जयपुर में छात्रसंघ चुनाव बहाली और राजस्थानी भाषा केंद्र की मांग को लेकर शुभम रेवाड़ का आमरण अनशन आज 12वें दिन भी जारी है।लगातार बिगड़ती सेहत के बावजूद उन्होंने अपना आंदोलन समाप्त करने से इनकार किया है। @BhajanlalBjp जी जल्द सकारात्मक निर्णय लेकर अनशन ख़त्म करवाए
@ShubhamRewar4U
मेरा अनशन तुड़वाने की कोशिश मत कीजिए, 20 जुलाई को संसद तक शांतिपूर्ण मार्च में साथ चलिए।
अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक का भावुक संदेश...मैं ठीक हूं, इतनी भी खराब हालत नहीं है। अगर मेरा साथ देना चाहते हैं, तो 20 जुलाई को संसद तक होने वाले शांतिपूर्ण मार्च में शामिल हों।
कुछ दिन पहले की घटना याद है, जब जयपुर में मुख्यमंत्री जी के काफिले के गुजरने से पहले सड़क क्लियर करवाते हुए सड़क किनारे मोमोज़ बेचकर अपना घर चलाने वाली जयपुर की बेटी पुलिसवालों की असंवेदनशीलता के चलते खौलते हुए पानी से जल गई थी...??
इस नए वीडियो में देखिए...उस दिन केवल वह दो पुलिसवाले ही असंवेदनशील नहीं थे...बल्कि राजस्थान के मुख्यमंत्री जी का पूरा काफिला वहां से निकलता रहा और जयपुर की बेटी सड़क के बीच में तड़पती रही...!!
@INCIndia@INCRajasthan
धुरंधर-2 का असली मकसद था देशद्रोहियों का नकाब उतारना, लेकिन खेल उल्टा पड़ गया—भारत में बैठे पाकिस्तान के पालतू कुत्ते भी बेनकाब हो गए! शपथ के साथ ही योगी जी ने जो माफिया मुक्त यूपी का संकल्प लिया था, उसे फिल्म ने बखूबी साबित कर दिखाया। अब सच का सामना करने की बारी है!
हर कोई राघव चड्ढा बन जाए इतना आसान नहीं❣️
संसद में आम आदमी पार्टी नेता राघव चड्डा ने मोबाइल रिचार्ज लूट का मुद्दा उठाया,
उन्होंने कहा Monthly Plan Recharge के नाम पर 12 महीने में 13 बार रिचार्ज क्यों करना पड़ता है.
राघव चड्डा ने कहा हर मोबाइल नेटवर्क कंपनी एक साल में 12 की जगह 13 बार रिचार्ज कराती हैं.
Monthly Plan के नाम पर 30 दिन की जगह पर 28 दिन की वैलिडिटी देती हैं. यानी एक साल में 336 दिन की वैलिडिटी.
मित्रों, ये तो उसी तरह है जैसे 1 KG समान 950 किलोग्राम में बेचा जा रहा है और आधा किलो का समान 455 किलोग्राम में बिक रहा है. यह लूट नही, महालूट है.
आदरणीय राजा राम मील साहब हमने कभी जाट समाज या किसी अन्य समाज का विरोध नहीं किया आप भी अलग से आरक्षण मागों हमें कोई दिक़्क़त नही है हम सर्वसमाज को साथ लेकर आगे बढ़ते है लेकिन जिस प्रकार हमें अलग से आरक्षण माँगने पर आपको पेट दर्द नहीं होना चाहिए !!
माली सैनी कुशवाह आदि समाज अपने हक की लड़ाई लड़ रहा हैं इसमें आप परेशानी नहीं होनी चाहिए !!
आप जाट -माली समाज को आपसे में लड़ाने काम न करें क्योंकि जाट-माली समाज का भाईचारा बना हुआ हैं उसे बने रहने दो !!!!
हम हमारा हक लेकर रहेंगे और हमारी एकता मजबूत है जिसे कोई तोड़ नहीं सकता !!
#cpsaini
#chandraprakashsaini
राजस्थान विधानसभा में माली-सैनी समाज की 11 सूत्रीय मांगों और आरक्षण के मुद्दे को पुरजोर तरीके से रखा। समाज के अधिकारों, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सम्मान को सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता है।
मेरा सदैव प्रयास रहा है कि हर वर्ग को उसका उचित हक मिले और विकास की मुख्य धारा से जोड़ा जाए। माली सैनी समाज की वर्षों से लंबित मांगों के समाधान के लिए सरकार से सकारात्मक कदम उठाने का आग्रह किया।
2014 में Incoming Call के लिए रिचार्ज: ₹0
2026 में Incoming + OTP के लिए Minimum Recharge: ₹199
यानी अब अपने ही फोन पर कॉल और मैसेज रिसीव करने के लिए भी पैसे दो!
जब मार्केट में Monopoly और Duopoly बनता है, तो ग्राहक की जेब ही निशाना बनती है।
Incoming कॉल और OTP कोई लग्ज़री नहीं — ये बेसिक जरूरत है।
लेकिन आम आदमी से हर जगह वसूली जारी है।
हम तो न्यायपालिका का सम्मान करते हैं
यह बात पहले भी कह चुके हैं और अब भी कह रहे हैं। लेकिन न्यायपालिका के इस फैसले ने हलचल तो मचा ही दी है। न्यायपालिका के किसी भी फैसले से हलचल पैदा होनी ही चाहिए। लेकिन इस बार शायद गलत तरीके से हलचल पैदा हो गई है। अर्ध बलात्कारी मानसिकता के लोगों को इस फैसले से निश्चित रूप से हिम्मत मिलेगी।
10-12 साल पहले पढ़ा-सुना जरूर था कि किसी महिला को घूरना तक बलात्कार की श्रेणी में आएगा लेकिन हो सकता है इतने वर्षों में कानून थोड़ा घिस गया हो। वैसे भी हमारे देश में तो कुछ भी हो सकता है इसलिए कुछ हो ही गया होगा।
एक कहावत है "कानून वकीलों का स्वर्ग है"। कानून इतने ज्यादा पेचीदा हैं हमारे यहां कि अव्वल तो कोई फैसला ही नहीं हो पाता और अगर वकील होशियार हो तो चाहे जैसे फैसले भी करवा सकते हैं। कहते हैं "कानून में हजारों गलियां होती हैं" और किसी भी गली से अपराधी चुपचाप निकल सकता है। न्याय की कुर्सी पर बैठे हुए देवताओं को बस इतना ही ध्यान रखना चाहिए कि अपराधियों को कोई ऐसी गली नहीं मिले जिनमें से वे निकल सकें।
बाकी हम तो न्यायपालिका का सम्मान करते आए हैं और करते रहेंगे। हमारे पास इसके अलावा कोई विकल्प भी तो नहीं है।
जय संविधान
कितना अजीब देश है मेरा…..!!!
पूरी दुनिया ग्लोबल वॉर्मिंग से बचने के रास्ते खोज रही है…
ग्रीन एनर्जी, सोलर, हाइड्रोजन जैसे विकल्पों की और भाग रही है….
और हमने जिन लोगों पर इन सबकी ज़िम्मेदारी सौंपी थी…
वो एयरकंडिशनर कमरों में बैठकर…
कभी जंगल काटने के फ़रमान जारी कर रहे हैं…
कभी ओरण, गोचर, तालाब पर क़ब्ज़े के फ़रमान जारी कर रहे हैं…
और जनता ने इसे ही अपनी नियति मान लिया है…
वाह रे मेरे देश के ज़िम्मेदारों… किस मिट्टी के बने हो तुम…
सिस्टम भी हैरान है... आखिर इस आदमी का क्या करें?
कल्पना कीजिए एक ऐसे इंसान की, जिसके पास न कोई आलीशान दफ्तर है और न कोई पीआर टीम।
उनकी कुल जमा पूंजी है सिर पर बंधा एक साफा, दो जोड़ी सादे कपड़े और पैरों में मरुस्थल की धूल फांकती एक भारी जूती।
आज के दौर में जहाँ लोग हाईवे पर जमीनें और शहरों में प्रॉपर्टी बटोरने में लगे हैं,
सुमेर सिंह का 'साम्राज्य' केवल कुछ ऊंटों और बकरियों तक सिमटा है।
लेकिन उनकी ताकत उनकी 'इच्छाशक्ति' है। उन्हें न पद का लोभ है, न किसी पार्टी का टिकट।
सच है, जब इंसान को कुछ खोने का डर न हो, तो वह सबसे अधिक शक्तिशाली हो जाता है। ✊
आज आप #ओरण_बचाओ_आंदोलन का जो विशाल रूप देख रहे हैं,
उसकी नींव सुमेर सिंह जी ने ठीक दो दशक पहले ही रख दी थी।
वे ही इस पूरे आंदोलन के मुख्य ध्वजवाहक हैं, जो पश्चिमी राजस्थान की आत्मा (#ओरण) को बचाने की जंग लड़ रहे हैं।
पश्चिमी राजस्थान के इस निस्वार्थ योद्धा के संघर्ष को भुपेन्द्र राठौड़ का सलाम! 🔥🫡
ऐसा होता था मारवाड़….
दूर दूर तक पेड़ पौधे हरियाली का नामोनिशान तक नहीं….
लेकिन हमारे पूर्वजों ने संघर्ष और संकल्प से इस धरती को सींचा…
खेजड़ी का पेड़ों से, और सेवण की घास से शुरुआत की….
बूँद बूँद पानी से सींचकर इस बंजर रेगिस्तान में हरियाली की एक उम्मीद जगाई…
धीरे धीरे रोहिडा, कैर, जाल, कुमटिया, बबूल और अंत में नीम के पेड़ तक पहुँचे….
सदियों की इस तपस्या का फल हमारी आज की पीढ़ी को मिल रहा है और आज मारवाड़ में पहले से कई गुना ज़्यादा बरसातें होने लगी है…
हमारे पूर्वजों ने भविष्य की पीढ़ियों के लिए इतना कुछ किया….
तो क्या हम यथास्थिति बनाए रखने तक की मेहनत नहीं कर सकते…??
इतने निकृष्ट और पुरुषार्थ हीन तो नहीं है हम….!!!
यह नज़ारा ऐतिहासिक है
बीकानेर में इतिहास लिखा जा रहा है। भरी सर्दी में दिन और रात के नज़ारे एक जैसे हैं। खेजड़ी बचाने के लिए 363 संत गण आमरण अनशन पर हैं। हमने मां अमृता देवी का दौर तो नहीं देखा है, लेकिन उनका जस आज तक सुनते आए हैं। आज की इस रात का जस हमारी आने वाली पीढ़ियां सुनती रहेंगी।
एक वक्त था। खेजड़ियों पर संकट आया था और लोग उन्हें बचाने के लिए इस ताकत से आगे आए थे। इस धर्मयुद्ध में व्यक्ति गौण हो गए थे।
#खेजड़ी_बचाओ_महापड़ाव #खेजड़ी_बचाओ
पिछले दिनों जो पानी में घी बर्बाद कर रहे थे वो बीकानेर का यह नजारा देखे... खेजड़ी बचाओ महापड़ाव में देसी घी से कई क्विंटल हलवा बनाया गया खाने के लिए....
#खेजड़ी_बचाओ_महापड़ाव