उत्तर प्रदेश –
91 KM लंबा गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस वे 7283 करोड़ रुपए से पिछले साल बनकर तैयार हुआ। आज हालात देख लीजिए। भास्कर रिपोर्टर को 45 KM में 74 जगह गड्ढे मिले हैं। यही गोरखपुर CM योगी आदित्यनाथ की वजह से UP का पॉवर सेंटर भी है।
@askrajeshsahu
The online Form 6 was changed illegally - as the EC's own Commissioners have recorded.
Who at the ECI ordered Tata Consultancy Services to make that change?
Who at TCS signed off on it? And were they pressured into doing it?
मोदी जी सामाजिक न्याय और बराबरी के ख़िलाफ़ हैं। उनका पूरा सिस्टम शिक्षा से नफ़रत करता है, क्योंकि वे नहीं चाहते कि छात्र सोचें या सवाल पूछें।
इसका ताज़ा सबूत देखिए।
एक गुमनाम ट्वीट में बाबासाहेब अंबेडकर की "जाति का विनाश", ज्योतिबा फुले की "गुलामगिरी" जैसी कई ज़रूरी किताबों को युवाओं के दिमाग़ में "ज़हर" भरने वाला बताया गया।
अगले ही दिन, रविवार को, PMO के निर्देश पर शिक्षा मंत्रालय ने सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों से सिलेबस की जानकारी माँगी, और पूछा कि इन कोर्स में कितने छात्र पढ़ रहे हैं।
बेहद चौंकाने वाली बात है कि युवाओं के पेपर लीक, बेरोज़गारी और सुरक्षा के सवालों पर चुप रहने वाले प्रधानमंत��री, इंटरनेट ट्रोल्स के इशारे पर फ़ौरन काम करते हैं।
Big Breaking –
चुन���व आयोग बैकफुट पर आया। SIR पूरा कर चुके राज्यों में ऑनलाइन फॉर्म–6 से माता–पिता की जानकारी देने वाला विकल्प हटाया गया। इसी विकल्प पर दोनों चुनाव आयुक्तों ने ज्ञानेश कुमार से आपत्ति जताई थी। मतलब अब यह नहीं पूछा जाएगा कि वर्ष 2003 में आपके मां–बाप वोटर थे अथवा नहीं। अगर वोटर थे तो उनकी समस्त जानकारी फार्म–6 में दर्ज करनी होती थी।
Another day, another @IndianExpress break on the EC.
Sept 23. Our investigation breaks. The EC responds the same day: its platforms are protected against "unauthorized tampering", and EROs "function as per statutory powers."
What we didn't know was this.
The very next day, Maharashtra's Chief Electoral Officer (CEO) wrote to the EC in Delhi asking for FOUR changes to ECINet, so EROs could use the discretion the law already gives them.
The same concern Election Commissioners Sukhbir Singh Sandhu and Vivek Joshi had put on record.
Stay with me for @vallabhozarkarr's cracker of a story in today's edition
(1/11)🧵
रितिका चोपड़ा मेरे लिए हीरो हैं। आज के माहौल में सरकार के खिलाफ बोलना Suicidal है। Indian Express ने सबूतों के साथ देश के सामने रखा कि कैसे वोटर लिस्ट में घोटाला करके लोकतंत्र की हत्या की जा रही है।
यमुना किनारे बेला एस्टेट में 728 लोग रहते हैं। SIR के बाद वोटर लिस्ट में सिर्फ़ एक नाम बचा - बाकी 727 नाम काट दिए गए।
ये लोग दशकों से यहाँ रह रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव और 2025 के दिल्ली चुनावों में वोट डाल चुके हैं। 2023 में इनके घर तोड़ दिए गए थे - पर ये कहीं नहीं गए, यहीं हैं।
आज मैं इनकी झुग्गी में गया और सीधे इन्हीं से सुना कि चुनाव आयोग ने इनके साथ क्या किया है।
SDM से फ़ोन पर मैंने यही कहा - मकान होने या न होने का वोट के अधिकार से कोई रिश्ता नहीं है। ख़ुद CEC ज्ञानेश कुमार कह चुके हैं कि "हाउस नंबर 0" बेघरों के लिए है। फिर भी 727 लोगों का नाम काट दिया गया।
यह SIR नहीं - यह वोट चोरी का तरीक़ा है। जिनके पास पहले ही सबसे कम है, उनसे उनकी इकलौती ताक़त छीनी जा रही है।
ज्ञानेश कुमार तो जाएँगे। पर जिस सिस्टम ने उनसे यह करवाया, उसका हिसाब भी होगा।
#VoteChori
दिल्ली की BJP सरकार के एक मंत्री वीडियो में एक नौजवान को थप्पड़ मारते दिख रहे हैं।
उसका गुनाह? वो वीडियो बना रहा था।
मंत्री के सामने सड़क खोदकर दिखाई जा रही थी, और उसके हाथ में कैमरा था।
ये उस सत्ता का चेहरा है जिसे अब वोटर से डर लगना बंद हो गया है।
सड़क पर सवाल पूछो - थप्पड़।
पेपर लीक पर सवाल पूछो - लाठी।
संसद में सवाल पूछो - माइक बंद।
ये लोग ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि इन्हें अब ये डर ही नहीं कि चुनाव इन्हें हटा सकता है। वोट चोरी यही ख़रीदती है - सिर्फ़ नतीजा नहीं, उसके बाद आने वाला अहंकार भी।
जो सरकार जीत को पक���का मान लेती है, उसे आपकी रज़ामंदी नहीं चाहिए - आपकी ख़ामोशी और अंधभक्ति चाहिए।
1.जैसाकि यह विदित है कि पिछले कुछ दिनों से देश के विभिन्न भागो में भारी वर्षा व आँधी, तूफान आदि के कारण जनता काफी मुश्किल दौर से गुजर रही है। ऐसे कुदरती विकट हालात में सम्बन्धित सभी राज्य सरकारों को प्रभावित लोगों की हर स्तर पर पूरी-पूरी मदद करनी चाहिये। बी.एस.पी. की यह मांग है।
2.इसके साथ ही महाराष्ट्र राज्य के काफी इलाको में ��ूखे की मार झेल रहें लोगों व खासकर किसानों के प्रति राज्य सरकार को केवल औपचारिकता नहीं बल्कि पीडि़तों की जमीनी स्तर पर सही से मदद करके किसानों को फौरी राहत देने का प्रयास करना चाहिये।
3.इसी परिपेक्ष्य में यहाँ मैं यह भी कहना चाहूँगी कि देश में बी.एस.पी. संगठन को तैयार करने व सर्वसमाज में पार्टी के जनाधार को बढ़ाने के लिए अब पार्टी संगठन को तीन ��ेक्टरों में बांट दिया गया है।
*जिसके तहत सेक्टर नं.-1 में 10 राज्य आते है। जिनको बी.एस.पी. राज्यसभा सांसद श्री रामजी गौतम व श्री सुरेश राव ये दोनों केन्द्रीय सेक्टर प्रभारी मिलकर यहाँ पार्टी के सभी कार्य देख रहें हैं।
*सेक्टर नं.-2 में 9 राज्य आते है। जिनको पार्टी के पूर्व राज्यसभा सांसद श्री राजाराम व पूर्व विधायक श्री अतरसिंह राव ये दोनों केन्द्रीय सेक्टर प्रभारी मिलकर यहाँ पार्टी के सभी कार���य देख रहें हैं।
*सेक्टर नं.-3 में उत्तर प्रदेश व उत्तराखण्ड प्रदेश आते है जिनको लखनऊ पार्टी केन्द्रीय कैम्प कार्यालय 9 माॅल एवेन्यू द्वारा सीधा देखा जा रहा है।
4.ऐसे में लोगों के कुदरती मार पड़ने से खासकर सेक्टर नं.-1 व सेक्टर नं.-2 के इन चारों केन्द्रीय सेक्टर प्रभारियों से यह अपील की जाती है कि वे अपने-अपने सेक्टर के अन्तर्गत आने वाले सभी राज्यों में,
*जहाँ-जहाँ भारी वर्षा व तूफान आदि के कारण ज���रदस्त जानी, माली, तबाई मची हुई है, वहाँ अपनी पार्टी के लोग भी अपनी सामर्थ के हिसाब से उनकी मदद जरुर करें।
*लेकिन इसके लिए इनको कोई भी अलग से ��न इकट्ठा नहीं करना है। ताकि इसकी आड़ में कोई भी नाजायज फायदा ना उठा सके।
5.साथ ही जरुरत पड़ने पर ज्यादा प्रभावित प्रदेशों में, मैं बी.एस.पी. के राष्ट्रीय प्रभारी श्री ईशान आनन्द को भी भेज सकती हूँ। और इस मामले में खासकर सेक्टर नं.-3 के दोनों राज्यों में मेरी खुद भी पैनी नजर है। जहाँ मैं खुद भी ऐसे क्षेत्रों का दौरा कर सकती हूँ।
6.अन्त में मेरा केन्द्र सरकार से भी अनुरोध है कि वे देश के ज्यादा प्रभ��वित हो रहे राज्यों में, वहाँ कि सरकारों की समय से पूरी-पूरी मदद जरुर करें, जो यह उचित होगा।
Assam Police has detained @AshutoshRanka and CJP team and taking them to an unknown location.
Ashu and co were going to have a small volunteers meet up in Assam.
First, Gyanesh Kumar - then a serving IAS officer - was used to recruit for the BJP.
Then Modi and Shah made him the umpire and put him in charge of match-fixing India's elections.
आज पता चला की ये संगीतज्ञ कौन है, कैसा दिखता है... ये दोनों पंखों के आपस में रगड़ने से पैदा होने वाली ध्वनि है जो हमें बरसात के मौसम में रात में सुनाई देती है।
चार्जिंग फ्री है, पर खतरे की कीमत भारी पड़ सकती है!
सफर के दौरान फोन की बैटरी कम हो जाए तो सार्वजनिक USB चार्जिंग पोर्ट किसी राहत से कम नहीं लगता। लेकिन यही सुविधा Juice Jacking के जरिए आपकी निजी जानकारी के लिए खतरा बन सकती है।
इसलिए चार्जिंग के साथ सावधानी भी जरूरी है।
अपना चार्जर या पावर बैंक साथ रखें। अनजान USB पोर्ट से बचें और डेटा ट्रांसफर की अनुमति न दें।
याद रखें, फोन की बैटरी दोबारा चार्ज हो सकती है, लेकिन चोर�� हुआ डेटा वापस मिलना मुश्किल है।
चार्जिंग में सुविधा चुनें, सुरक्षा से समझौता नहीं।
#UPPolice #CyberAwareness #JuiceJacking #CyberSafety
Democracy can stand only when people have complete confidence in constitutional institutions such as the Election Commission. National media reports that two Election Commissioners raised objections on several occasions to decisions, electoral rolls and the management of ECINet have led to serious questions and doubts among the public.
Rather than an exchange of allegations, the public needs clarity on what objections were recorded, what action was taken on them, and how transparently the system functioned, be it for adding, deleting or restoring names on electoral rolls. Steps are needed to give people confidence on these matters.
Ultimately, we must strengthen public trust in the electoral process, protect every citizen’s right to vote, and strengthen the systems that allow people to exercise that right without fear.
In a democracy, transparency should not only prevail but should also appear to have prevailed. The very bill (Chief Election Commissioner and other Election Commissioners (Appointment, Conditions of Service and Term of Office) Act, 2023 ) which had our support then, should be revisited now in the current background. The Central government (Ruling Party) should come forward, set the normal in place dispelling this fear. An amendment to the bill be brought forward where the election commissioner is appointed by the three member committee which has Leader of Opposition (LoP), Chief Justice of India (CJI) and the Prime Minister as members once again. Student appointing the examiner is always prone to allegations even though the examiner is thoroughly honest and it is always better replacing the process with someone neutral. This move would definitely regain the esteem and the confidence in the Election Commission
This is especially important because, during the SIR process in Andhra Pradesh, the party in power misused its authority. On many occasions, our appeals went unheard. In the local body election process too, our objections as an Opposition party to the manner in which divisions were redrawn were brushed aside. Such actions undoubtedly weaken public confidence in the electoral process. Transparency and accountability are the true measures of how any institution functions in a democracy, and safeguarding them is that institution’s primary duty.
@ECISVEEP