IAS ASPRINTS• UPSC CSE. @VISION_IAS. Political Science Major || Alumuns of Rajasthan College Jaipur, JNU Delhi || Awarded by Rajeev Gandhi Prize-2012 ||
@thelitmusnews आपकी ख़बरो को काफी दिनों से नोटिस कर रहा हु मुझे लगता है आपका एजेंडा अब व्यक्ति तथा समाज विशेष को टार्गेट करने का रह गया है
एक समुदाय विशेष के खिलाफ ही हो रही है आपकी पत्रकारिता, जो काफी चिंताजनक है !
श्री @DrKirodilalBJP सरकार बनने से पूर्व एवं अब मंत्री रहते हुए भी हम सब पर लगातार आरोप लगाते घूम रहे हैं पर इनका एक भी आरोप किसी पर सिद्ध नहीं हुआ है। भाजपा सरकार आने के ढाई साल में इनके सब आरोप हवा में उड़ चुके हैं। अब इन पर खुद पर आरोप लग गए तो ये तिलमिला गए हैं और बयान दे रहे हैं कि मुख्यमंत्री के दबाव में एसीबी उन्हें फंसा रही है। अब वे जनता के सामने पूरी तरह एक्सपोज हो गए हैं।
खुद को घिरता देख इस सब से ध्यान भटकाने के लिए श्री किरोड़ी लाल मीणा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष श्री @GovindDotasra पर अनर्गल और सरासर झूठे आरोप लगाना उनकी हताशा को साफ दर्शाता है। जनता सब देख रही है, इस झूठ की राजनीति का अंत निश्चित है।
अप्रैल 2023 का एक वाकया मुझे ज्यों का त्यों आज भी याद है।
राजस्थान कांग्रेस प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा तब कांग्रेस और उसके समर्थक विधायकों से पीसीसी में वन टू वन फीडबैक ले रहे थे। बाहर मीडिया का जमावड़ा था और कांग्रेस विधायकों को सख्त हिदायत थी कि मीडिया में कुछ भी उल्टा - सीधा नहीं बोलना है।
महुवा के तत्कालीन विधायक ओमप्रकाश हुडला फीडबैक देकर निकले और फिर बाहर मौजूद मीडिया बंधुओं के साथ चाय पर गपशप के लिए बैठ गए। अनायास ही चर्चा डॉ किरोड़ीलाल मीणा पर चल गई। गौरतलब है कि ओमप्रकाश हुडला और डॉ किरोड़ीलाल मीणा के बीच एक लंबी राजनीतिक रंजिश किसी से छुपी नहीं है।
उस दिन कि चर्चा में ओमप्रकाश हुडला ने खुले दिल से कहा कि डॉक्टर साहब और मैं खुले तौर पर राजनीतिक विरोधी हैं लेकिन एक बात पर मैं इस आदमी की तारीफ कर सकता हूँ। राजनीति में आकर आदमी क्या - क्या नहीं करता लेकिन मेरी जानकारी में ये है कि डॉक्टर साहब के पास इतनी लंबी राजनीति में रहने के बावजूद कोई पेट्रोल पंप, माइंस, होटल या फिर बड़ी प्रॉपर्टी नहीं है। हुडला आगे बोलते गए कि ऐसे नेता मेरी जानकारी में तो दूसरा कोई नहीं है। फिर हुडला ने आगे कहा कि डाक्टर के पास चुनाव लड़ने के पैसे भी नहीं होते जब भी डाक्टर चुनाव लड़ता है तो हमारे मीणा समाज के अफसर इसके लिए चंदा उगाही करते हैं।
कट्टर विरोधी होने के बावजूद हुडला ने ये सब बातें डॉक्टर साहब के लिए एकदम पॉजिटिव सेंस के साथ कही थी।
खैर, ये बात मेरी एकदम निजी जानकारी में पुख्ता तौर पर है कि डॉक्टर किरोड़ीलाल मीणा जब चुनाव लड़ते हैं तो उनके समाज के अधिकारी चंदा उगाही करके चुनाव लड़वाते हैं। चंदा उगाही करके चुनाव लड़ने का कन्सेप्ट हिंदुस्तान की राजनीति में बहुत पुराना रहा है जो कि अब की राजनीति में धन कुबेरों के आ जाने के बाद खत्म होता जा रहा है। पुराने सोशलिस्ट और कम्यूनिस्ट नेता तो इसी पैटर्न पर चुनाव लड़ते रहे हैं।
एक और बात डॉक्टर किरोड़ीलाल मीणा को लेकर मेरी जानकारी में साल 2023 में आई थी जब चुनावी सरगर्मियों के बीच डॉक्टर साहब के दौरे बढ़ गए थे। तब उन्होंने अपने एक राजनेता मित्र से आग्रह किया कि वे उनकी गाड़ी में डीजल भरवाने का बंदोबस्त अपने पेट्रोल पंप से करवा दें।
ये सब बातें इतने आत्मविश्वास के साथ मैं इसलिए लिख पा रहा हूँ क्योंकि मैं इन घटनाओं का चश्मदीद हूँ।
लेकिन इस बात इस अब व्यक्तिगत पीड़ा है कि एक जमीनी, लड़ाकू और फकीर मिजाज नेता बुढ़ापे में ऐसे आरोपों के बीच घिरा हुआ है जो कि आरोप उन पर नहीं लगने चाहिए थे। उम्मीद करता हूँ डॉक्टर साहब इन सबसे पाक साफ होकर निकलेंगे। लेकिन अगर ये सब सच साबित हुआ तो फिर बहुत दुखद होगा। क्योंकि जमीनी और फकीर मिजाजी नेताओं पर ऐसे आरोप साबित हुए तो सियासत का इकबाल फिर जनता में मर जाएगा और हर जमीनी नेता भरोसे के लायक नहीं रहेगा।
राजस्थान में करोड़ों के खाद-बीज रिश्वतकांड में कृषि मंत्री के करीबी करोड़ों रुपए के साथ पकड़े गए।
अब गिरफ्तारी की आंच अपने दरवाजे तक पहुंचती देख कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल जी मुख्यमंत्री को ही "लक्ष्मण रेखा" यानि अपनी हद में रहने की धमकी दे रहे हैं। मुख्यमंत्री के अधीन एंजेंसी ACB को "पॉलिटिकल वेपन" बताकर खुद को फंसाने की साजिश का आरोप लगा रहे हैं।
आखिर कृषि मंत्री किस डर से इतना तिलमिला रहे हैं? कल तक जो दूसरों पर कीचड़ उछालते थे, आज अपनी बारी आने पर व्यवस्था, एजेंसियों और मुख्यमंत्री तक को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री जी.. घबराइए मत, राजस्थान को सच्चाई बताइए। क्या आपका कैबिनेट मंत्री भ्रष्टाचार के जाल में फंसा है? क्योंकि अगर ACB राजनीतिक हथियार है, तो इसका जवाब आपको देना होगा। और अगर ACB निष्पक्ष है, तो फिर भ्रष्टाचारियों को जेल में डालिए।
जनता ये तमाशा नहीं, सच जानना चाहती है, उजागर कीजिए।
लोकसभा सदस्य और पूर्व डीजीपी हरिश्चंद्र मीना राजस्थान की राजनीति के उन विरल नेताओं में हैं जिनकी पहचान शालीनता, गंभीरता और संयमित भाषा से बनी है। वे अपनी बात बेबाकी से कहते हैं, लेकिन उनकी बेबाकी को अभद्रता समझ लेना या जान-बूझकर वैसा प्रस्तुत करना उचित नहीं है।
हाल में यह प्रचार किया गया कि उन्होंने पंचना बांध के पानी के मुद्दे पर खण्डीप गाँव में चल रहे आंदोलन के दौरान कोई अशालीन और आपत्तिजनक टिप्पणी की है। स्वाभाविक रूप से यह सुनकर हैरानी हुई, क्योंकि उनका सार्वजनिक व्यवहार ऐसी भाषा से मेल नहीं खाता। उनके वीडियो खंगाले।
पूरे प्रसंग को समझने पर स्पष्ट होता है कि उन्होंने कोई गाली, अश्लील टिप्पणी या किसी व्यक्ति का अपमान नहीं किया। उन्होंने केवल यह कहा कि हम पंचना बांध से अपने हिस्से का पानी लेकर रहेंगे। इसी बात को दृढ़ता से व्यक्त करने के लिए उन्होंने राजस्थान के लोकजीवन में प्रचलित एक पुरानी कहावत का प्रयोग किया, “बकरी सीधे दूध दे दे तो ठीक, नहीं तो मींगणियां मिलाकर देगी।”
इस कहावत का अर्थ अश्लील नहीं, बिल्कुल व्यावहारिक है। इसका आशय है कि कोई काम सहजता और सहमति से हो जाए तो अच्छा है; अन्यथा परिस्थितियां ऐसी बनेंगी कि वही काम कठिनाई, संघर्ष या दबाव के बाद करना पड़ेगा। राजस्थान के गांवों, खेत-खलिहानों और पशुपालक समाज में ऐसी कहावतें सामान्य बोलचाल का हिस्सा रही हैं। इनमें लोकजीवन के अनुभव, व्यंग्य और चेतावनी; तीनों समाहित होते हैं। यह एक शक्तिशाली भाषा का नमूना है।
लेकिन जो इसे अश्लील बता रहे हैं, वे बकरी पालन से भी वाक़िफ़ नहीं हैं। बकरी कई बार दूध नहीं देती; आदमी बहुत कोशिश कर लेता है; लेकिन एक मौक़ा ऐसा ऐसा आता है, जब बकरी के थनों में इतना दूध आ जाता है कि वह मिमियाने लगती है और तब एक तरफ़ दूध निकलता है और दूसरी तरफ़ वह प्रेशर में मेंगनियाँ करने लगती है तो मेंगनिया दूध में भी गिर जाती हैं।
किसी लोकप्रचलित कहावत को उसके सांस्कृतिक संदर्भ से काटकर अभद्र घोषित करना भाषायी अज्ञान भी है और राजनीतिक दुर्भावना भी। भाषा केवल शब्दकोश से नहीं समझी जाती; उसे समाज, भूगोल, परंपरा और लोक-स्मृति के भीतर पढ़ना पड़ता है। जो लोग इस कहावत को अश्लील बता रहे हैं, वे या तो राजस्थान के लोकसमाज और उसकी बोली से अपरिचित हैं, या फिर परिचित होते हुए भी राजनीतिक लाभ के लिए अर्थ का अनर्थ कर रहे हैं।
वास्तविक मुद्दा हरिश्चंद्र मीना की भाषा नहीं, पंचना बांध का पानी है। बहस इस पर होनी चाहिए कि पानी पर किन क्षेत्रों का अधिकार है, उसका न्यायपूर्ण वितरण कैसे होगा और वर्षों से लंबित समस्या का समाधान क्या है। लेकिन जब मूल प्रश्न से बचना हो, तब एक लोककहावत को विवाद में बदल देना सबसे आसान राजनीतिक हथकंडा होता है।
हरिश्चंद्र मीना ने कोई अशालीन टिप्पणी नहीं की; उन्होंने राजस्थान की लोकभाषा में एक दृढ़ राजनीतिक संकल्प व्यक्त किया है। लोकभाषा को अपराध की तरह प्रस्तुत करने वाले दरअसल उस राजस्थान से कटे हुए हैं, जिसके नाम पर वे राजनीति करना चाहते हैं।@HC_meenaMP
थोड़ी शर्म करो
भारत की विदेश नीति का भट्टा बैठा दिया...
हिंदुस्तान की इमेज पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिट्टी में मिला दी मोदी सरकार ने..
अमेरिका भारत को बच्चा समझता है कोई डर नहीं ऐसा लग रहा कि मानो हम अमेरिका के अधीन है ...
थोड़ी शर्म करो
भारत की विदेश नीति का भट्टा बैठा दिया...
हिंदुस्तान की इमेज पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिट्टी में मिला दी मोदी सरकार ने..
अमेरिका भारत को बच्चा समझता है कोई डर नहीं ऐसा लग रहा कि मानो हम अमेरिका के अधीन है ...
एक सभ्य समाज में ऐसी भाषा अस्वीकार है मीणा समाज की रीति नीति कभी भी नहीं रही ऐसे विचारों का समर्थन करने की..
हम लोकतांत्रिक व्यवस्था में शान्ति पूर्ण तरीको से अपनी मांग पूरे करने में विश्वास करते है ।...
बात-बात पर संविधान की दुहाई देने वाले लोग खुलेआम मंचों पर फतवा जारी कर रहे हैं... अब कहां से लगता है कि इन्हें पानी चाहिएं
छटी का दूध ओर चिन्न मेंटने वाला धरती पर कोई पैदा नहीं हुआ, जुबान लजाने से अच्छा पहले पांचना जाकर खोल तो सही बांध। नफरती भाषणवीरों
मंत्री जी, आप और आपकी सरकार को शर्म आनी चाहिए कि आप हाईकोर्ट के ऑडर की पालना सुनिश्चित नहीं कर पा रहे अग़र ऐसे ही होना लगा तो फिर क्या औचित्य सरकार और संवैधानिक संस्थाओं के होने का, इसलिए आप लोग हाईकोर्ट के आदेश की पालना सुनिश्चित करें।
पिछले दिनो कांग्रेस के सांसद जो पूर्व DGP रहे उन्होने जिन शब्दो का उपयोग किया उससे राजस्थान की परंपरा संस्कृति तार-तार हुई है उन्हे अपने राजनैतिक स्वार्थों की पूर्ति करने के लिए ऐसे शब्दो का प्रयोग नही करना चारहिए
- जवाहरसिंह बेढम (गृह राज्यमंत्री)
प्रिय @grok...
क्या तुम मेरे इस प्रश्न का जवाब दोगे? 🙏
पूर्व DGP व वर्तमान सांसद श्री हरीश मीणा ने मीणा समुदाय पूर्वी राजस्थान में 'बहुसंख्यक' बताया है।
क्या यह तथ्यात्मक रूप से सही बात है?
पूर्वी राजस्थान में निम्न 11 जिले हैं।
1) जयपुर ( + कोटपुतली बहरोड़ )
2) दौसा
3) टोंक
4) सवाईमाधोपुर
5) भरतपुर (+ डीग )
6) अलवर ( + खैरथल&तिजारा )
7) करौली
8) धौलपुर
2011 की लेटेस्ट जातिगत जनगणना के अनुसार ST समुदाय की जिलेवार कितनी आबादी है?
और औसतन इन सभी जिलों में कुल कितने प्रतिशत ST आबादी है?
इसका बिंदुवार और सटीक जवाब दो @grok? 🙏
@Khalbaali Ab to Pilot Sahab ki hath per jodkar ticket liye par agli bar ghar bithayenge is jatiwadi mariz ko vote mangne aayega to Gurjaro ke pas hi ye jatiwadi kida
मेरा खुद का मानना भी है डॉ साहब को नैतिकता के नाते इस्तीफा दे देना चाहिए ।
क्योंकि डॉ साहब मूल्यों की राजनीति के लिए जाने जाते है और उन्हें जाँच में सहयोग एक आम नागरिक की तरह करना चाहिए ।
क्या कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देंगे?
The Litmus के यूट्यूब चैनल पर देखिए ये पूरा वीडियो 👇🏽 कौनसी FIR पर मचा है बवाल?
#KirodiLalMeena#Rajasthan
Misleading promo..
First they showed ‘1 day left’, people got excited, and within hours the spark disappeared 😂
At this point it feels less like a cashback campaign and more like a marketing trap to create hype and engagement. @slicebank
@slicebank My &ID: &MEENASANDEEP
Because my credit card bill hit harder than a gladiator’s sword this month 😭💳
Still survived the arena, paid my dues like a true warrior, and now hoping the Emperor shows mercy 🫡
आर्थिक तूफ़ान सर पर है, और हमारे प्रधानमंत्री इटली में टॉफ़ी बाँट रहे हैं!
किसान, युवा, महिलाएँ, मज़दूर और छोटे व्यापारी सब रो रहे हैं - PM हंसकर रील बना रहे हैं, और BJP वाले ताली बजा रहे हैं।
यह नेतृत्व नहीं, नौटंकी है।