गंगा के पवित्र जल के बीच मांस खाकर रोज़ा तोड़ना,फिर उसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करना..ये सब कुछ सुनियोजित लगता है।इफ्तार से किसी को कोई परेशानी नहीं लेकिन ये जानबूझकर हिंदुओं को चुनौती देने जैसा है।इस्लाम में खजूर और पानी के साथ रोज़ा तोड़ने की परंपरा है फिर यहाँ मांस क्यों?