@AdvBharatBafna@news24tvchannel sir कभी कुछ पुरुषों को भी देखा करिए ,जो बिना गाली दिए बात ही नही कर सकते है उनके हर sentence me गाली जरूर होती h, tab pata नही संस्कार खतरे क्यों नही आते !?
विश्वप्रसिद्ध फुटबॉल खिलाड़ी 27 वर्षीय सादिओ माने की कमाई भारतीय रुपयों में गिनें तो प्रति सप्ताह 2 करोड़ 40 लाख रुपये है, यानी 10 करोड़ रूपये महिना I
इन्हें कई जगह पर टूटे हुए फोन के साथ देखा गया
एक इंटरव्यू में जब उनसे उसके बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा मैं उसे ठीक करवा लूंगा, जब उनसे पूछा गया कि आप नया क्यों नही ले लेते, तब उन्होंने कहा मैं ऐसे हजार मोबाइल खरीद सकता हूँ, 10 फरारी , 2 जेट प्लेन , डायमंड घड़ियां , बंगले और न जाने क्या क्या खरीद सकता हूँ । लेकिन मुझे ये सब क्यों चाहिए ?
मैंने गरीबी देखी है, पैसे की तंगी की वजह से मैं पढ़ नही पाया इसीलिए मैंने स्कूल्स बनवाये हैं ताकि लोग पढ़ पाए,मेरे पास जूते नही थे, मैं बिना जूतों के खेलता था,अच्छे कपड़े नही थे, खाने को नही था । मैं भूखे पेट प्रैक्टिस करने को मजबूर होता था I मेरे पास इतने पैसे नहीं थे कि मै स्टेडियम जा सकूं तो मैने स्टेडियम बनवाए ताकि कोई भी गरीब बच्चा बिना पैसे के भी स्टेडियम में प्रैक्टिस कर सके।
आज मुझे इतना कुछ मिला है तो मैं उसका दिखावा करने के बजाए मैं उसे अपने लोगों के साथ बांटना चाहता हूं ।
सादिओ माने सेनेगल (पश्चिम अफ्रीका ) से हैं और अपने देश के लोगों के लिए काफी कुछ कर रहे हैं...! उन्होंने गरीबो के लिए कई स्कूल बनवाये, गरीब बच्चों को खेल कूद के लिए स्टेडियम बनवाते है उन्हें खेल सामग्री उपलब्ध करवाते है, जूते कपडे दिलवाते है अच्छा पौष्टिक खाना उपलब्ध करवाते है ताकि कोई भी गरीब बच्चा पैसों के अभाव में खेलना बंद न करे I और खुद टूटे फ़ोन का इस्तेमाल करते हैं I
ये एक सीख है, एक पाठ है, जो उन्होंने दुनिया को पढ़ाया..! एक हम हैं फालतू में दिखावे और ऐंठ में जी रहे हैं..!!
स्कूलों में टीचर से कहा जाता है कि आप बच्चों पर छड़ी नहीं चला सकते। उन्हीं बच्चों पर पुलिस लाठी चला रही थी। शहर देख रहा था। बच्चों के माँ बाप और उनके व्हाट्स एप अंकिल चुपचाप देख रहे थे। पेपर लीक करने वाले आज पार्टी मना रहे होंगे। मनाओ तुम लोग। अभी धर्म का मुद्दा खोजा जा रहा होगा ताकी गोदी ऐंकर धर्म रक्षक बन कर चिल्लाने आ जाएँ। जनता को पता है गोदी मालिक, गोदी ऐंकर, गोदी संपादक अपने पेशे के धर्म की रक्षा कभी कर ही नहीं सकते।अख़बारों की हेडलाइन कैसे मैनेज होगी? लिख कर दे दिया गया है या ख़ुद से लिख लेंगे?