupport
बताइए, 10 लाख का expired सरसो तेल पकड़ा गया और कितने लाख का बाजार में होगा।
साला, ई देश में कुछू असली और ताजा बचा है या सब एक्सपायर्ड और नकली ही बेचा जा रहा है!
गोरखपुर 📍
कोई बात नहीं मोदी सरकार अगर 1 साल भी कर देगी तब भी अंधभक्तों को कोई फर्क नहीं पड़ता।
भारत में दिल्ली मुंबई जैसे शहरों में 10 साल में के बाद डीजल गाड़ी कबाड़ कर दी जाती है लेकिन जापान चीन
और यूरोप में वही गाड़ी 30 से 40 साल क्यों चलती है??
कोयल एन्क्लेव योजना के 11 में लाइट चली जाने पर डी जी सेट नहीं चलता क्यूं कि रात में इलेक्ट्रीशियन नहीं है
नौ मंजिला इमारत में लिफ्ट का संचालन भी नहीं होताl
चारो तरफ सोसाइटी में अंधेरा और मुख्य सड़क पर भी अंधेराl
@gdagzb@CommissionerMe3@UPGovt@myyogiadityanth@NavbharatTimes
@gdagzb@myogioffice@myogiadityanath@DmGhaziabad koyal enclave K11 multistory society maintained by GDA itself in dark mode since last 2hr due to lack of electrician.called GDA supervisior but still no one came to start generator. maintinance going on paper only.
Open Letter to the Prime Minister’s Office and All State Governments of India.
This is not a big demand, just a small and honest request for the people of India.
To,
The Prime Minister’s Office,
All Chief Ministers,
And All Responsible Authorities of India.
I am writing this open letter with deep pain and anger. Again and again, our country faces terrible incidents where innocent people lose their lives. Bridges collapse, roads are full of dangerous potholes, trains meet accidents, fires break out, and public places become unsafe. Every time, families are destroyed in seconds.
These are not just accidents. Many times, these tragedies happen because of government failure, poor maintenance, corruption, and negligence. When safety is ignored, people pay the price with their lives.
What hurts even more is what happens after. Authorities give speeches, promise inquiries, and then hand over a small compensation of 2 lakh or 5 lakh. This is not justice. This is an insult to the families who have lost their loved ones forever.
How can a human life be valued so cheaply?
The government has huge funds. Thousands of crores are spent on advertisements, and marketing. But when a citizen dies because of unsafe roads, weak bridges, or railway failures, the family is given only a few lakhs. This feels like humiliation, not support.
I request you strongly to understand that money can never replace a life. But proper compensation is necessary to show accountability and seriousness. If a death happens due to government responsibility, compensation should be at least 1 to 2 crores. Only then will the system feel the weight of its failure.
Along with this, we need real action. Officials and contractors responsible must be punished. Safety audits must be honest. Public money must be used for protection, not publicity.
Indian citizens are not numbers. They are not files to be closed with small cheques. The first duty of any government is to protect its people. When it fails, it must take full responsibility.
This letter is written with respect, but also with firmness. The people of India deserve safety, dignity, and justice.
Respectfully,
Nalini Unagar
अम्बानी शर्म करो, लूटना बन्द करो
राजधानी जयपुर में Jio 5G के नाम पर सिर्फ़ दिखावा हो रहा है।
जमीनी हकीकत ये है कि 4G भी ढंग से नहीं चलता।
कॉल ड्रॉप, स्लो इंटरनेट और बार-बार नेटवर्क गायब यही असली अनुभव है।
ग्राहक पैसे 5G के दे रहे हैं, लेकिन स्पीड 2G जैसी भी नहीं मिल रही है।
और सबसे दुख की बात ये है कि कुछ लिख दे तो समाधान देने की बजाय “सिफारिशी कॉल” शुरू हो जाते हैं।
जयपुर जैसे बड़े शहर में अगर ये हाल है तो छोटे शहरों का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।
Jio नेटवर्क कबाड़ा हो चुका है।
@reliancejio@JioCare
#JioNetwork #Jaipur #5GReality
विरोध करने का यह तरीका बड़ा ही यूनिक है..!!🤔
रोड से कूड़ा और कीचड़ की सफाई न कराए जाने पर युवक ने JE साहब को ही कीचड़ भरे रास्ते से सफर करा डाला। 🤣🤣
ये काम हर नेता और सरकारी बाबू के साथ हो तो शायद जमीन पर कुछ काम होने लग जाए।