आशुतोष रंका ने सारे प्रदर्शनकारियों से अपील की - “किसी भी मीडिया कर्मी के साथ किसी भी तरह की बदतमीज़ी ना की जाए। सवालों से डरो मत, अगर कोई उल्टे सीधे सवाल करें तो आगे बढ़ जाइए गोदी मीडिया से उलझिये मत।”
🚨 लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध भी अब जुर्म है?
आयशा खान को मुंबई पुलिस ने शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन के दौरान हिरासत में ले लिया। सवाल यह है कि अपनी बात रखना कब से अपराध बन गया?
अगर आवाज़ उठाने वालों को हिरासत में लिया जाएगा, तो लोकतंत्र की रक्षा कौन करेगा?