अक्सर जहाँ प्रेम होता है वहाँ संघर्ष भी होता है…
लेकिन जिस समय संघर्ष होता है उस समय प्रेम का विस्मरण हो जाता है…
और फिर इच्छाएँ, अहंकार और क्रोध जागता है लेकिन प्रेम नहीं जागता…
क्यूंकि जहाँ प्रेम जागता है वहाँ सारे विवाद और संघर्ष नष्ट हो जाते हैं..
जब सरकार न सुनेगी बच्चों की आवाज़…
तब विपक्ष को सड़कों पर आना ही होगा!
मुखिया जी के दरवाज़े पर जाना ही होगा!
जब बच्चों पे बेरहमी से होगा निर्मम वार…
तब विपक्ष को सड़कों पर आना ही होगा!
मुखिया जी के दरवाज़े पर जाना ही होगा!
जब सरेआम बच्चियों के फटेंगे लिबास…
तब विपक्ष को सड़कों पर आना ही होगा!
मुखिया जी के दरवाज़े पर जाना ही होगा!
जब करोगे दुखी माँ-बाप पर भी प्रहार…
तब विपक्ष को सड़कों पर आना ही होगा!
मुखिया जी के दरवाज़े पर जाना ही होगा!
जब हर एक नौजवां होगा हताश-निराश…
तब विपक्ष को सड़कों पर आना ही होगा!
मुखिया जी के दरवाज़े पर जाना ही होगा!
जब सत्ता का अहंकार होगा हद से पार…
तब विपक्ष को सड़कों पर आना ही होगा!
मुखिया जी के दरवाज़े पर जाना ही होगा!
जब सरकार बंद कर लेगी संसद के द्वार…
तब विपक्ष को सड़कों पर आना ही होगा!
मुखिया जी के दरवाज़े पर जाना ही होगा!
जब मौक़ा नहीं दोगे, न संसद में न बाहर…
तब विपक्ष को सड़कों पर आना ही होगा!
मुखिया जी के दरवाज़े पर जाना ही होगा!
जब लोग पूछते हैं कि आप क्यों शिक्षक होने पर ऐसा गुमान करते हैं ? तो नेहा @neha_aisa की इस तक़रीर को सुनिए. हमें शिक्षक होने पर गुमान होता है क्यों ये प्रोफेशन हमने मौका देता है कि हम इस देश समाज को नेहा जैसे युवा तैयार कर दे सकें. हफ़्तों के अनशन और सरकारी दमन के बावजूद इस बहादुर लड़की को पता है कि इतिहास किसे कैसे दर्ज करेगा.
मोर पॉवर टू यू कॉमरेड ✊
वे सारे लड़के, अर्जुन तो थे
बस उनके हिस्से कृष्ण नहीं आये
उनके हिस्से आया
रोज का डेढ़ जीबी इंटरनेट
उन्होंने अपने कृष्ण को खूब तलाशा
कभी किसी youtuber की बातों में
तो कभी सौ रुपये की जिंदगी बदल देने वाली किताबों में
लेकिन, इन installment में मिली गीता ज्ञान ने
उन्हें अध्यात्म कम, capitalism ज्यादा सिखाया
कृष्ण के अभाव में
ये अर्जुन नहीं कर पाये
सगे दुर्यधनों, दुःशासनों का वध
अपने ही दिमाग में इन्होंने
किया कौरवों का पोषण
किसी द्रोणाचार्य ने नहीं दिया
इन्हें सर्वश्रेष्ठ बनाने का वचन
ये निहारते रहे मछली का जिस्म
द्रौपदियों ने किया, आखिरी वक़्त में इन्हें इंकार
जताया इनके काबिलियत पर संदेह
ये सारे अर्जुन, अलसाकर अनमने से
फिलहाल निपटा रहे हैं Netflix
कर रहे हैं सरकारी वेकैंसी का इंतजार
एकलव्यों का आगे निकलना इन्हें खलता है
ये कोसते हैं आरक्षण को
ये बेचारे हैं confuse
इंटरनेट पर ढूँढ रहे हैं सबसे खतरनाक हथियार
लेकिन मुझे है यकीन
एक रोज, ये उठेगें अचानक से
इन्हें याद आयेगा कि ये चला सकते हैं धनुष
रखकर Redmi का फोन, उठा लेंगे गांडीव
तोड़ देंगे चक्रव्यूह और निकल आयेंगे बाहर
क्योंकि, चक्रव्यूह से बाहर निकलना अर्जुन को आता था
ऐसा महाभारत हमें बताती है।
• पंक्ति ऐप अभिनव झा की एक पोस्ट (आप भी अपनी पंक्तियां pankti App पर साझा करें)
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On this day, May 14, 1995, His Holiness the 14th Dalai Lama officially recognised six-year-old Gedhun Choekyi Nyima as the 11th Panchen Lama of Tibet. Merely three days later, on May 17, 11th Panchen Lama and his parents were taken into custody by Chinese authorities and vanished from public view. The Chinese government later confirmed they were being held in an undisclosed location, citing concerns for their safety. Yet, for the past 30 years, Gedhun Choekyi Nyima’s whereabouts and condition have remained unknown, making him one of the world’s longest-standing cases of enforced disappearance.
जब लोग असरदारों के सामने गिरे, झुके, घिघिया रहे थे
और अपनी तरफ़दारियाँ चुन रहे थे
मैं प्रेम में था!
मुझे इसके लिए
आज भी लज्जित किया जाता है
शुक्र है
मैं बदनाम दुनियादारी के लिए नहीं हुआ।
- अरुण देव
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