Official Account | सीनियर मैनेजर-बैंक ऑफ बड़ौदा |कर्म भूमि:जोधपुर | ट्वीट निजी विचार जिसका संस्थान या पद से कोई संबंध नहीं, RT एंडोर्समेंट नहीं। 100% FollowBack।
उनका नाम मोहम्मद आमिर खान था।
20 फरवरी 1998 की रात, उनकी मां ने उन्हें पुरानी दिल्ली में दवा लेने भेजा था। वह सिर्फ 18 साल के थे।
लेकिन वह कभी दुकान तक नहीं पहुंच पाए।
सादे कपड़ों में कुछ लोगों ने रास्ते में उन्हें रोक लिया। आमिर को नहीं पता था कि वे पुलिस वाले हैं। उन्हें एक सुनसान इमारत में ले जाया गया। सात दिनों तक गैरकानूनी हिरासत में रखा गया। यातनाएं दी गईं। खाली कागज़ों पर जबरन हस्ताक्षर करवाए गए।
फिर दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने उन्हें अदालत में पेश किया और 1996 से 1997 के बीच दिल्ली, गाज़ियाबाद, रोहतक और सोनीपत में हुए 19 बम धमाकों का आरोपी बना दिया।
मीडिया के सामने उन्हें आतंकवादी घोषित कर दिया गया।
परिवार को कोई सूचना नहीं दी गई। उनके घरवाले कई दिनों तक थानों के चक्कर लगाते रहे।
आमिर ने 14 साल जेल में बिताए। टॉर्चर सहा। एकांत कैद झेली। अदालत में एक-एक कर केस टूटते गए, सबूत फर्जी साबित होते गए।
2012 में उन्हें 19 में से 17 मामलों में बरी कर दिया गया। बाकी दो केस लंबित रहे। तब तक वह जेल में उतना समय काट चुके थे, जितनी सजा सभी मामलों में दोषी साबित होने पर भी नहीं होती।
जनवरी 2012 में वह जेल से बाहर आए।
लेकिन तब तक उनके पिता की मौत हो चुकी थी। उनकी मां को इतना गहरा स्ट्रोक आया था कि वह अपने बेटे को पहचान तक नहीं पाईं।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने दिल्ली सरकार को उन्हें मुआवज़ा देने का आदेश दिया।
राशि थी सिर्फ 5 लाख रुपये।
दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के किसी अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई। कोई निलंबन नहीं। कोई जांच नहीं।
आमिर ने अपनी कहानी पर एक किताब लिखी
“Framed As A Terrorist: My 14 Year Struggle To Prove My Innocence”
आज वह उन लोगों की मदद करते हैं जिन्हें झूठे मामलों में फंसाया गया है।
भारत ने उन्हें 5 लाख रुपये दिए…
और उसे इंसाफ कह दिया।
ऐसी सच्ची कहानियों के लिए फॉलो करें, जो कभी सुर्खियां नहीं बनतीं।
पेट्रोल डीजल और सोना कम खरीदने की अपील से पहले आपको ये सब करना था -
1- आप कोई भी रैली नहीं करते
2- सभी राज्यों के मुख्यमंत्री विधायक को रैली के लिए नहीं बुलाते
3- सांसदों के फ्री विदेश यात्रा में रोक लगा देते
4- गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन वर्चुअल करते, 3000 बसे नहीं बुलवाते
5- जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन वर्चुअल करते
6- विधायकों सांसदों को फ्री पानी बिजली सब बंद करते
7- सुधीर चौधरी का 14 करोड़ वाला पैकेज बंद करते
8- चुनाव में फ्रीबीज का वादा न करते
9-मुख्यमंत्रियों को हेलिकॉप्टर में उड़ने पर प्रतिबंध लगाते।
लेकिन नहीं, आप सोचते हैं कि बस जनता ही सारी कुर्बानी दे, नेता मौज काटें।
@Kapil_Jyani_ आधिकारिक काम से खेतोलाई गांव जाना होता रहता है, हाईवे से ग्राम पंचायत भवन तक एक लंबी सड़क और उस पर व्यवस्थित तरीके से पोधारोपण हमेशा मेरी जिज्ञासा का कारण रहा जो सिर्फ इस लिए कि सरकारी कागजों में तो कई वन, उपवन, बगीचे डेवल्प हुए हैं लेकिन आज कहीं नजर नहीं आते और ये जो खेतोलाई १/
सच्ची पत्रकारिता की हालत भारत ही नहीं विदेशों में भी खराब ही है।
पत्रकार का सवाल:- आपने कहा था कि रूस को यूक्रेन के पुनर्निमाण का खर्च उठाना होगा— तो क्या आप मानते हैं कि इजराइल को गाजा के पुनर्निर्माण का खर्च उठाना चाहिए।🤔🤔
यूरोपीय संघ के मुख्य प्रवक्ता:— इस समय इस मुद्दे पर मैं कोई टिप्पणी नहीं कर सकती हूं।
ठीक इस प्रेसवार्ता के बाद इस पत्रकार को नौकरी से निकाल दिया जाता है और फर्जी केस में सजा भी।
मुग़ल महल में थे,वशंज झोपड़ी में
पूछने पर कहती हैं- वफ़ादारी का यही अंजाम होता है,अंग्रेज़ों के साथ मिलकर ग़द्दारी की होती तो ऐश-ओ-आराम होता।
मुग़लों के वंशज का हाल, Watch Full Report 👇🏼
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राजस्थान सरकार के माननीय UDH मंत्री Jhabar Singh Kharra जी का जल प्रेम वाकई कमाल का है, जनता को पीने के पानी की व्यवस्था नहीं और मंत्री जी के घर पर विवाह समारोह के लिए दमकल विभाग लगा हुआ है।
>स्टीमर डूबने के बाद पता चलता है कि सवारी ने लाइफ़ जैकेट नहीं पहने थे,
>बस जलने के बाद पता चलता है कि उसमें इमर्जेंसी एग्जिट डोर तो था ही नहीं,
>ट्रॉली पलटने के बाद पता चलता है कि ट्रॉली में सवारी बैठाना मना है,
>ट्रक पलटने के बाद पता चलता है कि वो ओवरलोडेड था।
>1000 करोड़ की संपत्ति बना लेके बाद पता चलता है कि ऑफिसर भ्रष्ट था
> मरीजों के मरने के बाद पता चलता है कि हॉस्पिटल के पास लाइसेंस नहीं था
>लोगों के मरने के बाद पता चलता है कि खाना एक्सपायर्ड था
>दस्त लगने के बाद पता चलता है कि दूध में यूरिया मिला था।
"दरअसल इन सबके बारे में सिस्टम को पता होता है, बस भ्रष्टाचार की वजह से चलता रहता है।
जब पकड़े जाते हैं तब सबकुछ सामने आता है।
नाम है राजस्थान यूनिवर्सिटी….!!
राजस्थान भाषा का कोई डिपार्टमेंट ही उपलब्ध नहीं है…
फ़्रेंच,जर्मन, स्पैनिश भाषा के कोर्स उपलब्ध हैं…
लेकिन राजस्थानी भाषा का कोर्स करना हो…
तो महोदय आप यूगांडा जाइए, शायद वहाँ राजस्थानी भाषा का कोर्स हो जाए…
जयपुर में तो कोनी होवे सा…!!
फर्रुखाबाद में पोता घर में THAR पार्क कर रहा था,
दादी ने गेट खोला,
गाड़ी घर में चली गई,
दादी गेट बंद कर रही थी,
तभी THAR बैक हो गई और दादी को कुचल दिया,
THAR चलाने वाले 99 फीसदी मोटी बुद्धि के मुर्ख होते हैँ,