कांग्रेस सरकार चाहे जैसी भी थी लेकिन तानाशाह नहीं थी।
महंगाई बेरोजगारी पर कंट्रोल था।
हमारे देश की मीडिया कांग्रेस की छवि खराब की है,उसमें मेरा भी योगदान कम नहीं था।
- बाबा रामदेव
📍 बरेली, उत्तर प्रदेश
बरेली में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मारूफ रज़ा खान की गिरफ्तारी का मामला चर्चा में है। बताया जा रहा है कि उन्होंने अपने बयान में तौहीद, यानी अल्लाह की एकता, के बारे में बात करते हुए सूरह अल-इख़लास की आयतों का हवाला दिया था।
उन्होंने कहा कि ज़मीन, आसमान और इस पूरी कायनात को अल्लाह ने बनाया है और वही इसका मालिक है।
इसके बाद बरेली पुलिस ने धार्मिक भावनाए�� आहत करने के आरोप में उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
अब यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग इस कार्रवाई को लेकर अपनी-अपनी राय रख रहे हैं।
भैंस के तबेले में स्कूल चलाएंगे.. सच छिपाएंगे?
राजस्थान में डबल इंजन सरकार का शिक्षा मॉडल ऐसा है 👇
3768 स्कूलों का इमारत जर्जर, 83783 कक्षाएं जर्जर, 16765 स्कूलों की शौचालय जर्जर है,,
@pratimamishra04 जी आपकी पत्रकारिता को ��लाम, देश के युवाओ के साथ खड़ा होने के लिए धन्यवाद 🙏
साहिल की FIR दर्ज हुई। यह न्याय की तरफ़ पहला क़दम है।
पर सोचिए - एक FIR लिखने की इजाज़त तक गृह मंत्रालय से आनी पड़ी। अब समझ आया कि न्याय पर लगाम किसने लगा रखी है।
📍उधम सिंह नगर, उत्तराखंड
हिंदुत्व संगठन के सदस्यों ने मुस्लिम युवक रिसालत को निशाना बनाया,उसने गुलारभोज में एक कार बुक की थी और दूसरे समुदाय की एक महिला को साथ लिया था। मुस्लिम होने की पहचान होने पर, हिंदुत्व संगठन के सदस्यों ने उसकी बेरहमी से पिटाई की
नगर निगम पार्षद मुसलमानों को कह रहा है तुम मुसलमान भाजपा को वोट नहीं देते हो तो।
भारतीय संविधान में हर नागरिक अपने वोट देने के लिए आज़ाद है, लेकिन ये नगर निगम के पार्षद मुसलमानों को वोट न देने के कारण प्रताड़ित कर रहे हैं।
और जिन योजना को ये गिनवा रहे हैं वो इनके आका मोदी जी ने शुरू नहीं की ये योजनाएं पहले से प्रचलन में है।
और ना ही भाजपा अपने जेब से योजनाओं के लिए पैसा देती है देश का पैसा है और देश के हर नागरिक का अधिकार है।
बिहार के गोपालगंज में,
मस्जिद के इमाम मोहम्मद शफीक की चाकू म!रकर हत्या।
उचकागांव थाना क्षेत्र के अरना बाजार स्थित मस्जिद में रात के वक्त वारदात को अंजाम दिए जाने का आरोप है।
सुबह फजर की अज़ान नहीं हुई तो ग्रामीण मस्जिद पहुंचे, जहां इमाम का खून से लथपथ शव मिला।
" क्या माडर्न ज़माना था "
मेरे नबी सल्लल्ल��हु अ़लैहि वसल्लम के जमाने में औरतें कारोबार भी करती थीं
कारोबार करने के लिए गुलाम व नौकर रखती थीं
हर क़िस्म के सवाल भी करती थीं
सदक़ा भी देती थीं और मर्द को क़व्वाम (निगहबान) भी मानतीं थीं
पसंद की शादी भी करती थीं
यहां तक कि खुद निकाह का पैगाम भी भेजती थीं
घर के काम के लिए नौकर भी रखती थीं
ज़रा सा मसला होता तो फौरन नबी-ए-अकरम सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम से शिकायत करने पहुंच जाती थीं
वह दौर जिस में तलाक बोझ नहीं बनती थी
विधवा होना जुर्म नहीं था
कौन क���ता है इस्लाम माडर्न दीन नहीं है ?
ज़रा हमारा शानदार अतीत तो देखिए
ख़ुदा की क़सम ज़ुबान दराजी भूल जाओगे
CJP वालो हमें गर्व है तुम पर ,
इतनी जल्दी तो हमारे मुस्लिम नेता और मुस्लिम लीडर भी मुस्लिम भाई की मौत के इंसाफ की आवाज़ नहीं उठाते जितना जल्दी आपने उठाया है ,
AIMIM , कांग्रेस , TMC , SP , RJD , शिवसेना उद्धव ठाकरे सभी पार्टियों के ने��ाओ को इस मुद्दे को समझकर अब्दुल के अब्बू के लिये इंसाफ की लड़ाई लड़नी चाहिए ,
शुक्रिया @AshutoshRanka , @abhijeet_dipke आबाद रहो ,