आज अमेठी कलेक्ट्रेट में समाजवादी पार्टी की विशाल धरना-प्रदर्शन आंदोलन में शामिल होकर संविधान बचाने के लिये,बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी,फर्जी एनकाउंटर,बिगड़ती कानून-व्यवस्था,पेपर लीक,अघोषित विद्युत कटौती,स्मार्ट मीटर के ख़िलाफ़ एवंPDAआरक्षण घोटाले जैसे जनविरोधी मुद्दों के खिलाफ आवाज
आज अमेठी कलेक्ट्रेट में समाजवादी पार्टी की विशाल धरना-प्रदर्शन आंदोलन में शामिल होकर संविधान बचाने के लिये,बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी,फर्जी एनकाउंटर,बिगड़ती कानून-व्यवस्था,पेपर लीक,अघोषित विद्युत कटौती,स्मार्ट मीटर के ख़िलाफ़ एवंPDAआरक्षण घोटाले जैसे जनविरोधी मुद्दों के खिलाफ आवाज
‘गुरूरमंद हुक्मरानों’ तक पहुँचे ये आवाज़
सुनो दरवाज़े पर खटखटा रहा है ‘बदलाव’
दरारें पड़ गईं क़िलों में, दरक रही बुनियाद
अब नौजवानों ने भी कर दिया है इंक़लाब!
ज़हरीली साज़िशों से तब तक न निजात मिल पाएगी जब तक केवल शाख पर उँगली उठाई जाएगी और सिर्फ़ वो शाख हटाई जाएगी, असली आज़ादी, तरक़्क़ी और इंसाफ़ तब मिलेगा जब इस गुनाह का असली तना और ज़मीन के अंदर गहरी छुपी दीमकी जड़ उखाड़ी जाएगी।
एक देश-एक आवाज़ मतलब इंक़लाब!
#BJP_बनाम_CJP
UPPSC ने HEOके कुल 221पदों के लिए विज्ञापन जारी किया है।OBCवर्ग को मात्र20पद दिएगए हैं,जो कुलपदों का मात्र9%है।
HEO कुल221 पदों के सापेक्ष 27 प्रतिशत आरक्षण के हिसाब से OBC को 60पद मिलने थे,लेकिन मिला मात्र 20सरकार ने (OBC) के 40 पदों की डकैती की है!
पिछड़ों दलितों आदिवासियों के आरक्षण के हक लगातार ख़त्म किया जा रहा है ,यूपी लोक सेवा आयोग अब ठाकुर आयोग बन चुका है जो सिर्फ एक जाति के चयन का प्रबंधन कर रहा है उसके खिलाफ बहुजनो के संवैधानिक आंदोलन को हमारा समर्थन है ,आरक्षण हमारा हक है भीख नही
#15_दिसंबर_महाआंदोलन_लोकसेवाआयोग
गोवा, बिहार, मेघालय और जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल रहे श्री सत्यपाल मलिक जी का निधन, अत्यंत दुःखद !
ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें।
शोक संतप्त परिजनों के प्रति गहरी संवेदनाएं।
भावभीनी श्रद्धांजलि !
विदा धरती आबा...
आज झारखंड ने अपना सपूत खो दिया।
शिबू सोरेन बाबू नहीं रहे.
लेकिन उनका संघर्ष, उनकी आवाज़, और उनकी लड़ाई हमेशा जिंदा रहेगी।
ऐसा नेता जिसने जंगलों से निकलकर संसद की आवाज़ तक आदिवासियों की हक़ की बात की,
जिसने जल,जंगल और जमीन के लिए हर सत्ता से टकराने का साहस किया
आपकी जरूरत सदा रहेगी "नेताजी"...
बहुत याद आता है पार्टी कार्यालय के मैदान का वो चबूतरा जहा आपके सामने खडे होकर भाषण दिए थे
#अँधेरा_छटेंगा_समाजवाद_आयेगा
सांप्रदायिकता जब भी सर उठाकर सीना तान कर चलने की कोशिश करती है और जब भी करेगी तो उसे उसका सबसे बड़ा दुश्मन नेताजी जरूर याद आएगे, जिसने उत्तर प्रदेश की धरती पर उस वक्त भी अमन/मुहब्बत का पैगाम दिया जब साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति को दूध पिला कर पाला पोसा गया था और जवान होती
उ सांप्रदायिकता ने अयोध्या में वो खेल खेला जो अब तक इतिहास में दर्ज है।
नेता जी अब नहीं हैं... उन्हें एक दिन "नहीं" होना भी था लेकिन उनके होने के एहसास और ना होने की चिंता के बीच के फासले में आज भी घुट रहा है जातीय श्रेष्ठता का दंभ... और आज भी पनप रहा है बहुजन हितों का सपना