@myogioffice बाबा आपको भी आख़िर सवर्णों से घृणा हो ही गई ना चुनाव जीतने के लिए। क्या आपको अपने कार्यों पर भरोसा न रहा जो अनुसूचित जाति,जनजाति, पिछड़े वर्ग और अल्पसंख्यकों को छात्रवृत्ति के नाम पर चुनावी रिश्वत बाँटना पड़ गया
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आज जंतर मंतर पर दिल्ली पुलिस ने गुंडों को जो पेला है और बता दिया कि अगर राजनीति का दबाव ना हो तो किसी साले गांडू की मजाल नहीं कि वो कहीं भी कोहराम मचा सके। मोदी को जो अपमान कीड़े कॉकरोचों ने किया था उससे सबक लेकर पुलिस को पेलने का फ्री हैंड दे दिया और सारे पेले गए।
#जंतर_मंतर_धरना_दो_अक्टूबर
मोदी का भजन क्लबिंग और जेन ज़ी
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अभिजीत दीपके, चंद्रशेखर जाटव जैसे भस्मासुरों को पैदा करने के बाद और उनके द्वारा किए जा रहे कुकृत्यों से मोदी का आसन ऐसा डोला की सन्निपात की स्थिति में पहुंच गए हैं महामानव। मोदी को सूझ ही नहीं रहा है कि कैसे स्थिति को अपने नियंत्रण में ले आएं।
2024 में मोदी हार के बाद ही मूर्छित अवस्था में आ गए थे और उल्टे सीधे बोल पर उतर आए। दलितों को अपने पाले में लाने के लिए जनवरी 2026 में यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन ले आए। इसकी इतनी भयानक प्रतिक्रिया सवर्णों द्वारा हुई कि मोदी के हाथ पांव फूल गए और सवर्णों के प्रदर्शनों पर पुलिस बल का प्रयोग कर रोक लगवाया। मोदी के चाटुकार यूजीसी के समर्थन में बोलने लगे जिससे सवर्ण और आग बबूला हो गए। इसी बीच नीट का पेपर लीक हुआ,चीफ जस्टिस ने फालतू जनहित याचिका और फर्जी रील बना कर अफवाह फैलाने वालों को "कॉकरोच" कह दिया। इस पर अमेरिका में बैठे अभिजीत दीपके ने इंस्टाग्राम पर "कॉकरोच जनता पार्टी" का पेज बनाया और देखते ही देखते उस पर 3 करोड़ के करीब लोग जुड़ गए।
फिर नीट पेपर लीक को लेकर जंतर मंतर पर अभिजीत दीपके धरने पर बैठ गया। मोदी ने उनको फ्री हैंड दे दिया,उसके पीछे कारण ये था कि उसी समय राम मंदिर चंदा चोरी विवाद चरम पर था और उससे ध्यान भटकाने के लिए मोदी कॉकरोचों पर मेहरबान था।
20 जुलाई 2026 को संसद मार्च के दौरान प्रचंड लाठी चार्ज हुआ। आखिरकार मोदी ने प्रधान को डिसमिस किया,सुप्रीम कोर्ट के दबाव में सारे एफआईआर निरस्त किए, इंस्टाग्राम पर कॉकरोचों से माफी मांगी।
मोदी ने एक और घिनौना कृत्य किया 2018 में जब सवर्णों के साथ छल करते हुए एससीएसटी मुकदमों के लिए 8 लाख मुआवजा का प्रावधान कर दिया और "मोदी दलित धन उगाही एक्ट" ब्लैकमेल के लिए जोर शोर से प्रयोग में आ गया।
इधर यूजीसी,कॉकरोच,सवर्ण आंदोलन चल ही रहा था कि मोदी ने एससीएसटी मुकदमों के मुआवजा राशि को 12 लाख कर दिया। आज देश में जातीय गृह युद्ध छिड़ चुका है। कई हत्याएं हो गईं हैं।
इधर देश जल रहा है उधर मोदी रंगीले शाह की तरह नर्तकियों के बीच झूम रहा है या नीरो की तरह बंसी तो नहीं खजड़ी बजा रहा है।
कल से इसके चाटुकार इसके भजन क्लबिंग का भजन गा रहे हैं और बताते नहीं थक रहे हैं कि "जेन जी मोदी को बहुत प्यार कटे हैं" और इसने उस भजन के दौरान अपने अगल बगल में लड़कियों को बिठा रखा है और खजड़ी बजा रहा है। इसके मुखमंडल के पोर पोर से आध्यात्मिकता की जगह कामुकता टपकती दिख रही है और हाव भाव को देख कर मुझे भगवती चरण वर्मा के "चित्रलेखा" के संत बने किरदार की याद आती है जो वेश्या के प्रेम में पागल हो पतन के गर्त में गिर जाता है।
मोदी का समय अब समाप्त हो चुका है।
अधिवक्ता संतोष पाण्डेय
दिल्ली उच्च न्यायालय
२५/०९/२०२६
मोदी जी ने सबसे सफल स्टार्ट अप योजना शुरू की है नाम है “मोदी सवर्ण-पिछड़ा उत्पीड़क प्रक्रम”। दलितों को पथरी,कैंसर,टीबी, बच्चा पैदाइश, हाइड्रोसील ऑपरेशन, बेटी का ब्याह; खर्चा निकालने के लिए सवर्णों,पिछड़ों पर मोदी एक्ट लगाओ। पाँच लाख पीड़ित से लो और बारह लाख मोदी से, हो गया काम
#scst_act_misuse
#maharashtra_iit_farzi_case
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