ZSM 6 states in a FMCG ORG
शायरमिजाज सनातनी,
सहायता तत्पर,
खेल-फिल्म प्रेमी,
हिंदी इंग्लिश तेलुगु(धाराप्रवाह) उर्दू(अल्प),
गहन तकनीकी व चिकित्स्कीय ज्ञान
जेपी से सीजेपी तक....
आंदोलन VS लेट्स डू समथिंग हैप्पनिंग
इतिहास खुद को दोहराता है। क्या आज भी दिल्ली में इतिहास दोहराया गया है?
मुझे साल 2012 की यादें ताजा हो गईं। निर्भया रेप केस और निर्भया आंदोलन की कवरेज करते करते मन बहुत दुखी हो गया था। बड़े डिप्रेसिंग दिन थे। 16 दिसम्बर की सुबह के बाद से हुए घटनाक्रम में रिपोर्टर के तौर पर तो सब कुछ देखा लेकिन इंसान के तौर पर जो हो रहा था वो देखा जा नहीं रहा था।
धरना, प्रदर्शन, मार्च, जवाबदेही का सवाल, डर गुस्सा सब...सब सड़क पर था। 16 दिसंबर से करते करते दिसंबर की 31 तारीख आ गई। साल की आखिरी रात। उस रात आंदोलनकारियों की तरफ से जेएनयू में निर्भया के लिए एकजुट होने का ऐलान किया गया था। था। शायद 8-9 बजे का वक्त तय था।
मैं घर से निकलने लगी तो पति ने पूछा कितने बजे तक आओगी? मैने पूछा क्या हुआ? उन्होंने कहा न्यू ईयर है। मैने कहा- क्या रोहित किस बात का न्यू ईयर? और बुझे मन से चली गई। कोई उत्साह ही नहीं। बस एक लड़की के इंसाफ की लड़ाई के चश्मदीद होने की जिम्मेदारी या भार ढोते हुए।
इसी बुझे मन से मैं जेएनयू पहुंची। जेएनयू में कार्यक्रम अपनी गति से चलता रहा 10 बजे...फिर 11 बजे...और फिर 12 बजने को हो आए गए। और तब मैंने वहां जेएनयू में देखा 12 बजने से पहले धीरे भीरे भीड़ छंटने लगी...आंदोलनकारी छात्र बिखरने लगे। कुछ ही मिनट में ये आंदोलनकारी छोटे-छोटे ग्रुप बनाकर अलग ही मूड में आए दिख रहे थे। कुछ लोगों ने कोने पकड़ लिए। बोतलें भी खुली। ये आंदोलनकारी एक दूसरे को न्यू ईयर विश करने लगे...मैं देखती रही...निर्भया के बारे में, इंसाफ के बारे में सोचती रही। मेरे अंदर उस रात बहुत कुछ टूट गया। लेफ्ट वाले हमें लेफ्ट आउट छोड़कर चले गए...केवल कुछ लोग ही लेफ्ट रह गए उस जगह।
अब उस रात की सोचती हूं तो निराशा होती है...हंसी भी आती है। कितनी मूर्ख बनी थी मैं। लगभग रोते हुए शर्मिंदगी के साथ मैंने भी घर फोन मिलाकर पति को नए साल की बधाई दी। रोहित ने पूछा क्या हुआ...अब क्या ही बताती...।
इसके कुछ साल बाद...ऐसे ही आंदोलन में एक बार फिर इतिहास ने खुद को दोहराया।
इसी जंतर मंतर पर साल 2015 में एक प्रोटेस्ट, एक धरने के दौरान धरने पर बैठे नेताओं के सामने, मेरी आंखों के सामने दौसा से आया एक आदमी आत्महत्या की धमकी देते देते सच में फंदे पर लटक गया। मैं हतप्रभ सी अपराध बोध में आ गई। ऐसा कैसे हो सकता है। क्या हम गजेंद्र को बचा नहीं सकते थे। लेकिन जिसने धरना प्रदर्शन ऑर्गनाइज किया था उन्होंने तो हाथों की तख्ती को थोड़ा और ऊपर कर लिया था ताकि जंतर मंतर पर पेड़ से लटका वो शख्स उन्हें नज़र ही ना आए। और जो दिखा ही नहीं उसकी जवाबदेही कैसी।
तो इतिहास से अब तक ये सीख तो मिल गई है कि विरोध का कारण ही प्रधान नहीं होता। प्रधान मतलब धर्मेंद नहीं। आई मीन कारण तो, मुद्दा तो अहम होता है लेकिन आपकी नीयत बहुत मायने रखती है। क्या आप सच में कॉज के साथ हैं...या अपने किसी स्वार्थ से साथ हो लिए हैं।
क्या वाकई ये पेपर लीक के लिए था? सोमन वांगचुंक को सीन से हटा दें तो बाकी लोगों की मसखरी से सब हल्का हो गया। फिर जो एंट्रीज़ हुई उससे किस बात को हवा मिली। इसलिए चीजें आपको तब तक सही और गलत लगती हैं, जब आप कारण का समर्थन करते हैं।
नेपाल रिक्रएट करने की मंशा लिए लोगों का मुद्दा कभी पेपर लीक था भी?
और कानून व्यवस्था बनाए रखने की मजबूरी में लाठीचार्ज और आंसू गैस का प्रयोग तो निर्भया के हक में आवाज उठाने वालों पर भी किया गया था। तब भी गलत था, आज भी गलत है।
फिर अंत में वही हार की जीत कहानी का सार जो बाबा भारती ने खडग सिंह से कहा था। घोड़ा चुरा कर ले तो जाओ पर किसी को बताना नहीं वरना कोई किसी गरीब पर भरोसा नहीं करेगा।
इसीलिए जेपी से सीजेपी तक देखना होगा आपके आंदोलन की परिभाषा और मानक क्या हैं। राजनीति से अनभिज्ञ बच्चों को...आज की ये जेन जी को उकसा कर अपना उल्लू सीधा करना क्या यहीं अभिव्यक्ति, लोकतंत्र और आंदोलन कहलाएगा?
@Iam_KiranK1
सुबह की राम राम किरण जी
💔✍🏻,
सहमा सा रहता है हर सच्चा इन्सान अपने ही घर मे,
गर्दन पर उसकी लटकती सियासत की तलवार देख लो;
हर शै की कीमत यहाँ आजकल बदल जाती है वक़्त से,
नीतियों के चोरों का ख़ूबसूरती से सजा बाज़ार देख लो।
आज का दिन शुभ रहे
🙏🏻💐🙏🏼💐
@AmbujSolha
सुबह की राम राम अम्बुज
💔✍🏻,
सहमा सा रहता है हर सच्चा इन्सान अपने ही घर मे,
गर्दन पर उसकी लटकती सियासत की तलवार देख लो;
हर शै की कीमत यहाँ आजकल बदल जाती है वक़्त से,
नीतियों के चोरों का ख़ूबसूरती से सजा बाज़ार देख लो।
आज का दिन शुभ रहे
🙏🏻💐🙏🏼💐
@ARPITAARYA
नमस्कार अर्पिता,
केन्द्रीय स्वास्थ्य मन्त्री जे. पी. नड्डा जी का यह ट्वीट CKP के आन्दोलन पर केन्द्र सरकार के सम्पूर्ण सत्य को उजागर करता है।
आज सुबह पहली बार प्रदर्शनकारियों की ओर से सरकार के साथ बातचीत करने का प्रस्ताव आया और सुबह 11:50 AM से ही हमारी बातचीत जारी है।
सौहार्दपूर्ण वातावरण में मुलाकात हुई। उनके डेलीगेशन के साथ विस्तार से पहले मौखिक चर्चा हुई और उनके द्वारा लगभग 4 बजे मुझे लिखित याचिका दी गई।
मैंने सभी प्रदर्शनकारियों से अनुरोध किया कि वे अपने धरने को समाप्त करें और सामान्य स्थिति बहाल करने में प्रशासन की मदद करें।
@chitraaum
नमस्कार चित्रा जी,
केन्द्रीय स्वास्थ्य मन्त्री जे. पी. नड्डा जी का यह ट्वीट CKP के आन्दोलन पर केन्द्र सरकार के सम्पूर्ण सत्य को उजागर करता है।
आज सुबह पहली बार प्रदर्शनकारियों की ओर से सरकार के साथ बातचीत करने का प्रस्ताव आया और सुबह 11:50 AM से ही हमारी बातचीत जारी है।
सौहार्दपूर्ण वातावरण में मुलाकात हुई। उनके डेलीगेशन के साथ विस्तार से पहले मौखिक चर्चा हुई और उनके द्वारा लगभग 4 बजे मुझे लिखित याचिका दी गई।
मैंने सभी प्रदर्शनकारियों से अनुरोध किया कि वे अपने धरने को समाप्त करें और सामान्य स्थिति बहाल करने में प्रशासन की मदद करें।
हैलो @grok भाई,
ये वीडियो जो बहुत तेजी से “वायरल” हो रहा है, इसे देख कर बताओ मिस्टर गांधी अपनी “अघोषित फेमिली” के साथ किस देश में छुट्टियां बिता रहे हैं।
विडियो प्रत्यक्ष है, Ai नहीं है, पब्लिक में आ चुका है तो अब यह मत कह देना कि -
मिस्टर गाँधी अभी तक कुवांरे हैं।
NCP की चीफ शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जी के पैर छू रही है।
इस सत्र में बिलो पर समर्थन की तरफ़ भी इशारे है।
धमकेदार मानसून सत्र के लिए तैयार रहिए 💥🔥