#GangaExpresswayTollTaxScam
गंगा एक्सप्रेसवे पर लहरावन/बहजोई से लखनऊ के लिए यात्रा करने पर किलोमीटर 123 से किलोमीटर 378 तक कुल 255 किलोमीटर की दूरी तय करने पर ₹835 का टोल टैक्स दो हिस्सों में काटा जाता है। जिसमें लहरावन से करनपुर तक ₹55 और करनपुर से आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे तक ₹780 काटा जाता है। इसी प्रकार वापसी में भी आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे से गंगा एक्सप्रेसवे पर प्रवेश करने पर किमी 378 से लेकर चंदोई/करणपुर तक ₹780 काटा जाता है। लेकिन लहरावन पर जो टोल टैक्स वाला ठेकेदार है, वह लगातार धांधली कर रहा है। और वह ₹55 के स्थान पर ₹400 काटता है। जब आप उसके पास शिकायत के लिए जाइए तो वह अपने 10-20 फालतू मुस्टंडों के साथ प्रकट होता है और आपसे दो टूक जवाब देता है कि यदि ज्यादा कट गया है तो आप उसकी शिकायत कर दीजिए। आपको वापस मिल जाएगा। अब सवाल यह है कि कितने परसेंट लोग हैं जो इस ऑनलाइन वापसी की प्रक्रिया को पूरा करते हैं ।जब सम्पूर्ण सिस्टम ऑनलाइन है और किमी 378 से किमी 146 तक सिस्टम ऑटो रीड करके ₹780 काटता है तो स्पष्ट है कि वाहन लखनऊ दिशा से आ रहा है इसलिए किमी 146 से 123 तक ₹55 काटने के स्थान पर जानबूझ कर विपरीत दिशा में स्थित मेरठ से लहरावन तक का ₹ 400 काटने वाले ठेकेदार का उत्तर दायित्व निर्धारण होगा या नहीं ।
एक तो गंगा एक्सप्रेसवे पर पहले से ही उत्तर प्रदेश के अन्य एक्सप्रेसवे की तुलना में ज्यादा टोल टैक्स की दर निर्धारित की जा चुकी है। आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे पर 50 किलोमीटर चलने पर अर्थात् किलोमीटर 352 सेकिमी 302 तक चलने पर ₹95 काटा जाता है। जिसकी दर ₹1.90/km है। वहीं गंगा एक्सप्रेसवे पर लहरावन से लखनऊ तक 255 किलोमीटर चलने पर कुल भुगतान ₹835 लिया जाता है। जो कि ₹3.27 प्रति किलोमीटर बैठता है। इसी प्रकार यदि लहरावन से हापुड़ या दिल्ली जाते हैं तो 88 किमी की यात्रा हेतु ₹310 का भुगतान ₹3.52/ किमी की दर से किया जाता है लेकिन शिकायत अधिक दर निर्धारण की नहीं है क्योंकि एक्सप्रेस वे पर चलना अनिवार्य न होकर वैकल्पिक है क्योंकि यदि आपको मंहगा लगता तो आप एक्सप्रेस वे पर न चलकर उन सड़कों पर चलिये जिन पर चलने के लिए आपने वाहन पंजीकरण के समय 7 से 10 प्रतिशत की दर से रोड टैक्स दिया था
मेरे शिकायत यह कि गंगा एक्सप्रेस वे पर निर्धारित टोल टैक्स से अधिक वसूली वार वार क्यों की जा रही है और ऐसे ठेकेदार के विरूद्ध क्या दण्ड निर्धारित है
आप फास्टैग न होने पर दो गुने टोल टैक्स वसूली कर रहे हैं तो क्या इस प्रकार की व्यवस्था इन बेईमान ठेकेदार के विरुद्ध नहीं होनी चाहिए ।
हमारा अनुरोध है कि इन बेईमान ठेकेदारों पर लगाम लगाने के लिए अधिक बसूली गई धनराशि का १० गुना रिफण्ड निर्धारित हो और यदि इस प्रकार के अधिक बसूली के १० से अधिक मामले हों तो इनका टेण्डर निरस्त किया जाए ।क्योंकि आज इस प्रकार की व्यवस्था न होने का ही लाभ यह लोग उठा रहे हैं यह जानते हैं कि रिफण्ड हुआ तो ठीक नहीं तो यह हज़म कर लेते हैं ।
यह आज इस लिए लिखा कि तमाम लोगों के साथ मैं स्वयं भी लगातार इस बेईमानी से पीड़ित हूँ।
@NHAI_Official@KotakBankLtd@PMOIndia@narendramodi@nitin_gadkari@CMOfficeUP@myogiadityanath@upeidaofficial@DmSambhal@bstvlive@Aamitabh2@AmarUjalaNews
#NoTETbeforeRTEact
*IAS, IPS, IFS ,IRS,IES की exam यूपीएससी के माध्यम से भारत में आयोजित होती है। तो IMS (Indian Medical Services) के साथ-साथ IJS (Indian Judiciary Services) या IAS(J) की परीक्षा भी होनी चाहिए। जिससे सभी को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ एक समान न्याय भी मिलें। और जो पूर्व से नियुक्त अधिकारीगण/ न्यायधीश इन परीक्षाओं को पास किए बिना नियुक्त हैं। उन्हें भी 2 वर्ष के भीतर इस परीक्षाओं को पास करना चाहिए। अन्यथा उन्हें भी शिक्षकों की भाँति अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाएगी क्या?
@narendramodi@AmitShah@rajnathsingh@dpradhanbjp@myogiadityanath@RahulGandhi@yadavakhilesh@priyankagandhi@Aamitabh2@bstvlive
गुणवत्ता तो हर जगह होनी चाहिए, लेकिन केवल शिक्षकों पर ही क्यों थोपी जा रही है? क्या शिक्षकों के 25 वर्षो की सेवा व अनुभव का कोई मोल नहीं है? @DrDCSHARMAUPPSS@PMOIndia, @dpradhanbjp
@yadavakhilesh विभागीय नियमों के अनुकूल 25-30 वर्ष पूर्व में नियुक्त शिक्षकों से वर्तमान में एक और परीक्षा उत्तीर्ण कराने की अनिवार्यता शिक्षकों के साथ अन्याय है ।
#इति_सिद्धम
वे अपने लिये संसद के बनाये क़ानून को भी नहीं मानेंगे ,क्योंकि उनको न्यायिक स्वतन्त्रता चाहिये ।
बिना किसी परीक्षा में सम्मिलित हुए केवल अनुभव और सिफारिश के आधार पर नियुक्ति और प्रमोशन लेते रहेंगे ।
आप पर वे नियम थोपे जाएँगे जो संसद ने आपके लिए बनाए ही नहीं हैं
2017 के संशोधन सहित आरटीई में कहीं टेट का उल्लेख नहीं है आरटीई के 23(1) के द्वारा प्रदत्त शक्ति से एनसीटीई ने 23 August 2010 को minimum qualification परिभाषित की है जोकि नियुक्ति वर्षों के अनुसार with tet और without tet है लेकिन माननीय जी ने minimum qualification को TET लिख दिया तो लिख दिया ।
आपको नियुक्ति हेतु निर्धारित परीक्षा उत्तीर्ण करने के नियुक्त होने के 20-25 वर्षों बाद भी परीक्षा में बैठायेंगे ।
अनुभव के आधार पर पदोन्नति तो दूर नौकरी (उस नौकरी में जिसमें नियुक्ति की प्रक्रिया में कोई दोष या आपत्ति नहीं है)में भी आप नहीं रहेंगे ।20-25 lakhलाख शिक्षकों की नौकरी जाये तो जाये उन पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता।
हमने सदैव कहा कि रास्ता संसद से निकलेगा ।इसलिए अब minimum qualification को parliament से define कराने हेतु आगे बढ़ेंगे ।
@narendramodi@AmitShah@dpradhanbjp@myogiadityanath
न्यायमूर्ति दीपंकर दत्ता जी (Deepanker Datta) ने हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जज बनने के लिए कोई परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की है।
भारत में उच्च न्यायपालिका (HC/SC) के जजों की नियुक्ति Collegium प्रणाली से होती है, न कि किसी प्रतियोगी परीक्षा से। बार से practicing advocate को सीधे हाईकोर्ट जज बनाया जा सकता है।
न्यायमूर्ति दत्ता जी 1989 में LLB पास कर advocate बने, ~16 साल वकालत की (कलकत्ता HC सहित)। 2006 में उन्हें कलकत्ता हाईकोर्ट का स्थायी जज नियुक्त किया गया (बार से elevation)। 2020 में बॉम्बे HC के Chief Justice और दिसंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट के जज बने।
यह सामान्य संवैधानिक प्रक्रिया है।
न्यायमूर्ति दीपंकर दत्ता जी (Deepanker Datta) ने हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जज बनने के लिए कोई परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की है।
भारत में उच्च न्यायपालिका (HC/SC) के जजों की नियुक्ति Collegium प्रणाली से होती है, न कि किसी प्रतियोगी परीक्षा से। बार से practicing advocate को सीधे हाईकोर्ट जज बनाया जा सकता है।
न्यायमूर्ति दत्ता जी 1989 में LLB पास कर advocate बने, ~16 साल वकालत की (कलकत्ता HC सहित)। 2006 में उन्हें कलकत्ता हाईकोर्ट का स्थायी जज नियुक्त किया गया (बार से elevation)। 2020 में बॉम्बे HC के Chief Justice और दिसंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट के जज बने।
यह सामान्य संवैधानिक प्रक्रिया है।
@grok कृपया यह बताएँ कि माननीय Supreme court ke न्यायाधीश shri Deepanker Datta जी द्वारा हाईकोर्ट या Supreme court ke जज बनने ke लिए कभी कोई परीक्षा उत्तीर्ण की है अथवा नहीं
श्री सुरेश कुमार त्रिपाठी जी निवर्तमान एम एल सी एवं प्रान्तीय संयोजक उ प्र शिक्षक महासंघ के संयोजन में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित रहकर कार्यक्रम को संबोधित किया ।कार्यक्रम में प्रोफ़ेसर के बी पांडेय पूर्व अध्यक्ष लोक सेवा आयोग,डॉ वी के सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष प्रयागराज,प्रो गिरीश चंद्र त्रिपाठी पूर्व कुलपति बी एच यू,श्री अमरेन्द्र नाथ सिंह पूर्व अध्यक्ष बार एसोसिएशन इलाहाबाद उच्च न्यायालय,श्री के बी तिवारी अध्यक्ष जिला अधिवक्ता संघ प्रयागराज,श्री आर एस वर्मा सेवा निवृत्त आई ए एस,श्री देवेन्द्र श्रीवास्तव राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव टीएफआई एवं जिला अध्यक्ष प्रयागराज श्री अनुज पांडेय जिलाध्यक्ष माध्यमिक शिक्षक संघ प्रयागराज सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे
विद्यालय की साफ़ सफ़ाई के सम्बन्ध में @DmSambhal के स्पष्ट एवं सराहनीय निर्देश ।शिक्षकों के साथ यह कार्य हम सबने विद्यार्थी जीवन में किया है जोकि शिक्षा का ही एक हिस्सा है परंतु वर्तमान में छात्रों द्वारा अपने स्वयं के भोजन किए वर्तन धोने या अपने कक्षा कक्ष में कोई सफाई करने जैसी खबरों पर अनेक शिक्षकों पर कार्रवाई की गई है ।अब इससे राहत मिलेगी ।जिलाधिकारी महोदय को धन्यवाद 🙏
#NoTetBeforRteAct
महाराष्ट्र के दो दो शिक्षक संघ भी आये @TFI4India के साथ
श्री श्रीकांत देशपांडे जी पूर्व एमएलसी एवं संस्थापक अध्यक्ष शिक्षक अघाड़ी विदर्भ प्रदेश
तथा
श्री दत्तात्रेय सावंत पूर्व एमएलसी एवं महासचिव महाराष्ट्र शाला क्रुती समिति महाराष्ट्र से कल दिल्ली स्थित महाराष्ट्र सदन में टेट की अनिवार्यता को समाप्त करने के आंदोलन पर विस्तार से चर्चा हुई,दोनों ही नेताओं ने टीएफआई के प्रयास की सराहना की एवं टीएफआई से संबद्ध होने की इच्छा व्यक्त की ।महाराष्ट्र के दोनों संगठन शीघ्र ही टीएफआई के सदस्य होंगे ।
#NoTetBeforRteAct
महाराष्ट्र के दो दो शिक्षक संघ भी आये @TFI4India के साथ
श्री श्रीकांत देशपांडे जी पूर्व एमएलसी एवं संस्थापक अध्यक्ष शिक्षक अघाड़ी विदर्भ प्रदेश
तथा
श्री दत्तात्रेय सावंत पूर्व एमएलसी एवं महासचिव महाराष्ट्र शाला क्रुती समिति महाराष्ट्र से कल दिल्ली स्थित महाराष्ट्र सदन में टेट की अनिवार्यता को समाप्त करने के आंदोलन पर विस्तार से चर्चा हुई,दोनों ही नेताओं ने टीएफआई के प्रयास की सराहना की एवं टीएफआई से संबद्ध होने की इच्छा व्यक्त की ।महाराष्ट्र के दोनों संगठन शीघ्र ही टीएफआई के सदस्य होंगे ।