मतलब 2020 से 2028 तक अस्सी करोड़ लोगों के लिए कुछ नहीं बदलने वाला है। आर्थिक तरक़्क़ी की तस्वीर ख़ुद ही पेश कर रहे हैं। चुनावी घोषणाओं से पता चल रहा है कि इस देश की आर्थिक हालत कैसी है।
चुनाव के बीच ऐसी घोषणा क्या आचार संहिता में आती है?
रा��नीति में धर्म और जाँच एजेंसी का इस्तेमाल ही सबसे बड़ा विकास है। इन दोनों को निकाल दिया जाए तो भाषण में क्या बचेगा? मन की बात ?
न्यूज क्लिक के खिलाफ आतंक के कानून का केस बनाना, इस आधार पर, की कोई चाइनीस ने उनको कुछ फंडिंग दी, बिल्कुल गैरकानूनी है। प्रधानमंत्री ने पीएम केयर फंड में चीनी कंपनियों से सैकड़ो करोड़ लिया। क्या उनके खिलाफ भी आतंक का केस बनाया जाएगा?
न्यूज क्लिक से जुड़े पत्रकारों के यहां छापा मारना और उनके ल���पटॉप/मोबाइल जप्त कर लेना, बगैर FIR दिखाए, बगैर किसी कोर्ट ऑर्डर के, बिल्कुल गैरकानूनी है।
यह सरकार की तरफ से स्वतंत्र पत्रकारो को डराने धमकाने की कोशिश है।
गोदी मीडिया दस साल से ज़हर फैला रहा ��ै। विपक्षी दलों को अपना आलस्य छोड़ जनता तक पहुँचने के लिए दूसरा रास्ता खोजना चाहिए। कार नहीं है तो पैदल चलिए। आप इन्हें जितना भी विज्ञापन दें, इनके एंकरों को इंटरव्यू दें मगर च���नाव में सिंगल कॉलम स्पेस नहीं मिलने वाला है। 2019 का ही कवरेज़ देख लीजिए। 2024 में भी यही होगा। विपक्षी दलों के नेता इन चैनलों में कैसे जा सकते हैं? सभी को एक प्रतिनिधिमण्डल बना कर मुकेश अंबानी के पास जाना चाहिए। कहना चाहिए कि उनके चैनल पर बैठ दो एंकर ज़हर फैला रहे हैं। आप क्यों इन एंकरों के सामने लाचार हैं? क्या ये एंकर अंबानी समूह के मालिक हैं? NBDSA ने फ़ाइन किया है। सुप्रीम कोर्ट की कई टिप्पणियाँ हैं। मुकेश अंबानी का नाम लेकर अपील करनी चाहिए। फिर जनता के बीच जाकर हर भाषण में इन चैनलों और अख़बारों के बारे में बताना चाहिए। हर रैली और हर पदयात्रा में। अगर इतना नहीं कर सकते तो फिर घर में रहिए। जो गोदी मीडिया से नहीं लड़ रहा है वो लड़ ही नहीं रहा है। बाक़ी सब ख़ानापूर्ति है।
मध्यप्रदेश के सतना में 13 साल की नाबालिग आदिवासी लड़की के साथ मंदिर समिति के कर्मचारियों ने बेरहमी से मारपीट करके सामूहिक दुष्कर्म किया। बच्ची के नाजुक अंगो के साथ बर्बरता की गई। बाद में मृत समझकर जंगल में अकेला छोड़ कर भाग गए। ये निर्भया से अधिक भीषण दरिंदगी की घटना है। लेकिन मनुस्ट्रीम मीडिया ने इस घटना के बारे में एक शब्द नहीं बोला क्योंकि पीड़िता एक आदिवासी लड़की है, आरोपी मंदिर समिति के सदस्य है और यह कृत्य बीजेपी शासित राज्य में हुआ है। #TribalLivesMatter