@SrBachchan मुझसे मत पूछो मैं क्यों गाता हूँ!जग के इस कोलाहल में, मैं अपनी ही धुन दोहराता हूँ।कोई सुनता है हँसने को, कोई सुनता है रोने को,मैं तो बस अपने भीतर के खालीपन को सहलाता हूँ।न कोई चाह प्रशंसा की, न कोई डर बदनामी का,जब दर्द हद से बढ़ता है, मैं शब्दों में बह जाता हूँ।