आंबेडकरवाद और बहुजन एकता की बखिया उधेड़ते उदित राज जी
उदित राज स्वयं खटीक समाज से आते हैं। जातंकी इनकी जाति को जाटव समाज से नीचे मानते है। खटीक समाज के साथ भेदभाव करते है। ये सब झेला है इन्होंने। ये बता रहे है कैसे एक दलित जाति दूसरी दलित से भेदभाव करती हैं।
जो टिकट मांगने का प्रकरण उदित जी ने बताया है वो वाक्या मायावती जाटव और ओमप्रकाश राजभर का है। ओमप्रकाश राजभर टिकट मांगने मायावती जाटव के पास जाते है। मायावती जाटव ओमप्रकाश राजभर को कहती है जाओ अपनी जाति के लोगों को इक्कठा करो। ओमप्रकाश राजभर अपने लोगो को इकठ्ठा करने ने धन ,संसाधन फूंकते है इतने में टिकट जाटव समाज के व्यक्ति को दे दिया जाता है। राजभर समाज मुंह देखता रह जाता है। फिर ओमप्रकाश राजभर अपनी अलग पार्टी बनाते है। ये सब बाते ओमप्रकाश राजभर ने एक इंटरव्यू में कही है। कहो तो वो वीडियो भी आपको दे दूंगा।
ज्ञानेश कुमार को 'देश का गद्दार' बोला जा रहा है क्योंकि एक अख़बार ने, जो परंपरागत रूप से सनसनी फैलाने वाले समाचार छापता रहा है, यह लिखा कि दो चुनाव आयुक्तों ने 14 बार असहमति जतायी। 5 जजों की बेंच में दो असहमत हो तो बेंच का निर्णय ग़लत नहीं हो जाता।
दूसरी बात, असहमत होना चर्चा का एक मुख्य अंग है। प्रश्न यह होना चाहिए कि क्या असहमति का निवारण हुआ या नहीं? चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण आ चुका है कि हर निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया है। अब आपका प्रश्न होगा कि आप चुनाव आयोग की बात क्यों मानेंगे?
उत्तर यह है कि यदि आपको आज भी राहुल गाँधी और चुनाव आयोग में चुनना पड़ रहा है तो आपकी मति मारी गई है। यदि तिलचट्टे इसमें नाचने के लिए तैयार हैं तो आप समझ जाइए कि कुछ भी ग़लत नहीं हुआ है।
दुर्भाग्य यह है कि मीडिया में दक्षिण टोले के पत्रकार भी ज्ञानेश कुमार की जान लेने को उतारू हैं, वह भी बिना किसी तर्क के। मेरा मत यह है कि यदि सरकार 2003-04-05 के बाद SIR करवा रही है, तो वह तो डेमोग्राफिक संकट से उबरने का सबसे अच्छा मार्ग था और यह साबित भी हुआ है।
ज्ञानेश कुमार ने मृतक, डुप्लीकेट और विस्थापित वोटरों के नाम पर हो रही धाँधली को रोका है और इस कारण उन्हें यदि वामपंथी गद्दार कह रहे हैं, तो आप मान कर चलिए कि बंदे ने सही काम किया होगा। IAS लोगों को नोट लिखने का अच्छा शौक होता है, ताकि लगे कि काम हो रहा है।
कोई इस सामान्य प्रक्रिया को ऐसे प्रस्तुत करे कि कुछ आउट ऑफ़ द ब्लू हो गया, तो उन्हें गंभीरता से लेने की आवश्यकता नहीं है।
इसके साथ ही, देश में अभी तिलचट्टा से ले कर रावण तक, सत्ता की चूलें हिलाने के लिए आंदोलन के लिए कुछ अवसर ढूँढ रहे हैं। शीतकालीन सत्र भी बहुत दूर है, तो व्यस्तता बढ़ाने के लिए कुछ तो करना पड़ेगा ही। इसीलिए, 'चक दे इंडिया' से 'गद्दार ज्ञानेश' की बकलोली हो रही है।
यह सब हाशिए पर जा चुके वामपंथियों और अपना अस्तित्व तलाश रहे काँग्रेसियों का षड्यंत्र मात्र है।
@AturKumar@ajeetbharti West Bengal and Kerala me hi law nahi he gay ka protection ka , waha bjp ki government nahi he,
Aapa log bjp hare to khus hoto wa ye kesi murkhata he,
Ews reservation modi ne hi Diya he.
@AakashThakur92 @ajeetbharti @8PM_24x7SERVICE Ugc aabhi 2012 ka laguhe,
Open category ki murkhata ki reason che,
Or logo patabhi nahihe 2025 wala aacha he,
@corruption44161@ajeetbharti Reservation jaruri nahi he ,
Pehale qualified person ko select hone do bad me usa logo kobolana ke tum aapaki seat reserve category ko do.
आज जिस कांग्रेसी सरकार के कर्ज से पीएम मोदी ने भारत को मुक्ति दिलायी है, उस कर्ज को लेते समय मनमोहन सिंह ने कहा था कि, तेल की कीमतें कम करने की वजह से जो कर्ज़ बना है, उसे आने वाली पीढ़ी चुकाएगी। यह मत भूलिए कि UPA ने आपको स्कूल की पढ़ाई पूरी करने से पहले ही कर्ज़ में डुबो दिया था।
मनमोहन सिंह ने तब कहा था कि....
मेरे प्यारे देशवासियों, मैं जानता हूँ कि आज हमें जिन कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान करना पड़ा है, वे शायद लोगों को पसंद न आएँ, भले ही यह बढ़ोतरी बहुत मामूली ही क्यों न हो। आपको यह याद रखना चाहिए कि सरकार ही ऑयल बॉन्ड्स जारी करने का बोझ उठा रही है। हमारी तेल कंपनियाँ बहुत बड़ी कुर्बानी दे रही हैं और उन पर बहुत ज़्यादा दबाव है। हालाँकि, मैं चाहता हूँ कि देश यह बात याद रखे कि बॉन्ड्स जारी करना और तेल कंपनियों पर घाटे का बोझ डालना, इस समस्या का कोई पक्का हल नहीं है। हम तो बस अपना बोझ अपने बच्चों पर डाल रहे हैं, जिन्हें आगे चलकर यह कर्ज़ चुकाना पड़ेगा।