7 वर्षीय संत घीसा दास जी गाँव खेखड़ा (जिला मेरठ, उत्तरप्रदेश) को सन् 1813 में संत दादू जी, संत गरीबदास जी की तरह कबीर परमेश्वर जिंदा महात्मा के रूप में मिले व उन्हें सतलोक दिखाया।
7 वर्षीय संत घीसा दास जी गाँव खेखड़ा (जिला मेरठ, उत्तरप्रदेश) को सन् 1813 में संत दादू जी, संत गरीबदास जी की तरह कबीर परमेश्वर जिंदा महात्मा के रूप में मिले व उन्हें सतलोक दिखाया।
#किस_किस_को_मिले_भगवान
"हनुमान जी को भी मिले थे कबीर परमात्मा"
कबीर सागर के "हनुमान बोध" में परमेश्वर कबीर साहेब द्वारा हनुमान जी को शरण में लेने का विवरण है। परमेश्वर कबीर जी ने हनुमान जी को शरण में लेकर उनमें सत्य भक्ति बीज डाला।
--22 June God Kabir Prakat Diwas
@SaintRampalJiM
#किस_किस_को_मिले_भगवान
Parmeshwar Kabir had also appeared to Hazrat Muhammad ji. Kabir Saheb also took Hazrat Muhammad ji to Satlok and introduced him to the real condition of all the worlds.
22 June God Kabir Prakat Diwas
आदरणीय संत गरीबदास जी महाराज को सन् 1727 में 10 वर्ष की आयु में गांव छुड़ानी के नला नामक स्थान पर कबीर परमेश्वर जिंदा महात्मा के वेश में मिले। तत्वज्ञान से परिचित कराकर सतलोक दर्शन करवाकर साक्षी बनाया।
अजब नगर में ले गए, हमको सतगुरु आन।
झिलके बिम्ब अगाध गति, सूते चादर तान।।
अनंत
600 साल पहले ���बीर परमात्मा विक्रमी संवत् 1455 (1398 ई.) ज्येष्ठ मास की पूर्णमासी के दिन काशी शहर में लहरतारा तालाब में अवतरित हुये। और काशी के नीरू नीमा नामक नि:सन्तान दंपती को मिले।
#किस_किस_को_मिले_भगवान
Chaaro yug mein Mere Sant pukaare,
kuk kahaya Hum hel re l
Heere Maanik Moti barse,
ye jag chughta dhel re ll
Meaning: In all the four Yugas, God Kabir Ji and His true Saints uttered the correct spiritual Knowledge to all the world. But this world, not
600 साल पहले कबीर परमात्मा वि��्रमी संवत् 1455 (1398 ई.) ज्येष्ठ मास की पूर्णमासी के दिन काशी शहर में लहरतारा तालाब में अवतरित हुये। और काशी के नीरू नीमा नामक नि:सन्तान दंपती को मिले।
कबीरा कुंआ एक है, पानी भर��ं अनेक ।
बर्तन में ही भेद है, पानी सबमें एक ॥
हिन्दू कहें मोहि राम पियारा, तुर्क कहें रहमाना ।
आपस में दोउ लड़ी-लड़ी मुए, मरम न कोउ जाना ।
हिन्दु मैं हूं नाहीं, मुसलमान भी नाहीं।
पंच तत्व का पुतला हूं, गैबि खेले माहीं।।
कंकड़ पत्थर जोड़कर मस्जिद लाय
कबीर, जिव्हा तो वो��े भली, जो रटै हरिनाम।
ना तो काट के फैंक दियो, मुख में भलो ना चाम।।
जैसे जीभ शरीर का बहुत महत्वपूर्ण अंग है। यदि परमात्मा का गुणगान तथा नाम-जाप के लिए प्रयोग नहीं किया जाता है तो व्यर्थ है।
Kabir Prakat Diwas 24 Juneकबीरा कुंआ एक है, पानी भरें अनेक ।
बर्तन में
#सत_भक्ति_संदेश़
कबीर साहेब कहते हैं कि मेरा यह ज्ञान ऐसा है कि यदि ज्��ानी पुरुष होगा तो इसे सुनकर हृदय में बसा लेगा और यदि मूर्ख होगा तो उसकी समझ से बाहर है।
#SantRampalJiM
कबीर, जिव्हा तो वोहे भली, जो रटै हरिनाम।
ना तो काट के फैंक दियो, मुख में भलो ना चाम।।
जैसे जीभ शरीर का बहुत महत्वपूर्ण अंग है। यदि परमात्मा का गुणगान तथा नाम-जाप के लिए प्रयोग नहीं किया जाता है तो व्यर्थ है।
Kabir Prakat Diwas 24 June