अवध ओझा — बिहार के एक नेता है, जो कहते है कि जब गांधी जी की हत्या हुई, तो नेहरू जी एडविना के कमरे में थे।
एंकर — गिरीराज सिंह?
अवध ओझा — पता नहीं, जो भी हो लेकिन लगता है कि वे दरवाज़े के छेद से झाँक रहे थे। 😂
नेहरू पर बोलने की इस देश में किसी की औक़ात नही है। 🔥
ये गुजरात का विकास देख लीजिए , बारिश होती है और प्रशासन की पोल खुल जाती है सड़क गई ख़त्म . यही विदेश में हुआ होता तो करोड़ो रुपया जुर्माना जिसका ट्रक होता उसको मिलता लेकिन यहाँ रिपेयर भी ख़ुद करवायेगा .
यूपी CM के भाषणों में मुसलमान, कब्रिस्तान, अज़ान, मस्जिद का ज़िक्र न हो ऐसा हो ही नहीं सकता, मुसलमानों और उनके धार्मिक स्थलों को जितना योगी जी याद करते हैं अगर मुसलमान भी इतना ही याद करें तो सीधा जन्नत में जाएगा।
“इथेनॉल का माइलेज 30 फ़ीसदी कम होता है”
तेल कंपनी BPCL के बड़े अधिकारी अनुराग सरावगी का ये बयान ANI हैंडल से डिलीट करा दिया गया है!
किस लॉबी ने डिलीट कराया @nitin_gadkari जी?
(Video posted by @AjitSinghRathi)
पहले दाढ़ी वाले मुसलमान को दाढ़ी वाले हिंदू से लड़वाया...
फिर दाढ़ी वाले मुसलमान को दाढ़ी वाले मुसलमान से भिड़ाया...
जब उससे भी मन नहीं भरा, तो मीडिया वाले, दाढ़ी वाले हिंदू को दाढ़ी वाले हिंदू से ही लड़वा रहे हैं... और खुद तमाशा देख रहे हैं.
वाह! क्या शानदार कारोबार है।
ANI ने ये ब्यान का विडियो डिलीट कर दिया
क्यों किया डिलीट कोई बतायेगा ?
“इथेनॉल का माइलेज 30 फ़ीसदी कम होता है”
तेल कंपनी BPCL के बड़े अधिकारी अनुराग सरावगी का ये बयान
समाजवादी पार्टी के पास 37 सांसद हैं। आप कितना लायेंगे महाराज?
इंडिया टुडे वाले विडियो बनाने की हिम्मत कर पा रहे हैं,
तो ये सत्ता परिवर्तन की आहट है क्या?
“…इथेनॉल का माइलेज 30 फ़ीसदी कम होता है…”
अनुराग सरावगी, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के बायोफ्यूल्स के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर
Video Credit : ANI https://t.co/WWxnk5ZztN
निशांत कुमार को 3 महीने पहले कोई नहीं जानता था।
लोगों को लगा कि नीतीश कुमार के बेटे हैं इसलिए डायरेक्ट मिनिस्टर बना दिए गए।
बहुत लोगों ने हेल्थ को लेकर मज़ाक उड़ाया। मैं खुद गलत निकला।
केवल 2 महीने हुए हेल्थ मिनिस्टर बने, और मीडिया के सामने का बयान सुन लो ऐसा लग रहा है कोई बहुत पढ़ा लिखा बंदा बोल रहा हो।
मोदी जी ख़ुद मीडिया के सामने आज तक ऐसा बयान नहीं दिए होंगे।
यह तस्वीर मोहम्मद ज़ैद की है। ज़ैद अब दुनिया में नहीं है। ज़ैद दिल्ली के मुस्तफाबाद के रहने वाले थे। यह इलाक़ा लोनी बॉर्डर पर है। लोनी यूपी के गाजियाबाद में आता है। ज़ैद अपने दो दोस्तों, नदीम और इब्राहिम के साथ मोटरसाइकिल पर सवार होकर बेहटा स्थित एक स्विमिंग पूल में नहाने के लिए जा रहे थे। वो जैसे ही लोनी मेन रोड से बेहटा रोड की तरफ मुड़े, तभी एक एक कार से उनकी बाइक की हल्की सी टक्कर हो गई। इसके बाद कार में बैठा राहुल अपने दोस्त के साथ उतरा और जैद को को पीटना शुरू कर दिया। बात सिर्फ यही तक नहीं रही बल्कि राहुल अपने दोस्त के साथ ज़ैद को जबरन जैद कार में भरकर मनीष प्रॉपर्टीज नामी ऑफिस ले गया, वहां उन्होंने ज़ैद को बेरहमी से पीटा।
जब जैद के दोस्त नदीम और इब्राहिम बाइक लेकर वहां पहुंचे तो उन्होंने देखा कि जैद बेहोशी के हाल में ज़मीन पर पड़ा हुआ है, और राहुल नामी युवक लगातार गाली-गलौज करते हुए उसे लातों से बेरहमी से पीट रहा है। राहुल ने ज़ैद के दोस्त नदीम और इब्राहिम को धमकी देते हुए कहा कि इसे ले जाओ, नहीं तो तुम्हारा भी यही हाल होगा। वो दोनों दोस्त जैद को उठाकर अस्पताल लेकर पहुंचे, वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद जैद को मृत घोषित कर दिया।
पिछले कुछ वर्षों में एक बुलडोज़र और एनकाउंटर का चलन देखा गया है। दिल्ली में तरुण की हत्या हुई तो उसे इंसाफ दिलाने के नाम पर आरोपितों के घर को तोड़ दिया गया। उसके बाद दिल्ली से सटे खोड़ा में सूर्य की हत्या हुई तो हत्यारोपी का चौबीस घंटे के भीतर एनकाउंटर कर दिया गया। अब सवाल ज़ैद को इंसाफ दिलाने का है। जब हत्या के बदले एनकाउंटर और बुलडोज़र का ही चलन शुरू हो चुका है, तब ज़ैद के हत्यारोपी का एनकाउंटर क्यों नहीं किया जा रहा? उनके घरों पर बुलडोज़र क्यों नहीं चलाया जा रहा? सूर्या और तरुण की हत्या के बाद सत्ताधारी दल के अनुषांगिक संगठनों और नेताओं ने किस तरह बयानबाज़ी करके आपसी रंजिश में हुई इन हत्याओं को ‘दूसरा’ रंग दिया था, यह पूरे देश ने देखा है। खोड़ा और उत्तम नगर की गलियों में घूमते नफ़रती यू-ट्यूबिए किस तरह इन हत्याओं का दोष पूरे समुदाय पर मढ़ रहे थे, यह भी पूरे देश ने देखा है। सवाल फिर वही है कि जब किसी हिंदू के ग़ैर हिंदू हत्यारे के खिलाफ पुलिस और सरकार बुलडोज़र और एनकाउंटर एक्शन को अमल में लाती है, तब ज़ैद के हत्यारों पर यह कार्रावाई क्यों नहीं होनी चाहिए? हत्यारों से निपटने का यह फॉर्मूला सरकार और पुलिस ने खुद शुरू किया है, तो इसमें भेदभाव क्यों?
सरकार ने तरुण और सूर्या के परिजनों को मुआवज़ा दिया है। तरुण के हत्यारोपितों का घर गिराया है, तो सूर्या मर्डर के नाबालिग आरोपी को एनकाउंटर में मारा है। अब सवाल है कि यह त्वरित ‘इंसाफ’ ज़ैद को क्यों नहीं? क्या वो इंसान नहीं? क्या वो भारतीय नागरिक नहीं? उसके परिवारजनों को मुआवज़ा क्यों नहीं? उसके हत्यारोपितों का एनकाउंटर क्यों नहीं? बुलडोज़र एक्शन क्यों नहीं? क्या इस देश में दो कानून हैं? जब बुलडोज़र और एनकाउंटर चलन शुरू हो ही चुका है, तब इसमें भेदभाव क्यों? क्या मदर ऑफ डेमोक्रेसी में सब कुछ नाम के आधार पर होता है?
दोगलेपन की भी हद होती है!
राम मंदिर घोटाले पर बजरंग दल के विरोध प्रदर्शनों की संख्या - 00
राम मंदिर घोटाले पर RSS के विरोध प्रदर्शनों की संख्या - 00
राम मंदिर घोटाले पर हिंदू रक्षा दल के विरोध प्रदर्शनों की संख्या - 00
ये लोग खुद को हिंदू धर्म का रक्षक कहते हैं, लेकिन राम मंदिर में हुए घोटाले पर चुप रहते हैं।
"हम कोई बिकाऊ माल नही हैं हम टिकाऊ माल हैं"
"ये मत सोचना कि हमको आप खरीद लोगे, हम कोई बिकाऊ माल नही हैं हम टिकाऊ माल हैं, बिकाऊ माल जो था गया भाजपा में "
@digvijaya_28, दिग्विजय सिंह,
आपके कितने विधायक और सांसद है येलो अंकल?
सलाह भी कौन दे रहा है जो एक समय में अखिलेश जी के साथ फोटो खिंचवाने को भी तरसते थे
वैसे कितनी पार्टी बदल चुके हो आजतक?
अपने घर वालों के सिवा कितनो को टिकट दिए हो?
शर्म करो @oprajbhar