आज EVM को लेकर जो सवाल उठ रहे हैं, वे अचानक पैदा नहीं हुए। आदरणीय बहनजी ने बहुत पहले ही चुनाव और EVM पर सवाल उठाए थे। उस समय दूसरे बड़े नेता इस मुद्दे पर उतनी मजबूती से सामने नहीं आए।
2017 में ही बहनजी ने EVM हटाओ का नारा दे दिया था। लेकिन तब तथाकथित विपक्षी पार्टियां मुंह बंद करके बैठी रही। और अब कांग्रेसी राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर चल रहे जेन_जी के आंदोलन से #EVM_BAN का मुद्दा ही ग़ायब करवा दिया।
किसी को कुछ पता चला❓
#BJP_की_B_टीम_कांग्रेस
जिसका सूरज चढ़ता है तो ढलता भी है अब समय आ गया है भारतीय जनता पार्टी के सूरज के ढलने का और इसको डुबाएगा बहुजन समाज पार्टी का नीला समंदर।
- माननीय आकाश आनंद जी
संसद में जिस वक्त बहन कुमारी @Mayawati जी EVM का खुलकर विरोध कर रही थीं, उस वक्त संसद में उपस्थित पूरा विपक्ष मूकदर्शक बनकर तमाशा देख रहा था. अगर उस वक्त पूरा विपक्ष बहन जी के साथ एकजुट होकर खड़ा हो जाता, तो आज देश की इन जैसी तमाम बेटियों की यह दुर्दशा देखने को नहीं मिलती.
💙 मुस्कुराते हुए मान्यवर साहब कांशीराम जी! 💙
कुछ चेहरे इतिहास बन जाते हैं, और कुछ विचार पीढ़ियों को रास्ता दिखाते हैं। ✊💙
मान्यवर साहब कांशीराम जी का जीवन बहुजन समाज में जागरूकता, समानता और अधिकारों की चेतना जगाने के संघर्ष को समर्पित रहा।
यह पुराना वीडियो उनकी यादों को फिर से ताज़ा कर रहा है । 🙏
साहब आपके विचार और आपका संघर्ष हमेशा याद रहेंगे। 💙
जय भीम ✊
जय कांशीराम साहब 💙
जय बहुजन समाज!
#KanshiRamSahab #ManyavarKanshiRam #JaiBhim #BahujanSamaj
बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर कम्युनल अवार्ड के जरिए दलितों के लिए दो वोट का अधिकार लेकर आए थे. लेकिन एक वोट के अधिकार को तो पूना पैक्ट के जरिए छीन लिया गया. शेष दूसरे वोट के अधिकार को EVM छीन रही है.
70 वर्ष की उम्र, चेहरे पर झुर्रियाँ, लेकिन मुस्कान आज भी वही और हौसले चट्टान जैसे! ✊
चाहतीं तो सत्ता से समझौता कर राष्ट्रपति पद तक पहुँच सकती थीं, लेकिन उन्होंने सत्ता के सुख से ऊपर बहुजन समाज की सेवा को रखा।
जिनकी पूरी जिंदगी समाज के हक़, सम्मान और स्वाभिमान के संघर्ष को समर्पित है, उस महान शख्सियत का नाम है आदरणीय बहन कुमारी मायावती जी।
उम्र शरीर की होती है, विचारों और संकल्पों की नहीं!
बहुजन मिशन की यह आयरन लेडी लाखों लोगों की उम्मीद और स्वाभिमान का प्रतीक हैं। 🫡🐘
EVM का विरोध बहुजन समाज पार्टी 2017 से कर रही है और बड़ा प्रदर्शन कर रही थी!
तब पप्पू और टीपू हंस रहे थे आज वही पप्पू और टीपू रो रहा है बहन जी के लीडरशिप को स्वीकार को नहीं तो हमेशा रोते रहोगे।
आकाश आनंद भैया का ये वीडियो आज तेजी से वायरल है,
हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि इन्होंने ये बात खास तौर पर दिल्ली के लिए बोली थी,
कल दिल्ली प्रोटेस्ट में जो हुआ,लोगों को झकझोर दिया😔
#CJPProtest
बात 2017 विधानसभा चुनाव की है ।
सबको लग रहा था बसपा सरकार बना ले जाएगी लेकिन जैसे ही रिजल्ट आया है भाजपा की प्रचंड बहुमत 320 सीट आ गई जबकि भाजपा ने ऐसा कुछ भी नहीं किया था केवल जुमले के..
बाद में सपा कांग्रेस दोनों ने @Mayawati जी की बात को मजाक में लिया था आज चिल्ला रहे।
बहन कुमारी @Mayawati जी हमारी आदर्श ही नहीं बल्कि हमारे लिए हिमालय पर्वत की तरह हैं, इसलिए हम बहन जी के साथ चट्टान बनकर खड़े हुए हैं. अगर बहन जी कहें कि तुम्हें आसमान से तारे तोड़कर लाने हैं, तो हम आज भी आसमान में छलांग लगाने का दम भरते हैं. ✍️
@Mayawati
सुनो जातिवादी, दलित-विरोधी कांग्रेस के चमचों और गिरगिट की तरह रंग बदलने वाले बहरूपियों के चमचों
आज जो आपके आका EVM के मुद्दे पर नौटंकी कर रहे हैं, उनसे सवाल पूछो कि तब कहाँ थे, जब सामाजिक परिवर्तन की महानायिका परम आदरणीय बहनजी संसद में EVM के मुद्दे पर अकेले आवाज़ उठा रही थीं? जब बहनजी को संसद में अपनी बात तक ठीक से रखने का अवसर नहीं दिया जा रहा था, तब यही कांग्रेसी नेता और अन्य दलों के नेता बहनजी पर हँस रहे थे, तो कुछ कटाक्ष कर रहे थे। यदि उस समय इन सभी तथाकथित दलित विरोधी जातिवादी दलों ने द आयरन लेडी बहनजी की आवाज़ का समर्थन किया होता और EVM के मुद्दे को गंभीरता से उठाया होता, तो शायद आज स्थिति कुछ और होती। सवाल यह है कि जब बहनजी इस मुद्दे को उठा रही थीं, तब ये जातिवादी विपक्ष के ये नेता कहाँ थे?
आज भी इन दलों की मांग मुख्य रूप से इस्तीफे तक सीमित दिखाई देती है, जबकि सवाल केवल इस्तीफे का नहीं, बल्कि EVM को हटाने को लेकर और उस पर उठ रही आशंकाओं और चुनावी प्रक्रिया में जनता के विश्वास का भी है। इन मुद्दों पर ठोस चर्चा और जवाबदेही की मांग करने के बजाय, विपक्षी दलों की राजनीति पर सवाल उठ रहे हैं।
2027 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव नज़दीक है। ऐसे में जनता को यह समझना होगा कि कौन-सा दल किस मुद्दे पर कब और कितनी गंभीरता से आवाज़ उठाता है। केवल चुनाव के समय दिखने वाली सक्रियता नहीं, बल्कि जनता के अधिकारों और लोकतंत्र से जुड़े सवालों पर लगातार संघर्ष ही किसी राजनीतिक दल की प्रतिबद्धता को परखने का आधार होना चाहिए।
बहुजन समाज को दूसरों के राजनीतिक स्वार्थ का मोहरा नहीं, बल्कि अपने महापुरुषों की विचारधारा और अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक होना होगा। इसलिए अपने राजनीतिक विवेक का इस्तेमाल कीजिए, अपने समाज को जागरूक कीजिए,अपनी पार्टी (बीएसपी) को मजबूत कीजिए और बहुजन आंदोलन को मजबूत कीजिए।
~दीपशिखा इन्द्रा
(लेखिका, एक्टिविस्ट बसपा दिल्ली)
#BSPMission2027
@bspindia@AnandAkash_BSP@IshuAnandBSP@VivekkumarProf@satishmisrabsp@ramjigautambsp@LaxmanSinghBSP@PalVishwnathbsp
हमारे लिए अंबेडकर मिशन से बढ़कर कुछ भी नहीं. मिशन से इश्क भले ही हर किसी को नहीं होता, लेकिन जिसे हो जाता है, वही इसकी सुखद अनुभूति महसूस करता है. भले ही इंसान तबाह और बर्बाद हो जाए, लेकिन एक बार जो तस्वीर दिल में उतर जाती है, वह मरते दम तक साथ रहती है.
जय भीम - जय बसपा ✍️
जब आदरणीय बहनजी EVM के खिलाफ संसद में अकेले दहाड़ रही थी,
तब विपक्ष खामोश था,हंसता था,मगर किसी भी विपक्ष ने बहनजी का साथ ही दिया था,अन्यथा चुनावी धांधली का खेल वहीं खत्म था।
बहनजी किसी के काम में टांग नही अड़ाती,अब विपक्ष खुद लड़े।
आज ही के दिन 13 अक्टूबर 1935 को बाबा साहब ने नासिक के येवला सम्मेलन में घोषणा की थी कि मैं हिंदू के रूप में पैदा तो हुआ हूँ, लेकिन एक हिंदू के रूप में मरूँगा नहीं. उसके बाद 14 अक्टूबर 1956 को बाबा साहब ने नागपुर की दीक्षाभूमि में पाँच लाख अनुयायियों के साथ बौद्ध धम्म दीक्षा ली.
मै EVM के खिलाफ अभी क्यों नहीं बोल रहा👇
बात 2017 की है जब "आदरणीय बहन कु @Mayawati जी" राज्यसभा में EVM के विरुद्ध अकेले खड़े होकर आवाज उठा रही थी !!
तो वहां बैठे धन्नासेठों को फर्क नहीं पड़ रहा था,जबकि "बहन कु मायावती जी" ने यह भी कहा था कांग्रेस EVM को लेकर आई है,जो बिल्कुल जायज नहीं है इससे नुकसान ही पहुंचेगा और आज वही हो रहा क्या?...लोकतंत्र की हत्या हो रही !!
आम जनता अपना जनप्रतिनिधि खुद चुनेगा,तो फिर EVM की क्या जरूरत है !!
कांग्रेस की एक गलती की वजह से आज पूरा देश भ्रष्टाचार से परेशान है अगर उसी समय EVM हटवा दी जाती तो आज धरने की जरूरत न पड़ती !!
इसीलिए कहते है "आदरणीय बहन कु मायावती जी" जैसा नेता कोई नहीं बन सकता उनकी सोच दूरदर्शी थी !!
जय भीम, जय भारत ✊🇮🇳
@SurajKrBauddh@vkjatav84
पुरुष प्रधानता की बेड़ियों में कैद भारतीय नारी को समानता का अधिकार देने के लिए बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जब हिंदू कोड बिल लेकर आए, तब धर्म के ठेकेदारों ने बाबा साहब का बहुत विरोध किया. इससे दुखित होकर बाबा साहब ने कानून मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया .
विपक्षी दल सिर्फ भाजपा नेताओं के इस्तीफे के लिए आंदोलन कर रहे हैं. जब कि उन्हें EVM के खिलाफ आंदोलन करना चाहिए. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा से क्या हासिल हुआ? EVM के खिलाफ आंदोलन से कांग्रेस पीछे हटेगी, क्यों कि भारत में EVM का बीज तो कांग्रेस ने ही बोया है .