- जिनकी आँख का पानी मर गया है वो अंहकारी लोग ‘दुखी माँ’ का अपमान करते रहेंगे
- चढ़ावा चोर ‘भाजपाई’ मंदिरों में ही नहीं बल्कि माँ गंगा की सफ़ाई में भी चोरी करते रहेंगे
- प्रभुत्ववादी लोग ‘पीडीए’ को अपमानित करने के लिए गंगा जल से आवास, मंदिर परिसर, चौराहे और मंच धुलवाते रहेंगे
- युवाओं पर ये भाजपाई लाठियाँ बरसाते रहेंगे
- ये भाजपाई पूज्य शंकाराचार्य तक पर प्रहार-आरोप लगाते रहेंगे
- भाजपाई घूसख़ोरी की वजह से पुल, टंकी, एक्सप्रेसवे सब पानी में मिलते रहेंगे
- तालाबों को भाजपाई क़ब्ज़े सुखा देंगे लेकिन भाजपाइयों के महा-भ्रष्टाचार की वजह से सड़कें तालाब बनतीं रहेंगी
जनता आज की हर समस्या की जड़ भाजपा को मानकर, इस बार भाजपा को हमेशा के लिए हराने-हटाने के लिए अपने वोट का ‘मुक्ति पत्र’ बाँटेगी।
भाजपा इस बार जाएगी, तो फिर कभी नहीं आएगी।
जनता अब वनस्पतिजीवियों का भाषण सुनने के मूड में नहीं है।
मंच से लाखों-करोड़ों सनातनियों की आस्था के प्रतीक, एक अति पूजनीय के प्रति ‘एक बेहद आपत्तिजनक शब्द’ का इस्तेमाल करके किसी ने दिखा दिया है कि सत्ता के अहंकार ने किस तरह उनकी बुद्धि भ्रष्ट कर दी है।
सनातन समाज आज से पहले इतना अधिक अपमानित कभी नहीं हुआ। आज सनातन समाज का हर धर्म प्रधान विचारशील व्यक्ति अपमान के इस घूंट को मजबूर होकर पीने व सरेआम बेइज़्ज़त किये जाने से बेहद दुखी है। वो सभी लोग लज्जित भी हैं जिन्होंने आज तक भाजपा का समर्थन करने के लिए कोई कुतर्क तक नहीं छोड़ा था। ये निकृष्ट टिप्पणी संपूर्ण समाज के मान-सम्मान और गरिमा-प्रतिष्ठा को दी गई सीधी चुनौती है।
अब यही समाज अपने सम्मान की रक्षा के लिए सत्ताधीश के ‘पद के मद’ को चूर-चूर कर देगा। अब तो इनके संगी-साथी भी इस शाब्दिक प्रहार से किसी को मुँह दिखाने लायक नहीं बचे हैं।
आज के सत्ताधीश जान रहे हैं कि ये हारनेवाले हैं, इसीलिए जाते-जाते ये किसी और की संभावना को भी हमेशा के लिए ख़त्म कर रहे हैं। पुरानी कहावत है जो ख़ुद नहीं खा पाता है वो फैलाकर जाता है। एक नितांत एकाकी और घोर वर्चस्ववादी का घमंड अपने सिवा किसी को कुछ नहीं मानता है लेकिन कुछ नकारात्मक लोग उससे भी ज़्यादा गये गुजरे होते हैं, वो लोग आइने में दिख रहे प्रतिबिंब के भी सगे नहीं होते हैं।
दंभ के दिन लद गए।
इस वीडियो में असली बात सामने की लड़ाई नहीं है… ध्यान से देखिए असली प्रतीकात्मक बात पीछे बैकग्राउंड में खड़ा बुलडोज़र है। भाजपा राज में पुलिस-वकील की लड़ाई सबको मालूम है और ये भी कि उसके पीछे बुलडोज़र है। इस वीडियो के डायरेक्टर को तो इनाम मिलना चाहिए।
एक बार संगी-साथी ख़ुद की निगेटिव रिपोर्ट भी दिखवा लें : ये कहना है उत्तर प्रदेश के उन 200 से भी अधिक महा भ्रष्ट और बेईमान भाजपाई विधायकों का जिनकी टिकट उनकी बदनामी-नाकामी की वजह से काटी जा रही है।
जो थोड़े कम बेशर्म और बदनाम हैं वो भाजपाई विधायक भी कह रहे हैं कि संगी-साथियों ने राममंदिर में चोरी करवाकर और दूर राज्य में बोरी पहुँचाकर और अपने लोगों को जाँच में क्लीन चिट दिलवाकर सनातन समाज से जो चीटिंग की है, उसके बाद वो अपने घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं, तो वोट माँगने कैसे जाएंगे। जनता भाजपाइयों को देखते ही कह रही है:
वो जा रहा भाजपाई, जिसने चुराई राम की पाई!
#जो_भाजपा_का_साथी_वो_रामघाती
#अयोध्या_क्लीन_चिट_की_चीटिंग
भाजपाई अभी मच्छी मार रहे हैं,
उप्र चुनाव के बाद मक्खी मारेंगे
अब इनकी सरकार में एक झगड़ा और शुरू हो जाएगा, पहले से नाराज़ चल रहे मत्स्य मंत्री जी कहेंगे ‘गंगा एक्सप्रेसवे’ को हमारे मंत्रालय को सौंप दिया जाए। मछली शहर वाले इस पर अपना दावा अलग ठोकेंगे।
भाजपा के राज में लोग जलमग्न एक्सप्रेसवे पर मछली पकड़ रहे हैं। अब मुख्यमंत्री जी कहेंगे देखो हमने लोगों को नया रोज़गार दे दिया।
सुना है उप्र की भाजपा सरकार अब एक्सप्रेसवे के साथ-साथ लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर में सड़कों और हाईवे पर नये बोर्ड लगाने जा रही है जिन पर ‘नाव’ और ‘तैरने’ की अधिकतम गति सीमा लिखी जाएगी।
अपनी सलाह फिर दोहराते हैं : इस बार भाजपाइयों को जब माँ गंगा बुलाएं तो गंगा एक्सप्रेसवे से मत जाइएगा।
शहरों में जलभराव का मुख्य कारण अधिक वर्षा नहीं बल्कि भाजपाई भ्रष्टाचार की वजह से जलनिकासी की व्यवस्था का फ़ेल हो जाना है। नाली से लेकर नाले तक गंदगी से जाम हैं तो पानी निकलेगा कहाँ से।
विभिन्न तरह के प्रदूषण व नालों के नदियों में गिरने की वजह से नदियों का बहाव गाद के जमा होने की वजह से बुरी तरह बाधित हुआ है। बंधा बनाकर उफनती नदी के पानी को रोकना कोई कारगर उपाय नहीं है। हम भविष्य में नदियों की गाद हटाकर उनको गहरा करने का काम करेंगे जिससे नदियाँ अविरल मतलब बिना किसी रुकावट के प्राकृतिक रूप से बह सकें और उनके अंदर के जीव-जंतु व इकोसिस्टम से नदियाँ स्वयं निर्मल हो सकें।
राजधानी लखनऊ हो या स्मार्ट सिटी गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज जैसे बड़े अन्य शहर सब जगह हाल-बेहाल है। गंदगी से बीमारी फैलने का डर भी है। विशेष रूप से नदी के किनारे बसे व नदीय अर्थव्यवस्था पर आधारित लोगों का जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
ऐसा लगता है कि भाजपा सरकार की आँख का पानी भी बहकर जलराशि को बढ़ा रहा है।
भाजपा जाएगी, नदी जीवन पाएगी।
शहरों में जलभराव का मुख्य कारण अधिक वर्षा नहीं बल्कि भाजपाई भ्रष्टाचार की वजह से जलनिकासी की व्यवस्था का फ़ेल हो जाना है। नाली से लेकर नाले तक गंदगी से जाम हैं तो पानी निकलेगा कहाँ से।
विभिन्न तरह के प्रदूषण व नालों के नदियों में गिरने की वजह से नदियों का बहाव गाद के जमा होने की वजह से बुरी तरह बाधित हुआ है। बंधा बनाकर उफनती नदी के पानी को रोकना कोई कारगर उपाय नहीं है। हम भविष्य में नदियों की गाद हटाकर उनको गहरा करने का काम करेंगे जिससे नदियाँ अविरल मतलब बिना किसी रुकावट के प्राकृतिक रूप से बह सकें और उनके अंदर के जीव-जंतु व इकोसिस्टम से नदियाँ स्वयं निर्मल हो सकें।
राजधानी लखनऊ हो या स्मार्ट सिटी गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज जैसे बड़े अन्य शहर सब जगह हाल-बेहाल है। गंदगी से बीमारी फैलने का डर भी है। विशेष रूप से नदी के किनारे बसे व नदीय अर्थव्यवस्था पर आधारित लोगों का जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
ऐसा लगता है कि भाजपा सरकार की आँख का पानी भी बहकर जलराशि को बढ़ा रहा है।
भाजपा जाएगी, नदी जीवन पाएगी।
मुख्यनगरी में भाजपाई सांसद का ये विरोध-प्रदर्शन टाला भी जा सकता था, भ्रष्ट व्यवस्था की तस्वीरों को छपने से छुपाया भी जा सकता था लेकिन ज़बरदस्ती पानी में चलकर और बक़ायदा वीडियो बनाकर और उसे प्रसारित करके ये दर्शाया जा रहा है कि भाजपाई सासंद लखनवी चाल को आख़िरकार समझ ही गये हैं। अब भाजपा के अंदर ही ‘गोरखपुर बनाम गोरखपुर’ हो गया है।
सबसे बड़ा सच तो ये है कि जब पानी में डूब गया इनका अपना हाता, तब याद आया इनको कि किसी को ‘हाता नहीं भाता’।
#जलमग्न_गोरखपुर_उप्र
प्रिय समाजवदियों,
अब हमारे बीच वो महान समाजवादी प्रकाश-स्तंभ श्री राम गोविंद चौधरी जी नहीं रहे, जिन्होंने महान स्वतंत्रता सेनानी व समाजवादी मार्गदर्शक जय प्रकाश नारायण जी और भूतपूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी की अगुवाई में समाजवादी मूल्यों, सिद्धांतों और लक्ष्यों की मशाल सदैव प्रज्ज्वलित रखी।
बलिया की क्रांतिकारी धरती से उठकर छात्र राजनीति के कठिन मार्ग से होते हुए विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तक उनकी आवाज़ और अकाट्य तर्कों का सदैव सम्मान हुआ। सामाजिक न्याय के पुरोधा के रूप में वो जीवन भर संघर्षरत रहे। उन्होंने जनपक्ष को हमेशा सबसे पहले और ऊपर रखा। विपक्ष के नेता के रूप में उन्होंने तब भी अपनी आवाज़ बुलंद रखी जब सदन में हमारे 50 विधायक भी नहीं थे। जब वो बोलते थे तो सदन उन्हें बड़ी शांति और शिद्दत के साथ सुनता था और उनके खर-प्रखर वाचन और सत्यनिष्ठता से सीख-सबक भी लेता था। उनकी ज़मीनी पकड़ और जनता से गहरे जुड़ाव के कारण वो स्वयं में सौहार्दपूर्ण सकारात्मक सामाजिक राजनीति की एक सक्रिय पाठशाला की तरह रहे। उन्होंने सांविधानिक, लोकतांत्रिक, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा व स्वतंत्रता, समता और व्यक्ति की गरिमा व प्रतिष्ठा के लिए हमेशा निर्भय होकर आंदोलित रहना सिखाया।
एक सशक्त समाजवादी नेतृत्व के रूप में सपा में उनकी भूमिका सदैव एक दिग्दर्शक के रूप में रही। नेताजी और उनका साथ समाजवादी संकल्पों की पूर्ति के संघर्षों में सदैव एकजुट रहा।
अब हम सबकी ज़िम्मेदारी है कि अपने उन ‘बड़ों के लक्ष्यों’ की पूर्ति में संपूर्ण समर्पण और संकल्प के साथ एकजुट होकर आगे बढ़ें, जो अब हमारे बीच सैद्धांतिक प्रेरणा मात्र ही विद्यमान हैं।
पुनः पुन: भावभीनी श्रद्धांजलि!
आपका
अखिलेश