#ProjectUkhyata का उद्देश्य है गढ़वाल में पलायन के कारण बंजर हुई जमीन को पुनः उपजाऊ और आजीविका का मुख्य साधन बनाना। निराशा में उम्मीद की किरण ढूंढना और उसे सफलता में बदलना। 2020 बहुत कुछ लेकर जाना चाहता था लेकिन हमने तय किया कि जाने से ज्यादा क्यों न इससे कुछ हासिल किया जाए।
This video from Mokh village in Nandanagar (Ghat) block of Chamoli district is heartbreaking. Every day, school children have to cross a fast-flowing stream to reach their school, risking their lives on the way. Their love for education is truly inspiring, but no child should have to face such danger just to attend school.
The local MLA, public representatives, and the administration should take this issue seriously. These children don't need to prove their courage they need a safe bridge and a secure way to get to school.
कितने गाजी आए, कितने चले गए, सरकारें आती रही, जाती रहीं लेकिन ये हौंसला सिर्फ़ @pushkardhami जी ही कर पाए, जनजागरण भी हुआ, सरकार साथ खड़ी रही तो स्थानीय लोगों ने भी हौंसला किया। वरना आज से पहले लोग सिर्फ़ ट्विटरवीर हुआ करते थे, गपोड़संख और घपोड़संख वाली कहानी तो आपने सुनी ही होगी। लोग जेब गरम करने और क्रेडिट खाने में इतने व्यस्त रहे कि ज़मीन पर कोई काम हो ही नहीं पाया।
@IndiGo6E Please resolve ticket #38611086 ASAP.
Payment got deducted twice and tickets were not booked. Please initiate the refunds ASAP as I am waiting for the refund and need to book my flights urgently.
Kindly prioritise. Thanks.
CJP का दंगाई Gen Z नहीं है - सीएम पुष्कर सिंह धामी ने बहुत पहले पकड़ ली थी ये बात...
कुछ माह पहले जब देहरादून में युवा पेपर लीक में CBI जांच की मांग कर रहे थे तब सबसे पहले उत्तराखंड के CM @pushkardhami जी ने कहा था कि Gen Z को बदनाम ना किया जाए, वो नक्सली नहीं हैं, ये नक्सली कोई और हैं जो बात-बात पर देश जला देने की बात करते हैं; उन्होंने कहा कि हमारे देश का Gen Z लोकतांत्रिक मूल्यों में यकीन करता है और वो अगले ही दिन युवाओं के बीच उनकी माँग सुनने पहुँच गए. मुख्यमंत्री ने प्रदेश के हर युवा की बात सुनी है परीक्षा से लेकर पेड़ों तक, हर बार उन्होंने यही कहा है कि बात कर के समाधान तलाशते हैं, उन्होंने एनार्की भड़काने वालों को भी 'ठीक' किया और अपनी जायज़ माँग रखने वालों को सुना भी...
इस सबके बीच, थंबनेल पत्रकार @ultachasmauc वाली प्रज्ञा यादव के इस्तीफे का क्या हुआ ये सवाल अधूरा ही रह गया
I know people who could confidently convince their dad that they fathered themselves. That's the level of confidence they operate on.
Coincidentally, they are the same fat ass intellectual giants who claimed they planted an apple orchard #ProjectUkhyata in my village despite never having been beyond Mussoorie, forget visiting my village or my orchard.😅
@pantlp ये पौड़ी-देवप्रयाग रोड पे स्थित कुंडी -तमलाग गाँव के मोरी मेले का वीडियो ऋषिकेश का बता के क्या साबित करना चाहता हो ?
जब इतने बड़े पत्रकार महोदय बिना सोचे समझें कुछ भी उठा के चेपने लगते हैं तो आपकी पत्रकारिता पे संदेह होना स्वाभाविक है।
@pantlp ये पौड़ी-देवप्रयाग रोड पे स्थित कुंडी -तमलाग गाँव के मोरी मेले का वीडियो ऋषिकेश का बता के क्या साबित करना चाहता हो ?
जब इतने बड़े पत्रकार महोदय बिना सोचे समझें कुछ भी उठा के चेपने लगते हैं तो आपकी पत्रकारिता पे संदेह होना स्वाभाविक है।
उत्तराखंड के युवा किसान विमल नौटियाल आज उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।होटल मैनेजमेंट की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने लाखों के पैकेज वाली नौकरी का अवसर छोड़कर गांव लौटने और खेती को अपना भविष्य बनाने का फैसला किया।उन्होंने 15 नाली बंजर भूमि को मेहनत और आधुनिक तकनीक की मदद से फलों और जैविक खेती के मॉडल फार्म में बदल दिया।
आज उनके बगीचों में सेब, कीवी, नाशपाती, आड़ू, बेर, खुबानी के साथ-साथ जैविक सब्जियों की भी सफल खेती हो रही है।
उनकी मेहनत का परिणाम यह है कि आज वे खेती से करोड़ों रुपये का कारोबार कर रहे हैं और लाखों रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं।
जैविक खेती में उत्कृष्ट कार्य के लिए वर्ष 2024 में उन्हें "उत्तराखंड स्तम्भ सम्मान" से सम्मानित किया गया।
विमल नौटियाल की सफलता उत्तराखंड में रिवर्स माइग्रेशन का भी सशक्त उदाहरण है। उनकी कहानी बताती है कि सही सोच, आधुनिक तकनीक और मेहनत से खेती को लाभदायक व्यवसाय बनाया जा सकता है।
आज वे उत्तराखंड के हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर आत्मनिर्भर पहाड़ की नई तस्वीर पेश कर रहे हैं।
ये पौड़ी-देवप्रयाग रीड पे स्थित कुंडी -तमलाग गाँव के मोरी मेले का वीडियो ऋषिकेश का बता के क्या साबित करना चाहता है? डाक्टर महोदय पहले अपनी आँखों और मानसिकता का इलाज करवा लो।
Fearless protests hit Modi’s BJP in Rishikesh!
Common people are raging against 3,000 trees being slaughtered for road widening.
The “dead” public finally woke up - for trees.
Trees today.
Corruption tomorrow.
India is awakening
@sphavisha ये पौड़ी-देवप्रयाग रीड पे स्थित कुंडी -तमलाग गाँव के मोरी मेले का वीडियो ऋषिकेश का बता के क्या साबित करना चाहता है? डाक्टर महोदय पहले अपनी आँखों और मानसिकता का इलाज करवा लो।
गढ़वाली में एक कहावत है- "बाँझ गौं माँ नकटा बसी, आफ़ी नाची, आफ़ी हँसी।" आज विकिपीडिया की दशा कुछ वैसी ही प्रतीत होती है। उसने अपने चारों ओर एक आत्ममुग्ध संसार रच लिया है, जहाँ प्रशंसा करने वाला भी वही है, ताली बजाने वाला भी वही, और स्वयं को इतिहास का निर्णायक मानने वाला भी वही। दिन में कई बार अपनी ही पीठ थपथपाकर उसे ऐसा संतोष मिलता है मानो विश्व-बौद्धिकता की धुरी उसी के इर्द-गिर्द घूम रही हो।
विडंबना यह है कि समय बहुत आगे निकल चुका है। गूगल के AI आधारित रिजल्ट्स ने सूचना की दुनिया का व्याकरण ही बदल दिया है। आज सामान्य पाठक किसी तथ्य के लिए विकिपीडिया तक पहुँचने से पहले ही उत्तर पा लेता है। ऐसे में जो अब भी ज्ञान का अंतिम प्रमाणपत्र विकिपीडिया को ही मान बैठा है, उसे पहली घोषणा में ही बौद्धिक आलस्य का दोषी ठहरा देना चाहिए। समय बदल चुका है; पर कुछ संस्थाएँ अब भी अपने ही बनाए आईने में स्वयं को विराट देखकर मुग्ध हैं। अस्तु
One of the saddest realities of the hills is that very few doctors or teachers willingly choose to leave the plains and serve here. But those who do often end up becoming part of the mountains themselves.
This heartwarming video from Government Nursing College, Chamoli captures the emotional farewell to Dr. Mamta, who served as Principal for nine years. Through the pandemic and beyond, she earned the love and respect of students, colleagues and the local community with her dedication and compassion.
As she bid farewell, tears spoke louder than words.
The hills may struggle to attract good people, but when they find them, they never let them leave without a piece of their heart.
देवलसारी में ONGC के पैसे से मनी लॉंड्रिंग करने वाले तितली ट्रस्ट NGO का सोनम वांगचुक से कनेक्शन मैंने बहुत पहले बताया था। ये सब क्लाइमेट एक्टिविज्म के नाम पर अलग ही खेल खेल रहे हैं। उत्तराखंड में हर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के ख़िलाफ़ इनकी लॉबी खड़ी मिलती है और आज ये जंतर मंतर पर कॉकरोच का लीडर बना हुआ है। देवलसारी और उत्तराखंड में भी वन विभाग के भीतर इस NGO और नेक्सस की पूरी घुसपैठ है। @HardeepSPuri@pushkardhami@AmitShah@PMOIndia
FCRA के नए नियमों से मोदी सरकार ने कतरे भारत विरोधी NGOs के पर
Foreign Funding से भारत की तरक्की के ख़िलाफ़ साजिश रचने वाले संगठनों पर लगाया अंकुश तो क्यों परेशान हुई कांग्रेस?
विदेशी चंदे पर पलने वाले NGOs, Activists और राहुल गांधी का कांग्रेसी इकोसिस्टम कैसे Great Nicobar Project पर फैला रहा है प्रपंच? समझा रहे हैं @ashu_nauty
चैनल बैन करवा देना किसी तर्क की जीत नहीं, डर की सबसे बड़ी स्वीकारोक्ति है। यूट्यूब पर मास रिपोर्टिंग की जॉम्बी भीड़ खड़ी करने की परंपरा सबसे पहले @dhruv_rathee ने शुरू की थी। उसका पूर्व स्क्रिप्ट राइटर, हिंदू-विरोधी विजेता दहिया, आज @abhijeet_dipke और @SauravDassss का प्रमुख प्रवक्ता बना हुआ है।
इसी नेटवर्क और CJP के सर्बिया मॉडल कनेक्शन पर मैंने यूट्यूब चैनल 'Chapter 1' पर विस्तार से वीडियो बनाया था। नतीजा क्या हुआ? CJP के नव-नील क्रांतिकारियों ने संगठित तरीके से मास रिपोर्टिंग करके पूरा चैनल ही बैन करवा दिया।
विडंबना देखिए कि जिस वीडियो को दबाने की इतनी कोशिश हुई, उसी पर उनकी यह प्रतिक्रिया इस बात को और मज़बूत करती है कि वीडियो में उठाए गए सवाल उनके लिए असहज थे। खासकर @SrdjaPopovic, @CANVASNVS की ट्रेनिंग और @_YogendraYadav की भूमिका से जुड़े प्रमाण और दस्तावेज़..