This investigative report will make you numb!
I have exposed a very powerful ecosystem of Drug Mafia and Human Rights NGO gang
You will be shocked to see the connection of Propaganda website Altnews's founder with Drugs Mafia!
A real truth behind Manipur Crisis!
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@Bombaymoshai@RShivshankar It’s many. I m one of them. Another question is you maintain your standard, local or international I m least bothered, but hide your name, why cheat consumer, why deprive him right of choice?
If Ramu could speak, I bet he would give better advice on how to be ‘Life-Positive’ than every other self-proclaimed motivational speaker in the world. 👏🏽👏🏽👏🏽
भगवाधारी धर्मगुरु और मेडिकल साइंस
कल एक MBBS कर रहे युवक ने वृंदावन के प्रेमानंद जी महाराज की फोटो लगा कर यह लिखा कि जब अध्यात्म और रिलिजन असफल हो जाते हैं, विज्ञान तथा औषधियाँ ही काम आती हैं। बाबा प्रेमानंद जी अठारह वर्षों से दोनों ही किडनियों के निष्क्रिय होने के कारण सतत डायलिसिस कराते हैं। यह कोई छुपाई गई बात नहीं है।
वस्तुतः, इस युवक ने अपनी अनभिज्ञता या अज्ञानता में यह मान लिया कि जो भी 'बाबा' लोग हैं, उन्होंने विज्ञान को नकार दिया है क्योंकि वो सारी व्याधियों का उपचार 'नाम जप' से ले कर 'भजन कीर्तन' आदि बताते हैं। यह इस व्यक्ति के अपने विचार हैं जो संभवतः सिनेमा में धर्माचार्यों की ऐसी अभिव्यक्तियों के कारण हुआ है। उन्हें कपड़े देख कर ही ठग मान लिया जाता है।
इसके उपरांत, हमारी अपनी अज्ञानता और धार्मिकता से विलगन, ऐसे पूर्वग्रहों को स्थापित कर देता है। हमने न शास्त्रों को पढ़ा, न हमने कभी इन धर्माचार्यों की बातों को दस मिनट भी सुनने की चेष्टा की, बस अपना निर्णय सुना दिया कि ये तो ठग होते हैं, धंधा चलाते हैं। बिलकुल चलाते होंगे धंधा, हर एक बाबा पर खून चूसने वाले पचास डॉक्टरों की कहानियाँ हम भी बता सकते हैं। परंतु, अभी नहीं, कभी और सही।
अब प्रश्न है कि क्या बाबाओं ने मेडिकल साइंस की अवहेलना की है? कभी कहा है कि विज्ञान झूठ है और वही इसका उपचार करेंगे? मैंने तो ऐसा नहीं सुना है। आप जिसे मनोविज्ञान कहते हैं, वह किसी और के लिए भूत बाधा हो सकती, किसी के लिए ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति से उत्पन्न परिस्थिति! आप जिस व्याधि को पैरासिटामॉल से दबा सकते हैं, कोई सफेद गोलियों से दबा देगा, कोई जड़ी बूटी से, कोई किसी सिद्ध पुरुष के आशीर्वाद से।
हम अपने सीमित ज्ञान को ब्रह्मज्ञान सदृश समझ कर, बाकी हर विचार को सिरे से नकार देते हैं क्योंकि वह हमारे फ्रेम में फिट नहीं आता। हाल ही में, आयुर्वेद की पढ़ाई करने वाले डॉक्टरों पर एलोपैथी वालों ने बवाल खड़ा कर दिया था कि उन्हें सर्जरी कैसे करने दिया जा सकता है! ऐसा दो कारणों से हुआ। पहला तो इनकी लॉबी और गिरोह के वर्चस्व के कारण, दूसरा इस पूर्वग्रह के कारण कि आयुर्वेद मतलब एक बूढ़ा आदमी सिलवट पर किसी घास को पीस कर रस निकाल रहा है।
जबकि, यही एलोपैथी के डॉक्टर, इसी आयुर्वेद के पुरोधा, महर्षि सुश्रुत द्वारा आविष्कार किए गए सर्जरी की विधियों को, एनटॉमी के अध्ययन की तकनीकों को और दो सौ के करीब सर्जिकल उपकरणों को नकार नहीं पाएँगे क्योंकि यह उनकी प्रारंभिक शिक्षा का एक हिस्सा है। क्या सुश्रुत के समय में एलोपैथी थी? फिर पहली रायनोप्लास्टी उन्होंने कैसे कर दी?
विज्ञान या आधुनिक चिकित्सा विज्ञान इस विश्व के इकलौते समाधान नहीं हैं। एक ही व्याधि को पाँच विशेषज्ञ, पाँच अलग तरह से अप्रोच करते हैं, और पाँच अलग उपाय से सही करते हैं। आयुर्वेद, एलोपैथी, होमियोपैथी, यूनानी, नाड़ी विज्ञान, एक्यूपंचर आदि कई विधियाँ हैं। आप यह कहना चाह रहे हैं कि दिल्ली से पटना तो केवल हवाई जहाज से जा सकते हैं, कल तक कार से चलने वाला, आज हवाई जहाज के साथ सेल्फी क्यों ले रहा है!
जहाँ तक धर्म गुरुओं का प्रश्न है, उन्होंने विज्ञान को कभी नहीं नकारा है। आध्यात्मिक होना अवैज्ञानिक होना नहीं है। ऐसे धर्माचार्यों की प्रेरणा से, या उनके ही द्वारा, गणित, चिकित्सा शास्त्र, दर्शन, व्याकरण, ज्योतिष, मनोविज्ञान, भौतिकी, खगोल शास्त्र से ले कर हर उस विषय पर शोध ग्रंथ लिखे जा चुके हैं, जिन्हें आज तक हम समझने में सक्षम भी नहीं हुए हैं।
कोई कह रहा है कि आप तब के सुश्रुत को अब के बाबाओं से तुलना में नहीं रख सकते! ये भी विचित्र बात है। दोनों अलग हैं, तो तुलना कैसे होगी? बात तो यह है कि यदि वही सुश्रुत अपनी संहिता में महादेव और धन्वंतरि जी को धन्यवाद कर रहे होंगे तो ऐसे लोग पहले ही पन्ने के बाद उन्हें नकार देंगे। लगभग हर वैज्ञानिक ईश्वरीय सत्ता की उपस्थिति को अलग-अलग रूपों में स्वीकारता ही है।
विज्ञान देह को चीर कर, सूक्ष्मदर्शी से वही दिखता है जो वहाँ है। वह वहाँ क्यों है, वह विज्ञान नहीं बता पाता। कोशिकाएँ कैसी होती हैं, कैसे बनती हैं, मायटोकॉन्ड्रिया क्या है, अपेंडिक्स कहाँ होता है, क्या करता है, हम कैसे मर सकते हैं, मरने पर क्या होता है आदि प्रश्न के उत्तर विज्ञान दे देता है। परंतु, कोशिकाएँ होती ही क्यों हैं, कहाँ से आईं, क्यों आईं, हम जन्म क्यों लेते हैं, क्यों मरते हैं, वही देह जो चलायमान था, निस्तेज क्यों गिरा हुआ है, अपेन्डिक्स क्यों बनाया गया, हृदय उसी तरह से क्यों कार्य करता है आदि ऐसे प्रश्न है जिसके उत्तर नहीं मिलते।
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@Airtel_Presence I am trying to reach an executive at Airtel since 2 hours. After porting from your network you raise bills. But don’t provide any option/link to make payment. More worst, you don’t recognise your previous subscribers and allow him to reach you.