भिख���री - अल्लाह के नाम पर दे दे
आदमी - माफ़, कीजिये मैं हिन्दू हूं
भिखारी - तो क्षमा मांगो, माफ़ी काहे मांग रहे हो, वैसे कौन से वाले हिन्दू हैँ आप??
आदमी -क्या मतलब? हिन्दुओं में भी जाति होती है?
भिखारी - बिलकुल.. आप जनरल वाले हो, ओबीसी हो या नीचे वाले हिन्दू??
आदमी - मान लीजिये, मैं नीचे वाला हिन्दू हु Sc वाला तो?
भिखारी - तो खडे क्यों हो मेरे सामने, नीचे बैठो
आदमी - जी? ( हैरानी से )
भिखारी - जी, जी बाद में करना, पहले नीचे बैठो, क्योंकि मैं जनरल वाला हिन्दू हूं
आदमी - लेकिन अभी तो आप अल्लाह के नाम मांग रहे थे??
भिखारी -वो तो हमने फिल्मों से सीखा है
मांगने के लिए सेक्युलर बन जाते हैँ, देश के न���ताओं की तरह.
ये छोटी सी बातचीत एक गहरा व्यंग्य है देश की जाति वाली राजनीती और नेताओं के चरित्र पर.
कैसे समाज जात धर्म में फंसकर सिर्फ गलत लोगों को चुनकर लोकतंत्र के मंदिर में भेजते हैँ
ऊंच नींच से हम बाहर नहीं निकलना चाहते और ना ही नेताओं के हाथ की कठपुतली बनने स�� पीछे नहीं रहना चाहते.
वीडियो देखकर और मज़ा आएगा.
🚨 IRAN DECLARES: "CONCESSION ONLY FOR THE PEOPLE OF INDIA… NOT EVEN A MENTION OF THE GOVERNMENT!" 🔥
A DIRECT QUESTION TO THE IRANIAN REPRESENTATIVE: "Will you grant any special concessions for India?"
THE HEART-TOUCHING REPLY CAME:
"We saw that the majority of 'Indians' stood by us.
They condemned America's war and raised their voices against the attacks on innocent children.
That is why we informed Iran—the 'Indians' who supported us are in dire need of gas.
The government then immediately granted permission."
"PURELY AND SOLELY BECAUSE OF THE SYMPATHY AND SUPPORT OF THE INDIAN PEOPLE, IRAN ALLOWED OUR SHIPS TO PASS THROUGH THE STRAIT OF HORMUZ!"
No mention of the BJP, no mention of Indian government policy, no diplomacy… "NO M0DI, NO JAISHANKAR…"
The Iranian representative gave all the credit exclusively to the "PEOPLE OF INDIA" and their "EMOTIONS."
पीने का साफ पानी चाहिए❓
वॉटर प्यूरीफायर ले लो।
पीने के अलावा पानी चाहिए❓
टैंकर मंगवा लो।
साफ हवा चाहिए❓
एयर प्यूरीफायर ले लो।
बिजली की दिक्कत❓
इनवर्टर ले लो।
अच्छी शिक्षा❓
प्राइवेट स्कूल, प्राइवेट ट्यूशन है तो।
अच्छा अस्पताल❓
प्राइवेट अस्पताल चले जाओ।
इलाके में सड़क, बिजली की परेशानी❓
सोसाइटी एसोशियन है तो, निपटा लो निगम को तंग क्यूं करते हो।
टैक्स देते हो❓
अरे तो मुफ्त चावल, बांटने को दस हज़ार कहां से आता है फिर बचा क्या ❓
कोई दिक्कत? कोई शिकायत? हमारी ट्रोल आर्मी का सुझाव ले लो। 'अबे पाकिस्तान चले जा..'
- हर्ष छाया, एक्टर
भारतीय मुसलमान : आपको मालूम है पाकिस्तान की जितनी टोटल पापुलेशन है उससे ज्यादा मुसलमान यहाँ रहते हैं
मुशर्रफ: हाँ मुझे मालूम है जी
मुस्लिम : जब आपको मालूम है तो इ��डियन मुस्लिम अपनी प्रॉब्लम को सॉल्व करने की करवाने की ताकत रखता है आपकी नसीहत की जरूरत नहीं है
पूरा देखिये! 👇👇
पहलगाम घटना के चश्मदीद कुलदीप स्थापक "नज़ाकत अली" के लिए हैं लिखते ❤️❤️
जम्मू-कश्मीर, पहलगाम।
नजाकत भाई के नाम एक दिल से लिखा गया खत...
मेरे भाई, आपने जिस जज़्बे और बहादुरी से हमें वहाँ से निकाला, वो मंजर अभी भी मेरे कानो में गूंज ��हा है, चारों तरफ अफरा- तफरी, गोलियों की आवाजें, चीख- पुकार ओर मौत का साया था, वो कोई आम इंसान नहीं कर सकता। अपनी जान को दांव पर लगाकर जो इंसानियत आपने दिखाई, वो शब्दों से परे है। मैं ज़िंदगी भर आपका शुक्रगुज़ार रहूंगा—ये एहसान कभी नहीं भूल सकता।
हम तो शायद इस मुश्किल हालात से निकल आएं, लेकिन दिल में बस एक ही चिंता है—आप और आपका परिवार। आज हर न्यूज़ चैनल पर आपका नाम है, लोग तारीफ़ कर रहे हैं, लेकिन असली सवाल ये है—अब आपकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन उठाएगा?
लोग धर्म और जाति पर बहस करेंगे, लेकिन जिसने इंसानियत की सबसे खूबसूरत मिसाल पेश की, उस नजाकत भाई को वहां कौन संभालेगा? यही सोचकर दिल बेचैन हो जाता है।
कुछ के लिए ये सिर्फ एक खबर होगी, ��क वीडियो, एक क्लिक… लेकिन हमारे लिए ये ज़िंदगी और मौत का फासला था—और उस फासले को आपने अपने कंधे पर उठाकर पार किया।
मेरे बच्चे को, आपने खुद अपने गोद में उठाया, कंधे पर बैठाकर उन खतरनाक पहाड़ियों पर 14 किमी तक दौड़ते रहे। जब मुझे लगा कि अब शायद मैं नहीं बचूंगा मेरी हिम्मत जवाब दे चुकी थी, तब मैंने उस वक्त एक बात कही थी —"भाई, मेरे बच्चे को घर तक सुरक्षित पहुंचा देना..."
और आपने सिर्फ मेरा बच्चे ही नहीं, मेरा हौसला बढ़ाते रहे मुझे और अपने उस बच्चे के साथ पिता की आखिरी उम्मीद को भी बचा लिया और सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया, अगर आप नहीं होते तो मैं ये शब्द लिखने के लिए भी जिंदा नहीं होता।
जो दुर्घटना हुआ उसे तो मैं जल्द से जल्द भूलना चाहता हु लेकिन, वो 45 मिनट का मंजर, वो पहाड़ी को पार करना था और जहां मैं हार मान गया था उसके बाद भी मेरा हौसला बढ़ाते बढ़ाते अपने मेरा साथ नहीं छोड़ा और मेरे बच्चे और परिवार के लिए अपने जो किया उसको जीवन भर नहीं भूल सकता हूँ।
नजाकत भाई, आपने उस दिन सिर्फ जान नहीं बचाई, इंसानियत को ज़िंदा रखा।
आपको मैं ताउम्र भर नहीं भूल सकता।
There are times when everything else fades, religion, politics, ideologies & and only one thing matters: NATION 🇮🇳
Now is the time to rise together & stand united.
अमरेंद्र कुमार सिंह पहलगाम घटना के समय वहीं मौजूद थे। वो लिखते हैं
कल पहलगाम में मारे गए सभी लोगों को विनम्र श्रंद्धाजलि और ईश्वर उनके परिजन को दुख सहने की शक्ति दें💐🙏
"जाको राखे साइयां, मार सके न कोई"
सुन कर खुशी मिलता है, पर जो बेकसूर लोग मारे गए जिनमें कम से कम 3 घोड़े वाले भी थे उनके लिए बेहद दुःख और गुस्सा भी है। घटना स्थल से सिर्फ 300 से 400 मीटर पर घोड़े पर मोना और हम थे, अचानक गोलियों की तरतराहट और भागते लोग देख तुरंत समझ आ गया और जान प्राण ले कर हमारा भी घोड़ा वाला हमको ले कर भागा। फिर वापस होटल जो पहलगाम में ही था उसमें आ गया। टूर कल से ही शुरू हुआ था और पहले दिन ही ये सब हो गया, फिर आगे का सारा प्रोग्राम छोड़ आज का टिकट ले कर वापस हो रहे हैं, फ्लाइट शाम की है अभी ही एयरपोर्ट आ गया।
आपसे अनुरोध है किसी बहकावे में न आवे , न्यूज में सुना रेकी किया गया था, जब पता था तो होने क्यों दिए, वहां किसी भी सिक्योरिटी फोर्स से एक भी फोर्स की तैनाती नहीं थी। खैर अब तो राजनीति चलती रहेगी कोई बोल रहा है जात नहीं धर्म पूछा आदि आदि। ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है। जो चले गए उनके लिए बेहद दुःख है ।
ध्यान रखिए हजारों बचाए गए ��ैं सिर्फ लोकल सपोर्ट के कारण संभव हो पाया है। घोड़ा वाला, गाड़ी वाला और होटल वाला सभी का सपोर्ट शानदार था।
हालांकि गिद्ध लोग मौके के तलाश में रहते हैं, जहां होटल वाला पेमेंट नहीं लिया गाड़ी वाला पैसे नहीं लिया ड्राइवर रो कर जबरदस्ती करने पर टिप्स पकड़ा वहीं श्री नगर से दिल्ली दो टिकट का 38000 पे करना पड़ा।
आतंक फैलाने वाले और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई चलती रहनी चाहिए और इसमें पूरे देश को एकजुट रहन�� चाहिए।
सावधान रहिएगा
!!राजनीति चालू आहे!!
जो चले गए ईश्वर उनको चरणों में जगह दें, विनम्र श्रंद्धाजलि 💐🙏
घटना से पहले की कुछ तस्वीर
मुसलमान जिन मस्जिदों को नफऱतबाज और चरण चुम्बक मीडिया के ज़हर से बचाने की कोशिश कर रहा है और मस्जिदों के लिए लुट भी रहा है पिट भी रहा है उन्ही मीडिया वालों को जामा मस्जिद का इमाम @BukhariShaban मस्जिद में इफ़्तार की पार्टी दे रहा है, @RajatSharmaLive अगर इस इज़्ज़त को अब भी ना संभाल कर रखे सकें तो लानत होगी!
मुसलमानों को छोड़कर भारत की हर क़ौम (ठाकुर ब्राह्मण शुक्ला शर्मा वर्मा यादव जैन यहाँ तक कि दलित) सब ने फ़ासिस्ट भाजपा को एक्सेप्ट किया,
सिर्फ़ मुसलमान ने फ़ासिस्ट भाजपा को एक्सेप्ट नही किया, जानते हैं क्यों?
जय श्रीराम के नारे आस्था से नहीं, बल्कि विकृत मानसिकता से उपज रहे हैं. हमारा जुलूस बिना डीजे के आगे नहीं बढ़ता, और जो नारे मंदिरों के भीतर या उनके सामने गूंजने चाहिए, उन्हें मस्जिदों के सामने लगाया जा रहा है. एक तरफ हमारे मंदिरों में आरती के समय घंटा बजाने वाले लोग नहीं मिलते, और दूसरी तरफ मस्जिदों के सामने इस तरह की ओछी और छिछोरी हरकतें करने लगे हैं. यह स्वतंत्रता नहीं, बल्कि बेलगाम स्वच्छंदता है!
@Saurabh_MLAgk ...have seen u working tirelessly for your constituency...you are a political person knows what n why things went like this...I have seen even staunch opposition people praising your work...you will b rewarded soon...
कल से मुश्किल से आँसू रोक रखे थे, आज @Saurabh_MLAgk भाई को इस तरह देखकर आँसू निकल ही गए।
ये वो व्यक्ति है जो कोरोना काल में अपनी विधानसभा के लोगों की सेवा करते हुए ख़ुद कोविड का शिकार हुए और जान जोखिम में डाल दी थी। कितने दिन अस्पताल में जूझते रहे।
इतनी मे���नत हमेशा जनता के लिए काम करने वाला अपने साथियों के आँखों में आँसू देखकर ख़ुद को रोक नहीं पाए।
कल से मुश्किल से आँसू रोक रखे थे, आज @Saurabh_MLAgk भाई को इस तरह देखकर आँसू निकल ही गए।
ये वो व्यक्ति है जो कोरोना काल में अपनी विधानसभा के लोगों की सेवा करते हुए ख़ुद कोविड का शिकार हुए और जान जोखिम में डाल दी थी। कितने दिन अस्पताल में जूझते रहे।
इतनी मेहनत हमेशा जनता के लिए काम करने वाला अपने साथियों के आँखों में आँसू देखकर ख़ुद को रोक नहीं पाए।
@imYadav31@HospitalsApollo This is new trend in hospitals..they take fees for consultation for senior doctor and his juniors collectively discuss case and senior comes for 5 mins n discuss n leave.They don't even bother condition of patient involved.
अचानक हार्ट अटैक आने पर 7 रुपये की ये सबसें सस्ती किट अपने जेब, पर्स, घर, दुकान, और कार्यालय की अपनी दराज में हमेशां अपने पास रखें, क्योंकि ये देखने में आ रहा है कि आजकल अचानक और पहली बार आ रहे हार्ट अटेक में लोगों को अस्पताल पहुंचने तक का समय भी नहीं मिलता,और जान चली जाती है !👇
ये मस्जिद के सामने "उनकी मां का भोंसड़ा" बजाना कौन सी धार्मिक स्तुति है? यह कौन सा मंत्र है? यह पद्धति किस ग्रन्थ में है? इसका पूजा पाठ, त्योहार या धर्म से क्या लेना देना है? यह करके हिन्दू धर्म बचाओगे राक्षसों?
सत्ता के पालतू डिजिटल दंगाई पूछते हैं कि हर हिन्दू त्योहार पर उपद्रव क्यों होता है? यह वीडियो उसी का जवाब है। आग खाओगे तो अंगार ही हगोगे। अगर अपनी आस्था, अपनी देवी, अपने देवता का इस्तेमाल दूसरों को गाली देने के लिए करोगे, तो तुम मानवता पर कलंक हो। तुम समाज के लिए जहर बन चुके हो।
यूपी के बाराबंकी में दुर्गा मूर्ति विसर्जन के दौरान यह गाली बजाई जा रही है। यह भीड़ माता की मूर्ति और दशहरा जैसे पावन पर्व की आड़ में यह दुष्कृत्य कर रही है।
आरोप है कि यात्रा को मस्जिद के बाहर रोककर आपत्तिजनक गाने चलाए गए। इस दौरान मस्जिद पर गुलाल फेंका गया। मामले में 3 गिरफ्तार हुए, 40 से ज्यादा पर FIR हुई है।
हिंदू युवकों को दंगाई भीड़ में बदला जा रहा है। वे हर त्योहार पर यही करते हैं। मस्जिद पर चढ़ जाना, मुसलमानों के घर में घुस जाना, कहीं भी हरा झंडा उतार कर भगवा फहर���ना, उन्हें चिढ़ाना... यह सब धर्म की आड़ में हिंदुओं से करवाया जा रहा है। अगर कोई रोकता है तो दंगा होता है। इनका समर्थन करने वाले राक्षसों से पूछो कि यह करके वे कौन सी धार्मिक महानता हासिल करना चाहते हैं?
अगर आपका नवरात्रि, व्रत, पूजा और धर्म से थोड़ा भी वास्ता होगा तो आपको शर्म आएगी कि आपकी आस्था को दंगे का औजार बना दिया गया है।
खतरा मुसलमानों से नहीं, उन सियासी खूंखार जानवरों से है जो आपके धर्म को कलंकित कर आपके बच्चों को दंगाई बना रहे हैं।
(उनके शब्द यहां लिखने के लिए माफी चाहता हूं।)