दुःख होता है। सच में बहुत दुःख होता है जब भी महिलाओं, खासकर सार्वजनिक जीवन में काम करने वाली महिलाओं पर इस तरह की टिप्पणी होती है।
“इनसे सुंदर विधायक पूरे राजस्थान में नहीं होगी कोई..!”
पढ़ने में यह तारीफ लगेगी। कहा जाएगा …‘अरे सुंदर ही तो कहा है, इसमें गलत क्या है?’ बस यहीं से समस्या शुरू होती है।
क्या एक महिला जनप्रतिनिधि की पहचान सिर्फ उसके शारीरिक सौंदर्य से तय होगी?
ये महिला कोई मॉडल नहीं, कोई प्रतियोगी नहीं। ये विधायक हैं। जनता द्वारा चुनी गईं जनप्रतिनिधि हैं। इनके पीछे एक व्यक्तित्व है, संघर्ष है, हिम्मत है। हजारों वोटों का भरोसा है। रात-दिन क्षेत्र की समस्याएं हैं। नीतियां हैं, भाषण हैं, सदन में उठाए गए सवाल हैं।
लेकिन हमारी निगाह सबसे पहले कहाँ ठहरती है? चेहरे पर। साड़ी पर। पगड़ी पर। ‘सुंदर’ पर।
यह ‘कॉम्प्लीमेंट’ नहीं, एक बहुत पुरानी बीमारी है …महिला को देह से आगे न देख पाने की बीमारी। आप पुरुष विधायक के लिए लिखते हैं.. ‘सबसे ओजस्वी वक्ता’, ‘सबसे तेज-तर्रार नेता’, ‘जनता के लिए 24 घंटे काम करने वाले’। और महिला के लिए? ‘सबसे सुंदर विधायक’।
फर्क समझिए। एक का आकलन काम से, दूसरे का सिर्फ रूप से।
राजस्थान की राजनीति में पगड़ी पहनकर खड़ी ये महिला सिर्फ ‘सुंदर’ नहीं है। ये हिम्मत है। क्योंकि पुरुषों के इस अखाड़े में साड़ी-पगड़ी पहनकर जीतना, सदन तक पहुँचना, अपनी बात मनवाना ये सुंदरता से नहीं, कलेजे से होता है।
विधानसभा क्षेत्र है, जिम्मेदारी है, रिपोर्ट कार्ड है। उसका सौंदर्य उसके काम में है, उसके फैसलों में है, उसके चरित्र में है। चेहरा तो सिर्फ चेहरा है।
अगली बार जब किसी महिला विधायक, सांसद, अफसर, डॉक्टर, शिक्षक और किसी भी महिला पर कुछ लिखें, तो एक बार सोच लीजिए …..क्या आप उसके व्यक्तित्व को देख रहे हैं या सिर्फ उसके व्यक्तित्व को ढँकने वाले चेहरे को?
क्योंकि ‘सुंदर’ कहकर आप तारीफ नहीं कर रहे, आप उसके पूरे वजूद को, उसकी मेहनत को, उसकी पहचान को सिर्फ तीन अक्षरों में समेट रहे हैं।
और एक जनप्रतिनिधि तीन अक्षरों में नहीं समाती। वो पूरे समाज का बोझ उठाती है।
उसे ‘सुंदर विधायक’ मत कहिए। ‘सशक्त विधायक’ कहिए।
यही उसका असली परिचय है। यही उसका सम्मान है।
@drshikhameel #RespectHerMindNotJustFace
#RajasthanPolitics
#NariShakti
@CommonBS786OM जा बे चूतिये आज भी भारत में सबसे सस्ता नेट और कॉलिंग उपलब्ध हो रहा है जबकि पिछली कांग्रेस सरकार में इतनी कम्पनियां होते हुवे भी नेट कालिंग sms सबके अलग अलग रिचार्ज थे और सबसे महंगे भी।
डार्लिंग तब के अम्बानी अडानी बहुत अमीर थे और UPA सरकार उनके इशारों पर काम करती थी
@DevenderYadav_ होता। 2004 में अटल जी अर्थव्यवस्था में 12th स्थान सौंपकर गये थे जो 10 सालों में 10th तक पहुंचे जबकि इस दौरान 10वे से दूसरे स्थान पर पहुंच गया 2014 के बाद मोदीजी 10वे से 4th पर लेकर आ गये और 29 तक तीसरे पर भी पहुंच जाएंगे पर तुम लोगों के पेट के मरोड़े कभी ठीक नहीं होंगे।
@DevenderYadav_ अरे तुम लोग तो खुद जातिवादी मानसिकता से गिरे हुवे होअसल में मोदी शाह की जोड़ी देशहित में काम कर रही हैं अभी यदि गैर भाजपा सरकार होती तो देश के हालात पाकिस्तान से भी बुरे होते
2004 से 2014 के बीच देश में 3980 आतंकी हमले हुवे थे औसतन 1 हमला रोज अर्थव्यवस्था को 3 ट्रिलियन का नुकसान
@DevenderYadav_ भाजपा और परिवारवाद का दूर दूर तक कोई रिश्ता नही है।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल जी मुख्यमंत्री बनने से सालभर पहले हमारे शहर आये थे पार्टी पदाधिकारि के तौर पर किसी ने फोटो तक नही ली क्योंकि किसी ने सोचा भी नही था के इतना साधारण कार्यकर्ता मुख्यमंत्री बन जायेगा।
@DevenderYadav_ राजस्थान में जुलाई में सायद पंचायती राज चुनाव होने वाले हैं भाजपा के सारे कैंडिडेट की लिस्ट देख लेना 95% से भी ज्यादा ऐसे उमीदवार मिलेंगे जिनके परिवार का कोई भी सदस्य विधायक या सांसद नही है जबकि कांग्रेस 75% से ज्यादा टिकट अपने विधायक और सांसद परिवार के सदस्यों को टिकट देगी।
@DevenderYadav_ हमारे यहाँ जिले की बीजेपी टीम में एक विधायक की पुत्रवधू को शामिल कर लिया उसको लेकर हंगामा हो गया और जिलाध्यक्ष को वादा करना पड़ा कि वो प्रदेश को नया नाम भेज देंगे। यहाँ तक ऐसे लोग भी महत्वपूर्ण पदों पर बैठे है जिनके जातिगत वोट बहुत कम है।
@DevenderYadav_ वर्तमान बीजपी राष्ट्रीय अध्यक्ष की 200 जनों की टीम में से सिर्फ 13 लोगों को छोड़कर कोई भी ऐसा व्यक्ति नही है जो किसी राजनीतिक परिवार से आता हो सारे महत्वपूर्ण पदाधिकारी अपने दम पर बने है जो 13 राजनीतिक परिवार से आते है वो भी वो लोग है जिन्होंने खुद को साबित किया है योग्यता के
@DevenderYadav_ उसी राज्य या प्रदेश अध्यक्ष में उसी जिले से भी नही था परिवार तो दूर की बात है।
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उन राज्यों के लोग भी बने है जहां बीजेपी का बिल्कुल जनाधार नही था जबकि कांग्रेस सहित बाकी राष्ट्रीय पार्टियां उन राज्यों के लाग को मुंह तक नही लगाती।
@DevenderYadav_ विषुद्ध चूतिये हो। जाहिर है अरुण जेटली सुषमा स्वराज जी के गुजर जाने के बाद उनका परिवार खत्म नहीं हो गया था लेकिन उनके बेटे या बेटी उनकी तरह सीधे केबिनेट मंत्री नही बन गए। जनसंघ से लेकर अब तक बीजेपी के जितने भी प्रदेश या राष्ट्रीय अध्यक्ष बने उनमें कोई सेम स्टेट से भी नही था ...
@Ravikk92@grok ये सिंगल यूज एफएंड्रॉफ् ट्यूब्स है। प्रयोगशाला में जीव विज्ञान वनस्पति विज्ञान के सेम्पल को सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल करते है और भी सेम्पल किसी चीज का हो सकता है शक है तो एक बार लेब में चेक करवा लें
वैसे प्रयोगशाला में ये ट्यूब आम बात है।
@afjalrajguru ये दवा महिलाओं में PCOS/PCOD के दौरान भी दी जाती हैं और गर्भधारण या हेल्दी एग्स नही बन रहे है तो भी दी जा सकती हैं।
कुलमिलाकर बिना पूरी जानकारी के कुछ नही बता सकते बाकी एक डॉक्टर का अपने पेशेंट के साथ गोपनीयता और विश्वास का रिश्ता होता है और बिना डॉक्टर की सलाह से लेनी नही है
@rypyrgp@SmitaGarg8 बढ़ा दिया तो 90% देश के पास निवेश के लिये कुछ बचेगा ही नही ये यूरोप नही है जहाँ लोग शेयर प्रोपर्टी मेटल म्युचुअल फंड sip जैसी अलग अलग चीजों में निवेश करें यहां लोगो के पास हजारों सालों से एक ही भरोसेमंद निवेश है और वो है सोना।
मारवाड़ीयो की आत्मा में बसता है सोना।
@rypyrgp@SmitaGarg8 मोदी के परिवार का इससे क्या लेना देना देश के प्रधानमंत्री है सारा देश उनका परिवार है और हर परिवार में सहमति असहमति होते आई है। मोदीजी के कहने से लोग पेट्रोल खरीदना बन्द कर देंगे रोटी खाना बंद कर देंगे सोना उनसे भी बन्द नही होगा। लग्जरी प्रोडक्ट होते हुवे भी सबसे कम gst है क्योंकि