होर्मुज़ स्ट्रेट में संकट के बाद रेड सी दुनिया के लिए तेल सप्लाई का सबसे बड़ा विकल्प बनकर उभरा था.
लेकिन अब यमन में हूती लड़ाकों की बढ़ती पकड़ और सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन पर ड्रोन हमले ने उस विकल्प पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.
रेड सी, बाब-अल-मंदेब और सऊदी पाइपलाइन का कनेक्शन क्या है?
हूतियों की बढ़ती ताक़त का तेल सप्लाई पर क्या असर पड़ सकता है?
ईरान, अमेरिका और सऊदी अरब का टकराव अब दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा को कैसे प्रभावित कर रहा है?
इन तमाम मुद्दों को समझा रहे हैं बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के एडिटर नितिन श्रीवास्तव (@Tweetnitins )
एडिट: सदफ़ ख़ान (@SadafKhan_SK )
69,000 शिक्षक भर्ती आरक्षण घोटाला : यूपी का ‘व्यापम घोटाला’ या आरक्षण के हक़ पर सुनियोजित हमला?
2019 की भर्ती, 2020 से आंदोलन और आज तक न्याय का इंतज़ार। पिछड़े-दलित अभ्यर्थी अपना संवैधानिक हक़ माँगते-माँगते सड़कों से आयोग और अदालतों तक पहुँच गए, ले���िन सत्ता के दरवाज़े उनके लिए नहीं खुले।
पहले योगी सरकार आरक्षण में गड़बड़ी के आरोपों को नकारती रही। पिछड़ा वर्ग आयोग तक को धता बताती रही। जब आंदोलन तेज हुआ, दबाव बढ़ा और सवालों से बचना मुश्किल हुआ, तब समाधान देने के बजाय अभ्यर्थियों को ऐसी कानूनी लड़ाई में धकेल दिया गया, जिसका अंत आज भी उन्हें दिखाई नहीं देता
@thewirehindi ने इसी संघर्ष की कहानी आंदोलनकारी अभ्यर्थियों विक्रम यादव, अमित मौर्य और धनंजय गुप्ता से बातचीत के जरिए सामने रखी है। उनकी बात सुनिए। यह सिर्फ़ 69,000 पदों की कहानी नहीं है; यह समझने की कहानी है कि उत्तर प्रदेश में आरक्षण और सामाजिक न्याय के सवाल पर व्यवस्था ने इन युवाओं को छह साल तक कैसे भटकाया।
योगी सरकार जवाब दो कि आरक्षण कागज़ पर रहेगा या हक़दार को मिलेगा भी? नौकरी माँगी थी, छह साल का संघर्ष क्यों मिला? संविधान न��� हिस्सेदारी दी थी, सरकार उसे सुनिश्चित कब करेगी?
(पूरी बातचीत का लिंक- https://t.co/VzOtalThzk)
#69000शिक्षक_भर्ती_आरक्षण_घोटाला
मोदी सरकार ने चुपचाप UPI पर फ़ीस लगाने का रास्ता खोल दिया है।
अब ₹2,000 से ऊपर के merchant UPI लेन-देन पर MDR लगाया जा सकता है। इन ट्रांजैक्शंस की संख्या भले ही सिर्फ़ 5% हो, लेकिन UPI के कुल transaction value का करीब 65% इन्हीं में है।
सरकार कहती है कि ग्राहक से कोई फ़ीस नहीं ली जाएगी। लेकिन दुकानदार पर लगने वाली फ़ीस आखिर आएगी कहां से? कीमतों मे��� जुड़कर ग्राहक की जेब से।
अमेरिकी payment कंपनियां लंबे समय से भारत की zero-MDR नीति का विरोध करती रही हैं। अब मोदी सरकार ने ठीक उसी दिशा में नीति बदलने का रास्ता खोल दिया है।
US Trade Deal की तरह ही, Compromised PM मोदी एक बार फिर अमेरिकी दबाव के सामने surrender कर रहे हैं।
UPI पेमेंट पर चार्ज के मामले में अश्नीर ग्रोवर ने सरकार की पोल खोल दी है...जरूर सुनिए और पक्का आज अश्नीर ग्रोवर को चैनल पर बुलाए जाने के लिए कुछ लोगों को डांट पड़ेगी।
'बस हमारी जान सुरक्षित है, उसके अलावा कुछ बाकी नहीं रहा'
उत्तर प्रदेश के हाथरस में करीब छह साल पहले एक दलित युवती से गैंगरेप और हत्या के बा�� अब उनके परिवार का क्या हाल है?
रिपोर्टः गौरव गुलमोहर
शूट/एडिटः तेज बहादुर सिंह
राष्ट्रीय एकता यात्रा के अंतर्गत राष्ट्रपति भवन में आए मंगन, उत्तरी सिक्किम के विद्यार्थियों और युवाओं के एक समूह की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से भेंट की झलकियां
इंडोनेशिया, अनाक क्राकाटाऊ में एक और विस्फोट रविवार, 6 सितंबर 2026 को अनाक क्राकाटाऊ ज्वालामुखी में ज़बरदस्त विस्फोट हुआ।
यह गतिविधि लगातार दूसरे दिन भी जारी रही और ज्वालामुखी की राख के घने बादल उठते द���खे गए। र
आखिर इन बच्चों क�� क्या खता थी कि इन पर बंदूकें तान दी गईं? इनकी मांग सिर्फ इतनी थी—शिक्षा, रोजगार और हुकूमत की जवाबदेही।
AK-47 की एक गोली ने एक छात्र का पैर ही नहीं तोड़ा, बल्कि देश की सेवा करने का उसका जज्बा और सपना भी चूर कर दिया। दो और छात्रों के कंधों से गोलियां आर-पार हो गईं।
ये कोई मुजरिम नहीं थे, बल्कि उन तंगहाल परिवारों के चिराग थे जो अपनों का कल संवारने निकले थे।
शारीरि�� घाव तो समय के साथ भर जाएंगे, पर मन में बैठे इस खौफ का इलाज किस अस्पताल में होगा?
श्यामलाल यादव जी देश के सबसे बड़े पत्रकार हैं,
RTI में उनका सानी दुनिया मानती है,
India Today, इंडियन एक्सप्रेस जैसे बड़े संस्थानों में क़ाम कर चुके हैं,
लेकिन आपने इनको कभी Tv डिबेट्स में नहीं देखा होगा,
वहाँ सिर्फ हर्षवर्धन त्रिपाठी जैसे स्टिंगर्स बुलाए जाते हैं,
श्यामलाल यादव के सामने जिनकी हैसियत इंटर्न जैसी भी नहीं है,
क्योंकि सबको पता है कि
अपने तर्क और तथ्यों से श्यामलाल यादव
कथित मेरिट की सब पोल खोल देंगे
जैसे आज खोल रहे हैं,
आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।
साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर 'सब कुछ' पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।
बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि 'असंभव' कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्या��ग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है।
मूर्ख थी जो सोचा था कि कुछ देने आयी हूँ। सच यह है कि सबसे ज़्यादा मैंने ही पाया, और वो कर्ज़ और भी बढ़ता गया। लोग मेरी ख़ुशी में मुझसे ज़्यादा ख़ुश हुए। उन्होंने मुझे तब भी उसी विश्वास से देखा, जब मैं खुद ही थक�� या टूटी थी। और इसी ने आगे बढ़ते रहने की हिम्मत दी। इतना प्यार, इतना सम्मान, इतना अपनापन मिला, कि मेरी झोली पूरी भर गयी। और इसमें उन साथियों, अधिकारियों और कर्मचारियों का भी बहुत बड़ा श्रेय है जिन्होंने मेरे कंधे से कंधा मिलाकर काम किया और साथ डटे रहे।
आज आभार से आँखें नम हैं। बस एक दृश्य इनमें बसा है। लहुरिया दह की पहाड़ी क��� वो वृद्ध माँ, जो अपने गाँव में पहली बार पानी पहुँचता देख कुछ नहीं बोली, बस काँपते हाथों से मेरा सिर छूकर आशीर्वाद दे गई। पद तो आज छूट गया, पर वह स्पर्श जीवन भर नहीं छूटेगा। और वह सपना भी नहीं छूटेगा, जो देश की इस मिट्टी ने मुझे दिया है।
आपकी अपनी,
दिव्या मित्तल