हाईवे पर दो ढाबा है। एक अकरम का, दूसरी राहुल का। दोनों ढाबे शाकाहारी हैं। अकरम के ढाबे पर काम करने वाले 90% कर्मचारी हिन्दू हैं। दोनों मालिकों का आपस में कोई विवाद भी नहीं है। अब दोनों ढाबों के मालिकों को बोर्ड पर अपना नाम लिखना होगा।
अब कांवड़िए हाईवे से गुजरेंगे। कुछ खाने के लिए जब दोनों ढाबों के बीच खड़े होंगे तो स्वाभाविक है कि वह नाम देखने के बाद राहुल के ढाबे पर जाएंगे। राहुल चाहे खाना महंगा बेचें, बहुत सफाई न रखें, व्यवहार खराब रखें, उनका धंधा चल जाएगा। दूसरी तरफ अकरम कितनी भी साफ-सफाई रखें, सस्ता दें लेकिन उनके यहां लोग नहीं जाएगा।
यह एक तरह से सामाजिक भेद पैदा करता है। स्थानीय स्तर पर तो राहुल और अकरम साथी ही है, आसपास के लोग भी जब खाने आते हैं तो बिना धर्म देखे एक दूसरे की दुकान पर जाते हैं लेकिन बाहर से आने वाले लोग अब नाम देखने के बाद फैसला लेंगे।
"मुस्लिमों से कुछ मत खरीदो" का जो मैसेज वाट्सऐप पर लंबे वक्त से वायरल हो रहा था अब उसका सरकारीकरण किया गया है। आप लोगो को क्या लगता है मुझे नहीं पता लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि भविष्य में इससे बड़ा नुकसान होने वाला है। क्योंकि बिना एक दूसरे की मदद से दोनों ही आगे नहीं बढ़ सकते।
टीचर्स स्कूल जा रहे, अपना काम पूरी मुस्तैदी से कर रहे। मांग मान लीजिए अटेंडेंस भी लगने लगेगी। इस पर विपक्षी दलों द्वारा राजनीति करने की तोहमत लगाकर अध्यापकों को बुरा भला कहकर प्रताड़ित न करिए।
#BoycottOnlineAttendance#पहलेसमाधान_फिरऑनलाइनहाज़िरी
@BhanuNand इन पाखंडियों के पास सिर्फ पाखंड ही मिलेगा, सनातन को समझने के लियें स्वव अध्यन करना होता है| पाखंडी के पास जाने से कोई सनातन की प्राप्ति नहीं हिने वाली|
@Anshuman_BJP1 मास्टर तो पुरी चयन प्रक्रिया से होकर चयनित होते हैं, प्राइवेट वाले फैल होकर वहां पहुँचते हैं| वैसे नेता बनने की परीक्षा भी करवाओ कभी | #चुनमुने
जब मैं सरकारी शिक्षक को देखता हूं,
मैं ऊर्जा का दुरुपयोग देखता हूं,
प्राइवेट टीचर और सरकारी टीचर में फ़र्क है जितना
बगीचे के पेड़ और जंगल के पेड़ में होता है।
सरकारी टीचर जंगल में बांट रहे वो स्वतंत्र रूप से फल, छांव
प्राइवेट टीचर बना सकते हैं आईएएस, इंजीनियर, डाक्टर और प्रधानमंत्री क्योंकि उन्हें नहीं बनानी सूचना कागज, डाक,
नहीं करनी कोई मीटिंग।
@UDITKUMARGAUD2@itspravin99 blo
dbt
prerna
Udise
Manav Sampada
Pfms
In kamo me bhi samay lagta hai
Or apni marzi se padhane ki bhi azaadi nahi
Pahle bhasa fir ganit
Science subject hi khatam kr diya department ne.
Koi ayega to bolega Diksha app se padhao ab batao kon padh lega kisi app se
चौतरफा विरोध होने के बावजूद अफसर ऑनलाइन हाजिरी का दबाव बना रहे। शिक्षको का मानसिक टॉर्चर करना बंद करिए । अगर कुछ अच्छा करना है तो शिक्षको से सिर्फ शैक्षणिक कार्य लीजिए। उनको कैशलेश पुरानी पेंशन EL CL जैसी सुविधा दें ।
#BoycottOnlineAttendance#UPbasiceducation#संघे_शक्ति_सर्वदा