मैं एक भागता हुआ दिन हूँ
और रुकती हुई रात-
मैं नहीं जानता हूँ
मैं ढूँढ़ रहा हूँ अपनी शाम
या ढूँढ़ रहा हूँ अपना प्रात!
- श्रीकांत वर्मा
#छोटा_दरवाज़ा#शब्दों_का_सफ़र
कभी-कभी बहुत समझदार लगता है
वो शख्स मुझे,
जैसे उससे ज़्यादा समझदार
इस दुनिया में कोई हो ही नहीं
और कभी-कभी बिल्कुल नासमझ...
नादान, ज़िद्दी, बिल्कुल एक बच्चे-सा,
जो छोटी-छोटी बातों पर रूठ जाता है,
और फिर अपनी ही ख़ामोशी में सिमट जाता है
जब वो रूठ जाता है,
तो मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता,
क्योंकि तब उसके चेहरे से मुस्कान
कुछ यूँ गुम हो जाती है,
जैसे किसी शाम से अचानक धूप रूठ गई हो
और मैंने कभी नहीं चाहा
कि उसके चेहरे से
एक पल के लिए भी यह ख़ुशी दूर हो जाए,
क्योंकि उसकी मुस्कान में ही
मेरे सुकून का एक हिस्सा बसता है
उसके चेहरे की हँसी
मेरी सबसे पसंदीदा चीज़ है,
और उसकी आँखों की चमक,
मेरे हर बिखरे दिन को संवारने का हुनर रखती है।
#सिर्फ़_तुम #खनक_शब्दों_की
जब प्रेम का इज़हार करेंगे हम
हमारी कोई भी महान उपलब्धि
काम नहीं आएगी
काम आएगा सिर्फ़
स्त्री के क़दमों में बैठ
काँपते हाथों से फूल देना
उसकी उत्सुकता फूल में नहीं
हमारे अहं शून्य विनय में होगी
वह देखेगी कितने शालीन होते हैं पुरुष के हाथ
और बच्चे की तरह कितने भोले
हमारी आँखों की पुतलियों में उभर आई
जीने की उत्कट इच्छा में
अपनी ज़िंदगी को तलाशते हुए
थरथराएगा उसके होंठों का लाल रंग
उसका फूल लेना
पूँछ की तरह चिपके हमारे इतिहास को काट देता है
उस क्षण से हम होना शुरू होते हैं
~हेमंत देवलेकर 🌻💌
पहली बारिश ने जब मिट्टी को छुआ,
धरती ने जैसे अपनी चुप्पी तोड़ दी।
हवा में फैली सोंधी महक किसी
पुराने खत की तरह थी,
जिसे बरसों बाद खोला गया हो।
हर बूंद एक याद बनकर उतरी,
और हर सांस में बचपन की
कोई पगडंडी फिर से जीवित हो उठी..........
#छोटा_दरवाज़ा#शब्दों_का_सफ़र
as you get older, you realize that you’re not always right and there’s so many things you could’ve handled better, so many situations where you could’ve been kinder and all you can really do is forgive yourself and let your mistakes make you a better person.
No matter how much effort we make, people rarely appreciate it. Instead, they chase those who don't value them, while our genuine care goes unnoticed 💔💔
एक पेड़ —
जो खड़ा है
मुझसे भी पुराना,
वक़्त की किताब का
सबसे पहला पन्ना बनकर।
उसकी शाखाओं में
मौसमों की स्मृतियाँ ठहरी हैं
और जड़ों में
अनगिनत किस्सों की परछाइयाँ।
पक्षी आते हैं
अपने सपनों के बसेरे बनाते हैं,
लोग गुज़र जाते हैं
पर वह वहीं रहता है
धरती की नब्ज़ थामे।
#छोटा_दरवाज़ा