पूरी दुनिया के emission में Nepal का हिस्सा है 0.1%
एक नेपाली साल भर में करीब आधा ton carbon emit करता है। एक अमेरिकी 14 ton, खाड़ी देशों में 20 ton से ऊपर।
यानी जो लोग इस बाढ़ में मरे, उन्होंने लगभग कुछ नहीं जलाया था।
और जिन्होंने सबसे ज़्यादा जलाया, वे पानी से हज़ारों मील दूर आराम से बैठे हैं।
इसका एक नाम है Climate injustice।
और यह अन्याय यहीं नहीं रुकता।
जानवरों का carbon footprint कितना है? बहुत कम।
पेड़ों का? शून्य से भी कम, वे तो carbon सोखते हैं।
पर mass extinction में सबसे पहले कौन मिटेगा?
वही जिसने जितना कम जलाया, वह उतना ज़्यादा भुगतेगा।
यही इस संकट की सबसे क्रूर गणित है।
इसका एक नाम है Climate injustice।
~आचार्य प्रशांत
जेल नहीं जाना पड़ा
मस्त जीवन जी रहा बिना संघर्ष के
सत्ता की मलाई खाने को मिल रही
बेशर्मी से भाजपा की गोद में बैठ गया
@raghav_chadha तुम्हारी ये कायरता देश हमेशा याद रखेगा
अगर तुमको चंपत राय और गोविंद गिरि से ज़्यादा गुस्सा कुनाल कामरा और पप्पू यादव पर आता है। तो आप सनातनी हिंदू नहीं, बल्कि एक दो कौड़ी के दोगले व्यक्ति है, और कुछ नहीं।
मनमोहन सिंह जी 1991 से 1996 का वित्त मंत्री का कार्यकाल छोड़ दे और 2004 से 2014 तक देखिए...?
– 100 दिन के रोजगार की गारंटी मनरेगा
– RTI सूचना के तहत् अधिकार
– ₹72 हजार करोड़ किसानों कर्जा माफ
– फूड सिक्योरिटी बिल
– शिक्षा का अधिकार
– सीधे खातों में पैसे
मनमोहन सिंह जी कभी कभी कुर्सी की चिंता नहीं की, जब अमरीका से न्यूक्लियर डील हो रही थी..!
तब गठबंधन की सरकार में लेफ्ट ने न्यूक्लियर डील के खिलाफ वोटिंग की लेकिन मनमोहन सिंह जी पीछे नहीं हटे....!
मनमोहन सिंह जी 10 साल प्राइम मिनिस्टर 5 साल वित्त मंत्री, आरबीआई गवर्नर और प्लानिंग कमीशन में रहे...!
में मनमोहन सिंह जी को प्योर पॉलिटीशियन और एक मंझा हुआ नेता मानता हु – आदेश रावल.....।
जब भी परिवारवाद की बात हो तो मनमोहन सिंह जी का जरूर जिक्र करना – राजदीप सरदेसाई
मनमोहन सिंह जी के 3 बेटियां है, लेकिन उन्होंने हमेशा तीनों बेटियों को राजनीति से दूर रखा...
तीनों बेटियों ने किताबें लिखी है, एक्टिविज्म किया है, इतिहास की किताबें लिखी, लेकिन राजनीति से दूर रखा
मनमोहन सिंह एक सभ्य नेता थे, उन्होंने हमेशा सभ्यता से राजनीति की, उन्होंने कभी अपने परिवार को आगे नहीं किया
असली मायनों में मनमोहन सिंह जी असली कर्म योगी थे, या यू कहूं असली कर्म योद्धा थे ।
– वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई
राघव चड्ढा - स्टूडेंट के इमोशन का प्रयोग मत करो, क्योंकि -
>स्टूडेंट प्रोटेस्ट से पहले राघव चड्ढा ने धर्मेंद्र प्रधान जी से प्रेस कॉन्फ्रेंस करवा कर सफाई दिलवा दी थी,
>धर्मेंद्र प्रधान जी का इस्तीफा भी दिलवा दिया था,
>धर्मद्र प्रधान से 21 छात्रों की फैमिली से मिलकर उनसे माफी भी मांगी थी।
>छात्रों की फैमिली को मुआवजा भी दिलवा दिया था तुमने।
सुधर जाओ दलबदलुओं, देश को खोखला कर दिया तुम जैसे गद्दारों ने।
स्टूडेंट के इमोशन के साथ तो तुमने खेला है, Gen z को मूर्ख तुमने बनाया है।
28 दिन का रिचार्ज 30 दिन का तुम ही करवा रहे थे, और खुद ही पोर्ट हो गए।
गद्दार
अनुपम खैर सहित कई सेलेब्रिटीज़ ने इंडिया अगेंस्ट करप्सन के समय मनमोहन सिंह के ख़िलाफ़ कई ट्वीट किए थे और बयान दिए थे!!
अब जब कोयला घोटाले में डॉ. मनमोहन सिंह को क्लीन चिट मिली तो क्या इन लोगों ने अपनी ग़लती की ट्वीट करके माफ़ी मांगी?
इनमें से एक भी व्यक्ति ने ना ट्विट किया और ना ही कोई माफ़ी मांगी।
डॉ. मनमोहन सिंह ने सही कहा था कि
“इतिहास उनके प्रति ज़्यादा उदार रहेगा।”
❣️❣️
नफ़रत की राजनीति, भाजपा की पुरानी रणनीति।
बताया जा रहा है कि यह वीडियो गाज़ियाबाद का है, जिसमें सत्यम पंडित छोटे बच्चों के साथ दुर्व्यवहार करता दिखाई दे रहा है।
अगर यह वीडियो सही है, तो अब भाजपा सरकार और पुलिस दोनों सवालों के घेरे में हैं। क्या इस मामले में भी तुरंत FIR होगी, या फिर कानून जाति, धर्म और राजनीतिक पहचान देखकर चलेगा?
देशभर के आंदोलनकारियों के सूचनार्थ!
भाजपा और उनके संगी-साथियों के दुर्व्यवहार, दुर्वचनों और हिंसा को सब देख लें। इनका दुस्साहस देखिए कि अभी युवाओं को वचन दिए हुए चंद घंटे भी नहीं हुए हैं और ये भाजपाई अपने इतिहास को दोहराते हुए फिर से धोखा दे रहे हैं। भाजपा के ये संस्कारी नेताजी अपने शीर्ष नेतृत्व के दिये गये आश्वासन की सरेआम धज्जियाँ उड़ा रहे हैं और वीडियो भी बना रहे हैं। अब क्या ये भी डबल इंजन की टकराहट के कारण हो रहा है।
तुरंत गिरफ़्तारी हो!
भाजपाई तो अपने वचन के भी सगे नहीं हैं।
भरोसे का विलोम भाजपा!