ना होली ना दिवाली, ना रोजा और रमजान नहीं,
ना शादी ना कोई बर्थडे, बरसी ना श्मशान नहीं,
कमी निकालना है आसान, बख्सा कृष्णा और राम को नहीं
ना वर्दी पहनना आसान है, खाकी का काम आसान नहीं।
#votefor49400haryanapolice
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हाथों में रंग गुलाल भरे,
नीले पीले, कुछ लाल हरे।
सब रंग “भागवत” हाथ धरे,
जब दुनियाँ ये मुस्कुराती है।
तब पुलिस ड्यूटी निभाती है।।
जो बेईमान है ये वर्दी उन्हे मजबूर बनाती है
जो ईमानदार है ये वर्दी उन्हे मजबूत बनाती है
खाकीवाले कहलाते हैं।
खाकीवाले कहलाते हैं।
“जिनके काधो पर भार रखा,
जन जन की अभिलाषा का।
जो धरती पर अपवाद बने
मानव की परिभाषाओ का ।
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गत दिवस चंडीगढ़ में आल इंडिया पुलिस मेन्स फेडरेशन ने अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन दिया। फेडरेशन ने बताया कि 1970 से सिपाही से लेकर निरीक्षत तक को 1861 में अंग्रेजो के बनाए एक नियम के कारण वेतनमान व अन्य लाभ नहीं मिल रहे हैं और गठबंधन सरकार इसपर चुप्पी साधे हुए है।
मैं पूछती हूं, आजाद भारत में अंग्रेजों के बनाए नियमों को क्यों चलाया जा रहा है और इसका खामियाजा पुलिस कर्मचारी कब तक भुगतते रहेंगे?