Former U.PMC State Social Media Coordinator..
Advocate, committed working professional passionate about wat I do.. Hate divisive politics..love equality
@abhisar_sharma सांसद महोदया अभिनेत्री भी हैं और सांसद बने तो अभी 5 साल भी नहीं हुए इसलिए भाषा की मर्यादा नहीं पता उनके रग रग मे multiple फिल्मो का कलाकार जादा है ।
मेरे शर्ट के नीचे फटी बनियान हैं आपके स्टूडियो में मै इज्जत ढक के आया हु - नीट टॉपर हर्ष दुबे
हमने परमिशन मांगी इस सरकार ने नहीं दिया
और आतंकियों को परमिशन एयरपोर्ट पर जाके पहुंचाया जाता है
इस देश में 90% बच्चे आत्म हत्या करते है वो सामान्य वर्ग के होते हैं NEET पेपर लीक में जो मरे हैं वो अधिकतर सामान्य वर्ग के है
कोई नहीं बात करना चाहता इसपर
मेरे साथ पढ़ने वाले जिनके बाप हॉस्पिटल हैं बड़ी बड़ी नौकरी थी उनका सिलेक्शन आधे आधे नंबर पर हुआ
आरक्षण केवल जाति आधारित नहीं राज्य अनुसार भी है इस लेवल तक आरक्षण को सिस्टम में घुसा दिया गया है
560 में यूपी बिहार के बच्चों का सिलेक्शन नहीं होगा
लेकिन 530-540 में अलग राज्य के बच्चों का सिलेक्शन हो जाएगा
अब बताओ सवर्णों तुम्हारे अंदर शर्म की पानी है कि नहीं कब हम बोलेंगे ?
राजनीति के धुरंधर राहुल 🔥
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राहुल गांधी आज भारत की राजनीति के धुरंधर हैं।
संसद से सड़क तक,
वह विरोधियों को लगातार धूल चटा रहे हैं।
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लेकिन कोई नेता एक दिन में धुरंधर नहीं बनता।
राहुल की कहानी उस युवा की है
जिसने अपनी दादी का गोलियों से छलनी शरीर देखा,
और अपने पिता का तो शरीर तक नहीं देख पाया।
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अपनी माँ से कहा —
“देशसेवा के लिए राजनीति ज़रूरी नहीं।
मेरी दादी और पिता देश के लिए मर गए,
मैं देश के लिए जियूँगा।”
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फिर भी वह राजनीति में आया।
लगातार पाँच चुनाव जीते।
फिर भी उसे “शहज़ादा” कहा गया।
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2009 में पार्टी को शानदार जीत दिलाई,
लेकिन प्रधानमंत्री बनने से मना कर दिया।
यहीं से एक शातिर व्यापारी और उसकी गैंग ने मौका पकड़ लिया।
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हज़ारों करोड़ खर्च कर बदनाम किया गया।
मीडिया और मिडिल क्लास ने उसे “राहुल बाबा” बना दिया।
2019 का चुनाव इसी नैरेटिव की कीमत पर हार गया।
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फिर आया कोरोना।
फिर किसान आंदोलन।
जो हार गया समझा गया था, वही फिर खड़ा हुआ।
काले कानूनों का खतरा बताया, उपाय सुझाए।
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धीरे-धीरे उसकी कही हर बात सच साबित हुई।
नोटबंदी पर सही।
कोरोना पर सही।
किसान क़ानूनों पर सही।
जातीय जनगणना पर सही।
आज ट्रेड डील पर सही।
और चीन पर भी सही निकलेगा।
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आज वही राहुल
मज़दूरों, गरीबों, दलितों, अल्पसंख्यकों,युवाओ और किसानों की आवाज़ बन चुका है।
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राजनीति का यह धुरंधर
दुश्मनों की हर चाल से एक कदम आगे है।
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अभी रुकिए…
धुरंधर की दूसरी पारी अभी बाकी है। 🔥
#घोरकलजुग #RahulGandhi #Dhurandhar
राहुल गांधी: “प्रधानमंत्री….”
ओम बिरला: NOOOOO 😖
राहुल गांधी: “प्रधानमंत्री….”
ओम बिरला: NOOOOO 😖
राहुल गांधी: “एक काम कीजिए, आप ही मेरा भाषण लिख दीजिए, मैं पढ़ लूंगा 😂”
राहुल गाँधी का कमाल का सेट-अप है ये वीडियो इंस्टाग्राम पर 2.5 करोड़+ व्यूज़ के साथ वायरल 🔥
स्मिता प्रकाश इस सवाल का जवाब कुछ और ही एक्सपेक्ट कर रहीं थीं😃😂
स्मिता प्रकाश: कौन सा प्रधानमंत्री जातिगत भेदभाव से मुक्त था?
विकास दिव्यकीर्ति: जवाहरलाल नेहरू
सत्य की जीत हुई है
मोदी सरकार की बदनीयत और गैरकानूनी तरीके से की गई कार्रवाई पूरी तरह से बेनकाब हो गई है.
माननीय अदालत ने यंग इंडियन मामले में कांग्रेस नेतृत्व - श्रीमती सोनिया गांधी जी और श्री राहुल गांधी जी के खिलाफ ED की कार्रवाई को अवैध और दुर्भावना से ग्रसित पाया है.
अदालत ने फैसला दिया है कि ED का मामला क्षेत्राधिकार से बाहर है, उसके पास कोई FIR नहीं है जिसके बिना कोई मामला ही नहीं बनता.
मोदी सरकार द्वारा पिछले एक दशक से मुख्य विपक्षी दल के ख़िलाफ़, राजनैतिक प्रतिशोध और बदले की भावना से की जा रही यह कार्रवाई आज पूरे देश के सामने बेनकाब हो गई है.
मनी लॉन्ड्रिंग का कोई मामला नहीं, अपराध की कोई आय नहीं और संपत्ति का कोई हस्तांतरण नहीं - यह सभी निराधार आरोप जो निम्नस्तरीय राजनीति, द्वेष की भावना और सम्मान पर हमला करने की भावना से प्रेरित हैं - आज सब धराशायी हो गए.
कांग्रेस पार्टी और हमारा नेतृत्व सत्य के लिए और हर भारतीय के अधिकारों के लिए लड़ने के लिए प्रतिबद्ध है - हम कोई भी डरा नहीं सकता - क्योंकि हम सत्य के लिए लड़ते हैं.
सत्यमेव जयते 🇮🇳🇮🇳
उन मनुवादियों का नाम था— “अभय यादव, शिवम यादव, राहुल यादव और मुकेश यादव”
अभी तक इनका झूठ के नफरत का अच्छा प्रोपोगेंडा चल रहा रहा। फिर इन्होंने मेरी पोस्ट पर कमेंट कर दिया। अब पूरा देश ये सच्चाई जान जाएगा।
@Vishal_aawaj citizens place in public officials. It
is essential that our institutions remain spaces of integrity, fairness, and respect for all.
Let's stand united against this mindset
@Vishal_aawaj It is deeply unfortunate and unacceptable that a person entrusted with the responsibilities of a civil servant has made derogatory and divisive remarks targeting Brahmin girls. Such statements not only betray the values of dignity and equality but also erode the trust that..
राहुल कितनी गलतफहमी है,
मुझे इस बात पर हैरत है ।
उन्हें लगा कि वह चोरी के खुलासे करेंगे और लोग इसपर अचरज करेंगे । वह फ़र्ज़ी वोटिंग,वोट कटिंग के सबूत देंगे, तो लोगों की आंख खुलेगी ।
वह सबूत रखेंगे,तो मीडिया में बेचैनी आएगी । राहुल भूल रहे कि वह यह सब कहाँ कर रहे हैं और किनके बीच?
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राहुल के जिन लोगों पर आरोप हैं, जिनके संगठित अपराध पर वह खुलासे कर रहे हैं । जिनकी हेराफेरी के वह सबूत दे रहे हैं । उनके ही फॉलोवर खुद जानते हैं कि यह लोग कोई शरीफ लोग नही हैं । वह इनकी हर कार गुज़ारियों को जानते हैं ।
वह रँगा बिल्ला को बहुत अच्छे से समझते हैं और इसी लिए उनके पीछे खड़े हैं । वह इनकी करतूतों को और गिरने के स्तर को हम आपसे अधिक जानते हैं । वह जानते हैं यह सब उनके बाएं हाथ के खेल हैं । राहुल के पक्ष के लोगों को भले शक हो मगर रँगा बिल्ला के पक्ष के लोग अच्छी तरह इनके हाथ की सफाई को जानते हैं।
राहुल तो मांडवा के मास्टर दीनानाथ की तरह खड़े हैं मगर वह भीड़,जिन्हें जगा रहे हैं । वह सोई हुई है ।
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अरे भीड़ छोड़िए, वह पत्रकार, जो कम से कम थोड़े तो अनबायस कहलाएंगे,वह राहुल के खुलासों पर नही बोल रहे थे, बल्कि उनके इंग्लिश में बोलने पर सवाल कर रहे थे । यार तुम्हे तो समझ आ रहा है कि राहुल कितने गम्भीर विषय को उठा रहे हैं,तुम ही हिंदी या अंग्रेज़ी न करो,तुम सब्जेक्ट पर बात करो ।
ब्राज़ीलियन मॉडल हमारे यहां की वोटरलिस्ट में है। उसकी पहचान पर वोट पड़े हैं मगर सीसीटीवी फुटेज मिलेगी नही, क्योंकि चुनाव आयोग नियम बदल चुका है । आपको मामले की गम्भीरता का ज़रा भी अंदाज़ा है कि आपने क्या गवाया है और क्या गवाने जा रहे हैं ।
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आपको पता है कि डेमोक्रेसी किसे कहते हैं । जिसमें जनता अपनी हुक़ूमत खुद चुने,कौन सी जनता?????????
घर में लेटी जनता नही,खेत में काम करती जनता नही । फैक्ट्री या कम्पनी में सर खपाती जनता नही । बिज़नेस या फिर कॉल सेंटर में जूझी हुई जनता नही । जानते हैं वह जनता कौन होती है, जो डेमोक्रेसी को गढ़ती है ।
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वह जनता होती है "वोटरलिस्ट" में जिनका नाम हो । जो वोट कर सके ।
यानि सारा लोकतंत्र ही इस वोटरलिस्ट पर टिका है और वही सन्दिग्ध हो रही है । आपको यह अधिकार मिला था,जिसे चाहो उसे चुनो । यह अधिकार अगर दीमक चाट गईं, तो फिर सरों की गिनती में तो रहेंगे मगर कोई अधिकार नही रखेंगे ।
राहुल ने बड़ी मेहनत से अपने रिसोर्सेज इस्तेमाल करके,अपने लोगों को लगाकर,यह खुलासे किए हैं । इसकी गम्भीरता को समझिये । चुनाव आयोग हो या कोई भी संस्था,उसे पहले इसकी जांच करनी चाहिए । यह तमाशा नही है, या तो जांच करके राहुल को ग़लत साबित कीजिये या फिर जगह छोड़िए ।
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आज जो राहुल को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं । वह अपने भविष्य को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं । जो इसपर गम्भीर नही हैं, वह अपने ही लिए गम्भीर नही हैं । जिन्हें राहुल पर हंसी आ रही है, वास्तव में वह अपने ही ऊपर हंस रहे हैं ।
देश बनने के बाद पहला नेता प्रतिपक्ष ऐसा मिला है, जो डेमोक्रेसी और इंसानों की बराबरी को लेकर इतना सजग है । वह देश का पहला नेता प्रतिपक्ष है, जो रोज़ जनता को जगा रहा है । जो भयँकर दमन सहकर भी जूझ रहा है । उसे नज़रअंदाज़ करके आप अपना ही नुकसान कर रहे हैं ।
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राहुल की बात उन युवाओं तक ज़रूर सीधे चली गई है, जो नए हैं । जो कट्टर और कुंठित नही हैं । वह इंग्लिश हिंदी में नही फंसते,बल्कि सच्ची बात पर गौर करते हैं ।
वह पढ़े लिखे हैं, पढ़े लिखे इंसान की बात की गम्भीरता समझते हैं । हमें इत्मीनान है कि कम से कम युवाओं में राहुल का संदेश सीधा जाकर असर कर रहा है ।
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अधेड़ों,अधपके बालों वाले कथित युवाओं और थोड़े उम्र दराज़ लोगों को समझना होगा, गम्भीर होना होगा ।
अगर आपके हाथ से वोट देने की ताक़त या वोट की ताक़त का असर खत्म हो गया,तो कीड़े मकोड़े ही बनकर रह जाइयेगा, कोई भी नही सुनेगा,जो सुनवाई है, वह वोट की ताक़त की वजह से है ।
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राहुल की बात को हवा में मत उड़ाइये, वरना बहुत पछतावा होगा । यह बात सबके लिए है । राहुल पर बात कीजिये, उनके खुलासों पर बहस कीजिये, सवाल कीजिये,जवाब दीजिये मगर नज़रअंदाज़ मत कीजिये ।
सजग रहिये..
बीमारी डायग्नोस हो गई है और जनता ईलाज भी खोज लेगी क्योंकि सबसे ऊपर जनता ही है । वो जो भी रास्ता तय करे,
वह ही सबका रास्ता होगा ।
🙏
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(हफीज किदवई ने फेसबुक पर लिखा)
यादव बोले — तो समाजवाद 🗣️
दलित बोले — तो सामाजिक न्याय ✊
जमींदार बोले — तो किसान एकता 🚜
मीणा बोले — तो प्रकृतिवाद 🌿
पर जब कोई गरीब सवर्ण अपने अधिकार की बात करे, तो अचानक समाज की भाषा बदल जाती है ⛔
➡️ राजपूत बोले — सामंतवाद कह दिया जाता है
➡️ ब्राह्मण बोले — मनुवाद ठहरा दिया जाता है
➡️ बनिया बोले — पूंजीवाद बता दिया जाता है
फिर सवाल ये है —
क्या “हक़” सिर्फ़ कुछ वर्गों की जागीर है?
या सबको एक ही नज़र से देखना अब “अपराध” बन गया है? 🤔
जातिगत जनगणना - बीजेपी
NEET में आरक्षण लागू - बीजेपी
एससी/एसटी एक्ट संशोधन - बीजेपी
म.प्र. में 73% आरक्षण प्रस्ताव - बीजेपी
बिहार में 85% आरक्षण पर विचार विमर्श - बीजेपी
भाजपा वाले तो कांग्रेस से भी बेवफा निकल गए ..!
#जनरल_विरोधी_भाजपा
राहुल गांधी ने सवाल किया कि आप किसी से नफरत करती हो❓
तो एक लड़की ने जवाब दिया कि हां नीतीश कुमार से
इस जवाब पर कोई और नेता होता तो वो खुश हो जाता है लेकिन राहुल गांधी ने समझाया कि
"किसी से गुस्सा हो सकता है इरिटेशन हो सकती है लेकिन नफरत मत करो ये नफरत आपको अंधा कर देती है।" ये काम एक काबिल लीडर ही कर सकता है।
(वैसे लड़की का नीतीश कुमार के लिए गुस्सा जायज था)
राहुल गांधी होना आसान नहीं
▪️आज आरा में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ में BJP के चार लड़के काली क़मीज़ पहनकर राहुल गांधी को काले झंडे दिखाने आए
▪️राहुल जी ने जीप रुकवाई और उन लड़कों को अपने पास बुलाया. सब भाग खड़े हुए सिर्फ़ एक पकड़ा गया तो राहुल जी ने उसे जीप पर चढ़ा कर प्यार से पूछा
"भाई, गुस्सा किस बात का है?"
▪️लड़के की हालत टाइट, किसी तरह से बोला “PM की मां को गाली दी है”
▪️राहुल जी ने फिर उसी शांत भाव से पूछा
“क्या मैंने गाली दी? क्या मेरी मौजूदगी में दी? क्या मेरे किसी नेता ने दी?”
▪️लड़का निरुत्तर
▪️इसके बाद राहुल जी ने उसे पानी पिलाया, और फिर टॉफी दी
▪️जब वह लड़के जाने लगे तो उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा “इन बच्चों के साथ कोई मारपीट या बदसलूकी नहीं करेगा”
यह फर्क है गांधी और गोडसे में
यह फर्क है मोहब्बत और नफ़रत में
यह फ़र्क़ है अहिंसा और हिंसा में
यह फ़र्क़ है सत्य और असत्य में
यह फ़र्क़ है कांग्रेस और BJP में
👉👉यह है राहुल गांधी होने के मायने - इसीलिए राहुल गांधी होना आसान नहीं है
@RahulGandhi
चित्रा त्रिपाठी - सावरकर की तरह माफिनामे तो नेहरू के भी थे.
अशोक पाण्डेय - नेहरू ने ज़िन्दगी में कोई माफीनामा अंग्रेजो को नहीं लिखा
चित्रा -नाभा रियासत में उनके माफ़ीनामे का जिक्र है. फैक्ट्स है
अशोक पाण्डेय - आप मुझे वो माफीनामा दिखा दीजिये.
उसके बाद फिर सच्चाई बताते हैँ अशोक.
गोदी मीडिया paw paw को डिफेंड करने के लिए कितनी बेइज्जती कराती है.
@Vishal_aawaj सिर्फ योगी मोदी सरकार मे ही नहीं विपक्ष भी जो अन्य जातियों के लिये रोना रोता है वो भी ब्राह्मण के मुद्दे पर मुंह मे दही जमा लेता है, आँख पर पट्टी बांध लेता है ।
मेरी तरफ़ से ये रंगीन चूड़ियां -
यूपी विधानसभा में बैठे 52 ब्राह्मण विधायकों के लिए है।
एक गरीब ब्राह्मण सुदामा मिश्रा के गिरेबान पर हाथ डाल के भीम आर्मी के गु'ण्डो द्वारा घसीट कर अपमानित जा रहा है !
क्या योगी राज में कानून का इकबाल खत्म हो गया है ?
अगर प्रतिक्रिया में भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं के साथ यही व्यवहार होता तो अब तक एससी/एसटी एक्ट लग जाता !
उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों के उत्पीड़न मामले के मामले लगातार बढ़ते जा रहे है लेकिन सारे ब्राह्मण नेता मौन है ?
बाकी प्रदेश का ब्राह्मण समाज हिंदू जगाने में ही मस्त है !