शीर्क अल्लाह को सबसे ज़्यादा तकलीफ़ देने वाला गुनाह है
शीर्क करने वाला अल्लाह को गाली देता है
कयामत के दिन मुशरिक को उसके नेक आमाल का बदला देने से अल्लाह इनकार कर देगा
कयामत के दिन अल्लाह के बारगाह में फरिश्ते, अंबिया, औलिया और सालेहीन मुशरकीन के खिलाफ़ गवाही देंगे जो दुनियां में उन्हें अल्लाह के साथ शरीक ठहराते थी
हालते शीर्क में फौत होने वाले मुशरिकों के लिए दुआ ऐ मगफिरत करना मना है
अल्हम्दुलिल्लाह हाफिज फैजान साहब मिल गए हैं परिवार के पास पहुंच गए हैं ,सभी साथियों का शुक्रिया और हम रेलवे पुलिस @RailwaySeva@GorakhpurGrp का भी शुक्रिया अदा करते हैं कि जिन्होंने बहुत ईमानदारी और मेहनत के साथ काम किया
शाहजहां ने तो अपनी कब्र पर सिर्फ़ एक ही मकबरा बनाया और ये अकेला मकबरा चक्रवर्ती सम्राट अशोक महान के द्वारा महात्मा गौतम बुद्ध की अस्थियों पर बनाए 84000 स्तूपों पर भारी पड़ गया।
सम्राट अशोक महान ने देश के लिए चीनी सम्राटों की तरह चीन की महान दीवार जैसा कोई सुरक्षा कवच तैयार नहीं किया, वे 84000 स्तूपों के निर्माण में लगे रहे। वे सिर्फ एक धर्म के प्रचार प्रसार में लगे रहे, देश विदेश में अलग अलग दूत भेजकर बौद्ध धर्म स्वीकारने की याचना करते रहे।
उन्होंने कोई नालन्दा, तक्षशिला भी नहीं बनाई। ऐसा करना तो बहुत दूर की बात है उन्होंने तो अपने खुद के उत्तराधिकारियों के प्रशिक्षण पर भी ध्यान नहीं दिया।
मसलन एक बहादुरी सिपाही पुष्य मित्र शुंग ने अयोग्य मौर्य राजा बृहद्रथ की हत्या करके सत्ता हासिल की ताकि देश की विदेशी हमलावरों से रक्षा की जा सके।
यहां जल भूनकर मरे जा रहे हैं। 8 अजूबों में यूनिवर्सिटी तो एक भी नहीं है। 8 के 8 दूसरे स्मारक है तो यहां यूनिवर्सिटी का एंगल घुसाकर खुद को ऐसे ही cool दिखाने में लगे है।
इनकी अंतरात्मा कुबूल करने को तैयार नहीं है कि ऐसा खूबसूरत इश्क का प्रतिनिधित्व करने वाले स्मारक के साथ किसी शाहजहां और मुमताज का नाम क्यों जुड़ा😋
फ़ैज़ान रज़ा 25/05/2026 को मऊ से पूर्वांचल एक्सप्रेस(15049) में सफर कर रहे थे। ट्रेन में विवाद के बाद संपर्क नहीं हो पा रहा है। आख़िरी जानकारी बलेशरा रोड–सलेमपुर के बीच की है।
हम @upgrphq@RailwaySeva@AshwiniVaishnaw जिसे अनुरोध करते हैं कि तत्काल पीड़ित की मदद की जाए
ऐ अराफ़ात के दिन के रब...!
ऐ मुज़दलिफ़ा के रब...!
अपने मैदानों के दरवाज़े हमारे लिए भी खोल दे, जो गुनाहों के बोझ तले दबे हुए हैं...
ऐ काबा के रब... आप उन लोगों की माफ़ी और माफ़ी का ऐलान ज़रूर करेंगे जो आज अराफ़ात के मैदान में पहुँचने के लिए खुशकिस्मत हैं, लेकिन आपके ये
महेश दास उर्फ बीरबल, राजा बिक्रमजीत, जगन्नाथ मिश्र, कविंद्राचार्य सरस्वती, और तानसेन पांडेय बामन थे, टोडरमल, राजा भवानीदास, राजा हरबंस, राजा मुकुंदराम, राजा रघुनाथ कायस्थ थे, राजा जय सिंह, मानसिंह, भगवान दास, जसवंत सिंह, छत्रसाल, उदय सिंह राजपूत, शांतिदास झवेरी, विरजी वोरा, लाला जगत राय बनिया और बनारसीदास जैन। अपने जैसे हज़ारों लोगों के साथ ये सब मुग़लों की लूट, शोषण और जनता की ऐसी-तैसी करने में बराबर के शरीक हैं। इसलिए जब भी कोई बाबर या औरंगज़ेब की संतान होने का ताना दे तो कृपया उसके पितामह के कुकर्म और नीचताएं अवश्य याद दिला दें। मन को शांति सी मिलेगी।
@murtazazaigham1 की सलाह😂