सबसे ज़्यादा गाली खाने वाले प्रधानमंत्री का रिकॉर्ड भी महामानव के नाम हो गया
पिछले पंद्रह दिन के अंदर कम से कम सौ करोड़ गाली पड़ी होगी
ऐसा काम नहीं करना चाहिए की जनता गाली देने पर मजबूर हो जाए 😆
सांप से वफादारी की कुत्ते से गद्दारी की और भाजपा से यारी की उम्मीद कभी मत रखना।
कल रात में मोदी जी ने आकर फिर खुदको नेहरू जैसा विशाल हृदय दिखाने की नाकाम कोशिश की उन्होंने कहा-
"जंतर मंतर प्रोटेस्ट में हमको गाली देने वालों को हम माफ कर रहे हैं सारे केस वापस ले रहे हैं आप लोग भी माफ कर दीजिए।"
अरे मोदी जी जब प्रोटेस्ट खत्म करते समय ये बात हो गई थी कि युवाओं पर कोई केस नहीं होगा तो अपने क्यों केस किए।
क्यों भाजपा IT सेल ने बेटियों का चरित्र हनन किया क्यों उनको गालियां दी क्यों तमाम युवा गिरफ्तार किए गए क्यों उनके अकाउंट उड़ाए गए।
यानी अपने अपना पूरा काम कर लिया अब आराम खुदको भगवान साबित कर रहे हो GEN Z मूर्ख नहीं है।
तुम छात्रों पर पैलेट गन चलाकर उनकी आंख फोड़ दो
छात्रों पर AK 47 चलाओ
लाठी चलाकर उनके पैर तोड़ दो
और तुम चाहते हो छात्र तुम्हे गाली न देकर तुम्हारी आरती उतारें
मैं मोदी Sir से सहमत हूँ गाली-गलौज नहीं करनी चाहिए।
लेकिन ये ज्ञान प्राप्त करने में आपको बहुत समय लग गया प्रभु, आपके लोगों ने तो किसी की माँ, बहन, बेटी किसी को नहीं बख्शा सबको भद्दी भद्दी गालियाँ दी।
अखिलेश यादव का नाम अगर
अखिलेश मिश्रा या अखिलेश तिवारी होता तो
देश का मीडिया और अपर कास्ट के लोग उन्हें देश का सबसे बड़ा नेता मान लेते,
क्योंकि वो बहुजन समाज से हैँ
इसलिए सबसे ज्यादा प्रोग्रेसिव सोच का नेता होने के बाद भी कुछ लोग उनकी जाति की वजह से उनकी आलोचना करते हैँ,
जिस जिस को लगता है कि पप्पू यादव ने आज भगवा का अपमान किया है उन लोगो को संसद भवन में सामूहिक आत्मदाह करके करारा जवाब देना चाहिए।
बताओ सनातन का अपमान हो रहा है आप लोग जीवित बैठे हो अरे कोई अच्छी नदी देखकर डूबकर मर जाओ।🤡
ठाकुर ब्राह्मण बनिया के बच्चे 247 नंबर लाकर पुलिस बन रहे है
अहीर कुर्मी मौर्य पाल प्रजापति निषाद के बच्चों को पुलिस बनने के लिए 251 नंबर लाना पड़ रहा है
ये सब बीजेपी सरकार द्वारा EWS आरक्षण देने के बाद से हो रहा है।
बीजेपी ने पिछड़े दलित छात्रों को धोखा दिया है।
दस हज़ार बीघा के ज़मींदार और सांसद पप्पू जादो
एक बुजुर्ग दलित सांसद अवधेश प्रसाद के चरणों में झुक रहे हैँ,
ये संस्कार सिर्फ सोशलिस्टों में ही हो सकते हैँ,
जय हो,
भगवान को चूना लगाने के बाद अपने पितृ पुरुष को भी चूना लगा दिया इन लोगों ने,
कांस्य प्रतिमा की मूर्ति लगाई,
अब पता चल रहा है कि कंक्रीट प्रतिमा को कांस्य प्रतिमा के रंग में रंग दिया था,
अटल बिहारी वाजपेयी जी की आत्मा माफ ना करेगी,
RSS द्वारा देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों पर क़ब्ज़े की कहानी : भाग 2
आजकल शिक्षा जगत पर RSS के बढ़ते प्रभाव और विश्वविद्यालयों के भगवाकरण को लेकर देशभर में गंभीर चर्चा चल रही है। ऐसे समय में मैं आपके लिए कुछ ऐसे सबूत साझा करने की यह श्रृंखला लेकर आया हूँ, जिन्हें हमने पिछले कई वर्षों से लगातार आपके सामने रखा था, ताकि समय रहते आपको आगाह किया जा सके। आज वही सवाल राष्ट्रीय बहस का विषय बन चुके हैं।
यह वीडियो भी कुछ महीने पुराना है, जिसे मैंने अपने सोशल मीडिया संग्रहालय से आपके लिए निकाला है। इस वीडियो को स्वतंत्र पत्रकार @harshdelhise ने बनाया था। आज इसे दोबारा साझा करने का उद्देश्य केवल इतना है कि लोग देखें—जो बातें तब कही जा रही थीं, वे आज किस तरह वास्तविकता के रूप में हमारे सामने खड़ी हैं।
दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में "युवा कुंभ" जैसे आयोजनों के नाम पर RSS से जुड़े कार्यक्रम खुलेआम आयोजित किए जा रहे थे। कई जगह कॉलेज प्रशासन अलग-अलग नामों से अनुमति देकर इन कार्यक्रमों का हिस्सा बनता दिखाई दिया। ऐसे आयोजनों को लेकर छात्र संगठनों और शिक्षकों के एक वर्ग ने विश्वविद्यालय की संस्थागत निष्पक्षता पर सवाल उठाए और विरोध भी दर्ज कराया।
विश्वविद्यालय विचार, बहस, शोध और आलोचनात्मक चिंतन के केंद्र होने चाहिए। लेकिन जब सार्वजनिक शैक्षणिक संस्थानों का उपयोग किसी एक वैचारिक एजेंडे के प्रचार के लिए होने लगे, तो यह केवल एक कार्यक्रम का सवाल नहीं रह जाता, बल्कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और लोकतांत्रिक चरित्र का प्रश्न बन जाता है।
छात्र विरोध में उतर चुके हैं, जनता सवाल पूछ रही है और कैंपस का माहौल बिगाड़ने की यह कोशिश अब सबके सामने है। सरकारी संस्थानों को किसी भी वैचारिक या राजनीतिक प्रभाव का माध्यम बनाने की प्रवृत्ति पर गंभीर बहस और जवाबदेही दोनों आवश्यक हैं।
यह श्रृंखला आगे भी जारी रहेगी। दस्तावेज़ों, वीडियो और तथ्यों के साथ हम उन घटनाओं को सामने लाते रहेंगे, जिन्हें उस समय नज़रअंदाज़ किया गया, लेकिन जिनके परिणाम आज पूरे देश के सामने दिखाई दे रहे हैं।
आज योगी आदित्यनाथ की गाजीपुर रैली में पेपर लीक माफिया बेदीराम भी मंच पर था
यही कारण है यूपी में 20 पेपर लीक होने के बावजूद किसी पर कार्यवाही नहीं हुई क्यूँकि सब बीजेपी से जुड़े है।