18 जुलाई @Wangchuk66 को जंतर मंतर से सफदरजंग अस्पताल में एडमिट कराने से 25 जुलाई को CJP की मांग पूरी होने तक एक सप्ताह में अपने चरम पर रहा आंदोलन हुआ समाप्त। अब मेट्रो, इंटरनेट सेवा के साथ सीपी में सब कुछ होगा सामान्य।
@PunjabKesariCom#DharmendraPradhan#CockroachJantaParty
How dare you threaten students for exercising their democratic rights?
Please note, you are the ones that will be held accountable when the time comes.
It was such a peaceful movement, feel so sad that it had to take a violent turn. My heart goes out to the students and their families who were hurt. Paper leak is a very serious issue, and I am glad to know n see that the kids of our country have come together for a better educational system, and their parents supported them.
I truly appreciate the stand they have taken, showing dedication, sincerity, and keenness to study hard n make their future and a greater, educated India. This andolan, this protest, is the right way to go abt it, n the students have done this peacefully. So courageous and brave. Driven and motivated towards education, this generation will make India proud.
This issue is between the students and the educational system, it should not be hijacked politically, the credit should only go to the students of our country, and I am sure the government will also give them all the support n make it a stronger educational system. It’s a win-win situation. Hoping n praying for a positive decision. God bless all of you who wanna be educated.
Education should be the next trend and fashion, and should get trendier n more fashionable yr by yr, itna k bahar se log come to India to study and India becomes an educational hub.
उग्र प्रदर्शन की स्थिति से निपटने के लिए कितने तैयार। पुलिस थाने और सभी यूनिट से दंगा रोधी उपकरण का मांगा गया डाटा।
@LtGovDelhi@DelhiPolice
https://t.co/vN7JdxwpIB
#jantrmantrpotest
सांसद और विधायक हुए बाहर। बीजेपी दिल्ली की नई टीम 2026 में मिली संगठन को पूरा समय देने वालों को तरजीह। कुछ हुए प्रमोट तो कई की हुई घर वापसी।
https://t.co/Eyc1FA9RrH
#bjp
Resignation was the simplest and easiest task to do... Could have saved all of us from such a mess!!!! Students have died... A minister's seat cant be that important!!! Definitely not more important than the young lives!
प्रधानमंत्री मोदी भारत के इतिहास के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री हैं - इतने युवा विरोधी कि एक नाकाम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी नहीं ले सकते।
152 पेपर लीक। 7.5 करोड़ छात्र पीड़ित। और सज़ा एक दोषी को भी नहीं। सजा किसे मिली? मेहनती युवाओं को।
और जब इन बच्चों ने शिक्षा के जायज़ सवाल उठाए - तो जवाब में मिली लाठी और हिरासत। लीक करने वाले अपराधी आज़ाद - और वाजिब मुद्दे उठाने वाले छात्र घसीटे जाते हैं, पीटे जाते हैं।
यह सरकार सिर्फ़ युवाओं को नाकाम नहीं कर रही - उनपर टूट पड़ी है।
जंतर मंतर की भीड़ बता रही है कि देश के युवाओं में सरकार के प्रति नाराज़गी है।इंसान के अंदर का डर निकल जाना,किसी भी निज़ाम के लिए अच्छे संकेत नहीं होते।प्रधानमंत्री जी संसद में बोल कर चले गए,लेकिन 2 km दूर चल रहे इस धरने का ज़िक्र तक नहीं किया…
सुष्मिता देव महुआ मोइत्रा के लिए कह रही हैं की उन्हें कोई पार्टी नहीं लेना चाहता है! मतलब सुष्मिता देव को लगता है वह महुआ मोइत्रा से सुपीरियर और राजनितिक रूप से अधिक सफल हैं!
बस फैक्ट्स पर अब दोनों के बारे में
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सुष्मिता देव
-पिता कांग्रेस के बड़े नेता! माँ भी एमएलए थी! उनकी बदौलत कांग्रेस में आई! दो बार लोकसभा चुनाव लड़ी! एक बार जीती एक बार हारी!
फिर कांग्रेस कमजोर होने लगी तो उसे छोड़ा और TMC गयी और वहां से दो बार ममता बनर्जी ने राज्यसभा भेजा! TMC कमजोर हुई तो उसे छोड़ा और बीजेपी में शामिल हो गयी और वहां से राज्यसभा चली गयी!
महुआ मोइत्रा
जे पी मॉर्गन में वाईस प्रेजिडेंट का पद छोड़कर राजनीति में आई! परिवार का कोई मेंबर पोलटिक्स में नहीं था! खुद से रास्ता बनाया! पहले कोंग्रस के युथ विंग से जुडी! फिर 2010 से लगातार ममता बनर्जी के साथ! एक बार एमएलए का चुनाव लड़ी और जीती! दो बार लोकसभा चुनाव लड़ी दोनों बार जीती! पार्टी कमजोर हुई और कई नेताओं ने साथ छोड़ा लेकिन वह अभी भी सत्ता विहीन पार्टी से जुडी हैं!
जब भगवान के नाम पर कथा/प्रवचन करने वाले लोग चार्टर्ड विमान से घूमेंगे,आलीशान बंगलों में रहेंगे,ब्रांडेड कपड़े पहनेंगे और पूरी बेशर्मी से अपनी इस luxury lifestyle का दिखावा भी करेंगे तो धर्म के नाम पर लालच तो बढ़ेगा ही!आज धर्म के नाम पर हर तरफ व्यापार चल रहा है..और ये कथावाचक/प्रवचन करने वाले श्रोताओं को सादा जीवन जीने के उपदेश देते हैं😀 कहां से ये आपको साधु,संत,सिद्ध,महान दिखाई देते हैं? ये सब बस बिज़नेसमैन हैं और इन्हें वैसे ही देखा जाए..पैसे,पद,प्रसिद्धि के लालच में धर्म को बेच रहे व्यापारी🙏
मीडिया की मजबूरी समझिए
जिन राज्यों की खबरें दिखाते थे
उन सभी राज्यों में भाजपा की सरकार है
अगर उत्तर प्रदेश में अखिलेश सरकार होती है
तो क्या राम मंदिर चोरी पर इतना ही सन्नाटा होता
अगर बिहार में तेजस्वी की सरकार होती तो भरत तिवारी फेक एनकांउटर पर इतना ही सन्नाटा होता
कमेंट करिए
सोचिये पिछले कुछ सालो में अनगिनत एनकाउंटर हुए जिनमें कई पर गंभीर सवाल उठे! परिजन चीक चीक कर अपनी आवाज सुनाने की कोशिश करते रहे! किसी ने नहीं सुनी! मीडिया के लिए खबर कभी नहीं बानी!
कोर्ट तक ने जब इसपर सवाल उठाया तब भी नहीं!
लेकिन बिहार में भरत तिवारी के एनकाउंटर ने सभी मीडिया को आवाज दे दिया!
बात बुरी है, जब "क्लास एंड कास्ट मैटर्स" की बात कही जाती है मीडिया अक्सर सामने आकर इस बात को सही साबित कर इस थ्योरी को और मजबूत कर जाता है!
चलिए एक और पॉजिटिव सोच यहाँ से रखते हैं की भले किसी केस से जगे,जगे तो सही और भविष्य में हर गलत एनकाउंटर पर सवाल उठेगा
जिस राज्य में बस आरोप के आधार पर बुलडोज़र जस्टिस की परम्परा शुरू की गयी, बिना ट्रायल के घर गिराए गए, उस राज्य में राम मंदिर के नाम पर इतना बड़ा शर्मनाक घोटाला हो गया तो बुलडोज़र तो दूर, केस तक दर्ज करने में हाथ कांपने लगे!
यही है समान न्याय? यही है राम राज्य की परिकल्पना ? कमजोर,वंचितों पर सरकार अपनी पूरी तरकत दिखाए और जब अपने साइड के लोग पकड़ में आ जाएं तो मौन वास में चले जाएं?
उम्मीद करते हैं हर अपराध में यही मानक उत्तर प्रदेश सरकार उठाएगी! पहले पूरी जांच! कानून का पालन होगा! तब एक्शन होगा!
राहुल गांधी ने आज जरूरी संवाद किया। जरूरी पहल की।जरूरी मुद्दा उठाया।
एजुकेशन सिस्टम पर बात की।यह पहल इसीलिए अच्छी है कि इससे राजनीतिक डिस्कोर्स बदलेगा। उनकी बात को सपोर्ट कीजिए।खारिज कीजिए, इस मुद्दे पर बात कीजिए।
और बड़ी बात की यह संवाद उनसे किया जो इसके स्टेकहोल्डर हैं
जिस तरीके से विपक्षी दलों को तोड़ा जा रहा है वह बिलकुल गलत है! संसाधन/सिस्टम/एजेंसी का दुरूपयोग है! बुली राजनीति है!
फिर कह रहा हूँ की देश के आमजन ऐसी राजनीति को पसंद नहीं करते हैं!
इससे भी दुखद तस्वीर यह है की जिस तारा मीडिया "वाह वाह तोड़ दिया तोड़ दिया" कहते हुए इस पुरे प्रोसेस को एन्जॉय कर रहा है! रत्ती भर सवाल नहीं की यह सही है गलत!
वक़्त सबसे बड़ा मानक होता है! देखते रहें!
6am, sat on the banks of the crocodile river. Noone around. Just me, listening to the rapids in the river, the hippos calling, the birds starting to chirpy and a hyena calling in the distance.
This Is Life