@DChaurasia2312 तू अपना चरस फूंक और देशी पव्वा पी यार।तेरा इन बातों से क्या लेना देना। देश के हर नागरिक का फ़र्ज़ है कि जो सरकार की कमी देखे तो उसको चेताए। युवा जागरूक हुआ है और गोदी मीडिया व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के चंगुल से निकल शिक्षा के सुधार की मांग कर रहा है। तुम किसी दिन सामने ना पड़ जाना।
@arakshan_hatao1 और ये सारी संपत्ति मुग़लों के समय इन्हीं सवर्णों ने चाटुकारिता कर जनता से हड़प ली थी. उसे वापस जनमानस को सौंप दिया जाय. बाकी का जनता खुद देख लेगी
"हम राजपूत हैं और वो छोटे कास्ट हैं। उनका हक नहीं है हाथ उठाना, फिर भी वो उठाए हैं"
सोचो इस जातिवादी जहर की सोच की लड़की के अंदर बचपन से दलित समाज व जाति को लेकर कितना जहर भरा गया होगा कि इतनी घटिया बात बोल रही है👇🏻
हाथ उठाना फिर किसका हक है, सिर्फ जातिवादियों का?
ब्राह्मण युवक:- भाई साहब आवाज क्यों नहीं उठाते कि एससी-एसटी आयोग खत्म होना चाहिए?
दलित युवक:- जबतक जाति है तबतक आरक्षण व एससी-एसटी एक्ट रहेगा। आप जाति खत्म करो हम लात मार देंगे आरक्षण व एससी-एसटी एक्ट पर। तुम्हारे नेताओं की औकात हो तो जाति खत्म करो
दोनों युवकों में से किसकी बात से आप सहमत हैं??👇🏻
@mktyaggi इतनी मिर्ची लग रही है! ब्राह्मणवादी लोगों को ये बर्दास्त नहीं कि, समाज सुधार कोई और करे, आंदोलन कोई और करे, प्रशंसा इनके अलावा किसी और की हो. खैर, अब बहुत हो चुका. ये new normal है. अब सब साथ साथ आगे बढ़ रहे हैं
भगवा बिकनी पर सबकी भावना आहात हो है काफ़ी हंगामा हो गया...
लेकिन तिरंगा बिकनी पर किसी की भी भावना आहात नहीं हुई देश भर मे कोई हल्ला हंगामा नहीं?
आखिर क्यों??
@KraantiKumar आंबेडकर जी की विरासत को सिर्फ प्रतिमा और संविधान तक सीमित करना उचित नहीं। उनके शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय के विचारों पर भी गंभीर चर्चा होनी चाहिए।
देश में अक्सर डिबेट होते हुए सुनते आ रहा है सरदार वल्लभ भाई पटेल प्रधानमंत्री होते तो क्या होता.
यहां तक सुभाष चंद्र बोस के बारे में भी यही कहा जाता है उन्हें देश का प्रधानमंत्री बनना चाहिए था.
डॉ बाबा साहेब अंबेडकर देश जे प्रथम प्रधानमंत्री बने होते तो क्या होता, इस तरह का डिस्कोर्स कभी कोई डॉ बाबा साहेब अंबेडकर पर चलाता है.
बीजेपी वाले अक्सर कहते हैं सरदार वल्लभ भाई पटेल प्रधानमंत्री होते तो कश्मीर की समस्य नही होती. लेकिन डॉ आंबेडकर को प्रधानमंत्री के रूप में कल्पना करने को कोई तैयार नही है.
डॉ बाबा साहेब अंबेडकर प्रधानमंत्री बनते तो भारत एक विकसित मुल्क जरूर होता. कारण बाबा साहेब ऐसा एजुकेशन मॉडल बनाते जिसमें सभी को समान शिक्षा व्यवस्था होती.
जिस आदमी ने कानून मंत्री बनकर भारत की आधी आबादी यानी महिलाओं को नरक से निकाल कर समान अधिकार दिया, कल्पना कर के देखिए बाबा साहेब प्रधानमंत्री होते भारत आज सुपरपावर होता.
डॉ बाबा साहेब अंबेडकर को सवर्णों ने संविधान निर्मार्ता, फोटो, मूर्ति और ऑटोबायोग्राफी तक सीमित कर दिया गया.
@choudharykrs पहली बात तो ये कि मौर्य उस इलाके से आते थे जहां मोर बहुतायत में होते थे. इसलिए उन्हें मोरिय कहा गया, जो बाद में मौर्य हो गया.
दूसरी ये कि जिस शांतनु और सत्यवती का प्रसंग आपने प्रस्तुत किया है वो तो महाभारत से लिया गया है, जो कि महज़ एक काल्पनिक महाकाव्य है न कि इतिहास