सीजेआई गवई पर जूता फेंकने वाले एडवोकेट राकेश किशोर का बड़ा ऐलान…
5 नवंबर कार्तिक पूर्णिमा के दिन खजुराहो में स्थित भगवान विष्णु की खंडित प्रतिमा का करेंगे पूजा
5 नवंबर को खजुराहो चलने के लिए जनता से किया अपील
जो लोग विचारधारा पकड़ कर चल रहे हैं उन्हें अनिल मिश्रा पसंद हैं क्योंकि उन्होंने जो बोला है, वह एक समूह को उचित लगता है। एक बहुत बड़ी पार्टी को लगता है कि उसका संबंध किसी दूसरी पार्टी से निकल आने पर वैचारिक सहमति दिखाने वाले अचानक से मिश्रा को गद्दार कह देंगे।
ऐसा कार्य आइटीसेलियों का होता है, वैचारिक समर्थन देने वालों का नहीं। व्यक्ति किसी भी पार्टी में रहे, तार्किक बातें करेगा (जो अपीजमेंट के विरोध में हो) तो उसका समर्थन विचारधारा के अनुरुप चलने वाले करेंगे।
CJI गवई नवबौद्ध हैं, असली दलित मैं हूँ,
गौतम बुद्ध ने कभी सनातनियों का विरोध नहीं किया,
न्यायपालिकाओं में सनातन विरोध बन चुका है फैशन,
धर्म की खातिर मैं हंस कर फाँसी भी चढ़ने को तैयार हूँ,
#बिंदास_मुलाकात में आज रात 8 बजे सुनें #CJIBRGavai जूता काण्ड के आरोपी वकील राकेश किशोर को
#SupremeCourt #SupremeCourtofIndia #JusticeBRGavai
किस बिल में छिपे हो नीले कबूतरों, करवाओ गिरफ्तारी,,😂
अपने बाप का राज समझा था क्या, भारत बी एन राव के संविधान से चलता है न कि तुम्हारे बाप के संविधान से,,तुम्हारा बाप तो संविधान विरोधी था।😂
वो तो ठीक है मोहन जी , लेकिन ये तो बता दो जब लाठी में इतना ही दम था तो सामाजिक रूप से पिछड़ कैसे गए ? और सही मैं दम है तो आरक्षण छोड़ने की घोषणा कर दो , फिर काहे पिछड़ा पिछड़ा का राग अलापते घूमते हो।
भगवान वाल्मीकि के साथ अम्बेडकर को जोड़ना
भगवान वाल्मीकि जी का बहुत बड़ा अपमान है
दोनों मे 36 का अकड़ा है
भगवान वाल्मीकि जी सनातन धर्म के
जनक है और अम्बेडकर धर्म विरोधी.
हमारे बुजुर्ग बोलते थे पेर का जूता पेर मे ठीक लगे सर पर नहीं।
कुछ हरामज़ादो ने राजनीत के लियॆ पेर का जूता सर पर रख लिया था।
अब हुंकार रहा है देश जातीय गुंडों के अत्याचार से मुक्ति जरूर दिलाएंगे।
अधिवक्ता राकेश किशोर ने कहा कि प्रश्न यह नहीं है कि उन्होंने जूता उतारा, प्रश्न यह होना चाहिए कि एक पढ़े लिखे, MSc गोल्ड मेडलिस्ट को इस कार्य के लिए विवश होना पड़ा।
आगे वो कहते हैं कि ये जो दलित-दलित की बात हो रही है, संभव है कि मैं भी दलित होऊँ क्योंकि मेरे नाम से तो पता नहीं चलता कि मैं कौन हूँ। यह कार्य मैंने ईश्वरीय प्रभाव में आ कर किया।
मैंने कल भी यही कहा था, पुनः आज भी यही कहूँगा कि यदि जज लोग नहीं सुधरे, यदि वो न्याय की जगह बकलोली करते रहे, तो जनता की आस्था समाप्त होगी और धैर्य टूट जाएगा।
बात यह नहीं है कि कल कोई और जूता मार देगा, बात यह है कि किसी ने आज जज के ऊपर जूता खोल लिया है। CJI के शब्दों के विरोध में जूता उतार लेना स्वयं में एक बहुत बड़ी घटना है। यह जज को जूता मारने से बड़ी घटना है।