भूगोल कभी भी मेरा
पसंदीदा विषय नहीं रहा,
किंतु पृथ्वी का
अपने अक्ष पर घूमना
मुझे हमेशा से ही
आकर्षित करता रहा है ।
पृथ्वी का घूर्णन मुझे
आश्वासन देता है कि
जो आज अशुभ है
वहीं कल शुभ होगा।।
#अहर्निश
मुल्क में रौशनी बनी रहे, हम रौशन-ख़याल बने रहें। यह पर्व आप सभी के जीवन में उजास और ख़ुशी लाए और बरक़रार रखे। रंगों पर किसी की रंगदारी न रहे। उत्सव जीवित रहें, उत्सवधर्मिता बनी रहे।
हम सभी को शुभ दीपावली।
प्रिय दिवाली
अब मैं बड़ा हो गया हु। मुझे फुलझड़ी, फटाके, अनार अब इतने पसंद नहीं आते।
मिठाई का इंतजार भी ख़त्म हो गया है।
मोहल्ले के कोतूहल से भी ऊब गया हु।
अब मैं बड़ा हो गया हु
अब बड़े जीते रहो की जगह खुश रहो कहते है
वो जान गए जीने से जरुरी है खुश रहना।
#Diwali2025
तुमको जहाँ होना था
तुम वहाँ हो या न हो
मगर जहाँ तुम्हारी ज़रूरत होगी
नियति तुमको पहुँचा देगी
नियति लेख दूसरे सिरे से लिखती है
हम दूसरे सिरे से पढ़ते रहते हैं।
'गिरते फूलों का गणित'
मछलियाँ तालाब के बाहर आकर धूप नहीं सेंक सकतीं
स्त्रियाँ मंगलसूत्र से गला फाँदकर आत्महत्या नहीं कर सकतीं।
तुम घर से नहीं निकल सकती मैं तुम्हारा चबूतरा चढ़ नहीं सकता
ऐसी कितनी रेखाएँ हैं जिन्हें पार करने पर या तो युद्ध होगा या मौत आएगी।
किताब 'कुढ़न' से
जो बीत गई सो बात गई
जीवन में एक सितारा था
माना वह बेहद प्यारा था
वह डूब गया तो डूब गया
अम्बर के आनन को देखो
कितने इसके तारे टूटे
कितने इसके प्यारे छूटे
जो छूट गए फिर कहाँ मिले
पर बोलो टूटे तारों पर
कब अम्बर शोक मनाता है
जो बीत गई सो बात गई।
~ हरिवंशराय बच्चन
चाँदनी की पाँच परतें,
हर परत अज्ञात है
एक जल में,
एक थल में,
एक नीलाकाश में
एक आँखों में तुम्हारे झिलमिलाती,
एक मेरे बन रहे विश्वास में।
~ सर्वेश्वरदयाल सक्सेना...