@HansrajMeena Tumse Nafrat karke karenge kya.? 80 saal Reservation dekar kya ukhaad liya. Ek scientist Engineer bata do. ..Nafrat barabar wale se ki jaati hai. ..Budhi aane main abhi 100 or bhi lag jayenge
आज कोर्ट में मेरे केस पर सुनवाई हुई। न्यायाधीश महोदय ने अगली सुनवाई तक केस पर पुलिस जाँच के लिए मुझे बुलाने से पूर्व जाँच अधिकारी को मुझे नोटिस देने कहा। यही नोटिस कोर्ट को भी दी जाएगी ताकि कोर्ट यह तय करेगा कि इसमें कोई तर्क है या नहीं।
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि हमारे अधिवक्ता @jai_a_dehadrai ने हमारा पक्ष रखा कि उक्त व्यक्ति पर न तो कोई जातिगत टिप्पणी हुई, न ही उसका इस विषय में जातिसूचक शब्दों से कोई अपमान हुआ। अतः, कोई केस ही नहीं बनता।
जय अनंत जी समेत श्री सिंह एवम् प्रत्युष भाई आदि अधिवक्ताओं को मेरा ससम्मान आभार जिन्होंने मेरा पूर्ण पक्ष रखा। अगली सुनाई सप्ताह भर बाद है।
BJP Mehewa Mandal Vice President Avnindra Kumar Dubey “Ravi” has resigned, citing persecution of the General Category and disagreements with the party over the UGC issue.
गडकरी ने नागपुर के एक कार्यक्रम में कहा कि 30 वर्षों से पब्लिक लाइफ में हैं, अब वो थक गए हैं इसलिए नई पीढ़ी को अवसर मिलना चाहिए।
सरकार के सारे गुडविल की वाट लगा कर, ये और प्रधान जैसे लोग अब हज के लिए निकल रहे हैं। अगस्त 2025 से मैं एथनॉल और उसे 80% नॉन-कम्प्लायंट गाड़ियों में डालने का विरोध कर रहा हूँ। सरकार पेट्रोल पम्प पर हो रही मिलावट पर भी चुप ही रही है।
जब इन्होंने गन्ने के शीरे की जगह, सारा जूस ही एथनॉल को दे दिया और कॉस्मेटिक, फार्मा सेक्टर को अमेरिका से इंपोर्ट को विवश किया, तो आज न तो जनता को उचित मूल्य पर पेट्रोल मिल रहा है, न ही चीनी।
ऐसे मंत्री की विदाई के लिए माहौल लंबे समय से बन रहा था, और अब स्वयं संकेत दे रहे हैं। क्या आवश्यकता थी कि 2030 के टारगेट को 2025 में पूरा करके नाचने की? गाड़ियाँ बनी नहीं, सड़कों पर करोड़ों गाड़ियाँ पुराने इंजन की हैं और इनको छाती ठोकनी थी।
मीडिया और सोशल मीडिया पर SC/ST एक्ट को लेकर बहस चल रही है। मैं एक आदिवासी के तौर पर अपनी बात रखती हूँ;
SC/ST एक्ट का इस्तेमाल कौन करता है? मैंने देखा है कि SC/ST एक्ट के तहत ज़्यादातर फ़र्ज़ी मामले अनुसूचित जाति (SC) के लोगों द्वारा दर्ज कराए जाते हैं, जबकि अनुसूचित जनजाति (ST) के बहुत कम लगभग न के बराबर...
मैं दलितों की बात नहीं करूँगी, वे अपना देखें; मैं सिर्फ़ आदिवासियों (ST) के बारे में लिखूँगी। मैं अपनी ही बात करूं तो अब तक ज़िंदगी में मुझे कभी भी अपनी जाति की वजह से किसी तरह के भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा। बल्कि, मुझे समाज के हर वर्ग और जाति के लोगों से प्यार और अच्छा व्यवहार ही मिला है।
मैं झारखंड की आदिवासी हूं। मैंने देखा है जो आदिवासी जंगलों, पहाड़ों और दुर्गम ग्रामीण इलाकों में रहते हैं, उन्हें तो इस एक्ट के प्रावधानों के बारे में 'ABCD' तक नहीं पता। सिर्फ़ तथाकथित आदिवासी एक्टिविस्ट, ज़मीन माफ़िया और आदिवासी नेता ही इसका इस्तेमाल अपने विरोधियों को फंसाने या बदला लेने के लिए राजनीतिक और कानूनी हथियार के तौर पर करते हैं। आम आदिवासी समुदाय का इससे कोई बहुत ज्यादा लेना देना नहीं है। हाँ, कुछ पिछड़े और ग्रामीण इलाकों में थोड़ा-बहुत भेदभाव हो सकता है, इसकी संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
कई लोग SC/ST एक्ट को खत्म करने की मांग कर रहे हैं। मैं SC/ST एक्ट को हटाने कि पक्षधर नहीं, आदिवासी समुदाय के लिए एससी एसटी एक्ट, आदिवासियों को उनके "जल जंगल जमीन" को गैर - आदिवासी (दिकू) भू-माफियाओं से संरक्षित करने और बचाने में कानूनी रूप से कारगर है। SC/ST एक्ट को खत्म करने की नहीं बल्कि इसमें व्यापक संशोधन की ज़रूरत है। किसी सूरत में SC/ST एक्ट का गलत इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। @ajeetbharti
#StopMisuseOfSCSTAct
Chirag Paswan , son of a Brahmin mother , who lived a PREVILGED life through out continues to beg for RESERVATIONS..
If shamelessness had a face .,, ⬇️