युवराज मेहता कांड में जाँच नोएडा के सीईओ को सौंपते। जब उनकी जाँच रिपोर्ट आ जाती तो दोषी को दंड देते। अगर सर्वोच्च अधिकारी को ही दंड देना था तो औद्योगिक विकास मंत्री को हटाते अथवा ख़ुद मुख्यमंत्री इस्तीफ़ा दे कर पद छोड़ देते।
इस बार चुनाव तो इतने गुप्त तरीक़े से हुए कि पता ही नहीं चला कि कब चुनाव होने हैं। बस 11 दिसंबर को PCI के मेल से एक सूचना मिली जिसमें बताया गया कि 13 दिसंबर को वोट पड़ने हैं। कौन लड़ रहा है, यह भी पता नहीं चला।
अब जो संस्था इतनी गई गुजरी हो चुकी हो उसके बनाए रखने का क्या औचित्य!
यह भी एक दिलचस्प कहानी है। सुप्रीम इंडिगो की तरफ़ से पत्रकार शंभूनाथ शुक्ल को मैसेज आता है कि आपकी उड़ान रद्द है। फिर भी एयरपोर्ट गए और उड़ान रद्द नहीं थी। तो यह मैसेज कैसे आया? AI से? मदुरई से दिल्ली की उड़ान में अधिकांश सीटें ख़ाली थीं क्योंकि मुमकिन है दूसरे यात्रियों के पास भी ऐसे मैसेज आए हों।
आंकड़ों के बाज़ीगर प्रशांत किशोर अपना सारा करतब चुनावी रण में गंवा बैठे। वे बस ब्लिंक करती सोशल मीडिया के हीरो बन कर रह गए। जिसका ठोस धरातल पर पांव नहीं होता।
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आज 12034 पकड़नी थी। मेरा आरक्षण E1 में 34 था। E1 की पोजिशनिंग लास्ट में थी। ट्रेन आई तो पता चला वह तो पहला है। उलटा भागा। ट्रेन चलने लगी तो C7 में चढ़ गया। C15 तक घिसटता रहा तब E1 पर पहुँचा।
@AshwiniVaishnaw@RailMinIndia
कल रात वोटर लिस्ट से अपना नाम हटवाने के प्रयास करता रहा पर लॉगिन के बाद उनकी साइट चलनी बंद हो जाती। यही नहीं कानपुर छोड़ने के बाद मैंने डीएम को लिखा था कि मेरा मतदाता पहचान पत्र रद्द कर दिया जाए। मगर 2022 के विधान सभा चुनाव तक वह चल रहा था। @ECISVEEP