To stay upbeat and save yourself from a breakdown, you need to strike a balance between striving for perfection and accepting imperfection in yourself and the world around you.
Terrorists will never succeed in their agenda. Their heinous acts have put them on the path of self-destruction. They will be brought to justice — in this world and the next. The entire humanity stands in solidarity with those who have lost their near and dear ones.
#Pahalgam
आतंकवादी अपने अधार्मिक संकल्पों में कभी सफल नहीं हो सकते। उनके हिंसक कर्म उन्हें पूर्ण विनाश की ओर ले जा रहे हैं। वे अपने दुष्कर्मों का दंड इस लोक में भी पाएंगे और परलोक में भी। इस दुखद घड़ी में जिन परिवारों ने अपनों को खोया है, हम सब उनके साथ हैं |
#पहलगाम#Pahalgam
Spiritual practice is not just about removing yourself from society, but reenergizing you to give back. Once you refuel at the gas station, you don’t stay there—you drive ahead.
Have one goal for yourself and another one for the world. What kind of society would you like to leave behind? When we think along these lines, the world becomes a better place.
@Gurudev@ArtofLiving Gurudev, your wisdom is so very practical for every strata of the society. Your mission of all be happy and contened and next be useful for others is becoming huge now.
Vedic chants and the symphony of 4,000 conches reverberated through the National Stadium as thousands dived into deep meditation during the Rudra Homa in New Delhi.
Visited the archaeological site of the Mayan civilization in Chichén Itzá. So much similarity with the Vedic culture. Also had an evening of wisdom and meditation in Cancún, México.
एक तीर्थयात्री ने एक इस्लामी विद्वान से मिला और उनसे एक प्रश्न पूछा।"
तीर्थयात्री... स्वर्ग कौन जा रहा है?
हिंदू या ईसाई?
उन्होंने गुस्से में जवाब दिया कि सिर्फ मुसलमान.
अच्छा... कौन सा मुसलमान? शिया या सुन्नी?
निश्चित रूप से "सु*ननि"।
खैर, सुन्नी के भी दो संप्रदाय हैं, है ना? "मुक़ल्लिद" और ग़ैर-मुक़ल्लिद?
केवल "मुगलवादी" लोग हैं दोस्त।
तीर्थयात्रियों ने आगे पूछा...
मुझे एक और संदेह है.
क्या मुग़ल साहित्य में भी चार श्रेणियाँ नहीं हैं? जन्नत किन लोगों को मिलेगी?
इसमें केवल "हनाबी" ड्राइवर हैं।
हाजिर को गुस्सा आने लगा.
इस हनाबी के भी दो विभाग हैं,
उन्हें "देवबंदी" और "बरेलवी" कहा जाता है तो स्वर्ग कौन जाएगा?
मैं हूँ। इसमें "देवबंदी" कारें हैं।
हजियार ने दबे गुस्से से जवाब दिया.
तीर्थयात्री...
मैं नहीं समझता।
'देवबंदी' में भी दो खंड हैं,
हयाती और ममती
(हयाती और ममती)। जन्नत किन लोगों को मिलेगी?
"थ... पू... ते... माई... जैसे शब्द हजियार के मुँह से रंगीन ढंग से निकले",
वह बिना पीछे मुड़े चला गया. और मूड कर भी नही देखा।
जो व्यक्ति नफरत फैलाते हैं, देशद्रोह करते हैं, और हिंदुओं के जातिगत संदर्भ देकर धर्मांतरण को बढ़ावा देते हैं;
वे अपने समाज के भीतर जातिगत विभाजन को देखने से इनकार करते हैं।
नित्य निरन्तर भगवान् के स्मरण से भगवान् सहजतासे उपलब्ध हैं। योग्य #गुरुदेव मिल गये तो जीवन सफल हो गया।पहली बात तो यह है कि शरीर का भरोसा नहीं, यदि भगवान् के भजन-ध्यान-स्मरण के बिना शरीर छूट गया तो पता नहीं कहाँ तक पतन हो सकता है।
While bombs are being made to destroy life, 5000 @ArtofLiving volunteers created 2.5 lakh bombs (seed balls 😊) with a difference: to grow more plants, more life, setting a world record!
#गुरुदेव जिनसे अपनापन करते हैं, उनको मजबूत बनाने, उनको शुद्ध बनाने के लिये वे प्रतिकूल परिस्थिति भेजते हैं, जिससे वे सदा-सर्वदा सुखी हो जायँ - उनका उधार हो जाय, उनका कल्याण हो जाय। 😊😇
There is a uniqueness in each one of us, yet at the same time, we have an underlying unified energy. Get into the space of unity and play in the space of diversity.
Wisdom and meditation at the ICC Sydney Theatre.
एक तो मुझे ये गाँधी परिवार की क़ुरबानी वाली अवधारणा समझ नहीं आती।
कोई भी चुनाव हो... इनके चशमो चिराग तो यही गाते हैं कि हमारी दादी ने देश के लिए क़ुरबानी दी, हमारे पापा ने देश के लिए क़ुरबानी दी।
अरे भैया कौन सी क़ुरबानी... कौन सा बलिदान??
पंजाब में सब सही चल रहा था... अकाली दल को रोकने के लिए इंदिरा गाँधी एक विकल्प ढूंढ रही थी... फिर उन्हें भिंडरावाले मिला... उसको दिल्ली बुला कर बकायादा संजय गाँधी ने साक्षात्कार ले कर अपने काम के लिए तैयार किया।
फिर इनका प्यादा भिंडरावाले महत्वकांक्षी हो गया... ऊपर से पाकिस्तान ने भी उसके सर पर हाथ रख दिया... उसे ख़ालिस्तान का सपना दिखाया और फिर वह कांग्रेस के हाथों से निकल गया।
फिर उसे मरवाने के लिए स्वर्ण मंदिर पर चढ़ाई कर दी... सैंकड़ो सिख मारे गए... बाद में इस घटना का बदला लेने के लिए 2 सिख अंगरक्षकों ने इंदिरा गाँधी को मार दिया।
यह कोई क़ुरबानी या बलिदान नहीं था... खुद के कुकर्मो का फल था... जिन कुकर्मो के कारण 70-80 के दशक में हजारों हिन्दू मारे गए पंजाब में... और फिर 84 के दंगों के बाद हजारों सिख मारे गए... पंजाब आतंकवाद की आग में 2 दशक झुलसा रहा... जिसमें हजारों लोग मारे गए।
अपने कुकर्मो के कारण हत्या हो जाना देश के लिए क़ुरबानी नहीं होती।
रही बात राजीव गाँधी की... तो वह अपने और अपनी माँ द्वारा किये गए दुर्घटना के शिकार हुए।
वैसे तो श्रीलंका में आजादी के बाद से ही तमिल और स्थानीय आबादी सिंहली लोगों के बीच द्वन्द शुरू हो गया था... 70 के दशक में यह और भी उग्र हो गया... और फिर प्रभाकरण ने LTTE बनाया।
शीत युद्ध का जमाना था... भारत जहाँ सोवियत के खेमे में था... श्रीलंका अमेरिका के करीब था... ऐसे में इंदिरा गाँधी को लगा कि वह तमिल और सिंहली लोगों के इस मुद्दे को सुलझा कर इस क्षेत्र में बढ़त हासिल कर सकती हैं।
इसीलिए उन्होंने श्रीलंका सरकार और LTTE के बीच मध्यस्थता की... और भूटान की राजधानी में दोनों पक्ष के बीच बातचीत शुरू करवाई।
अब यहाँ इंदिरा गाँधी खेल कर गई... तमिलनाडु की कुछ पार्टियों को खुश करने और खुद की महत्वकांक्षा को पूरा करने के लिए उन्होंने LTTE के लड़ाकों को प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया था।
आपको जानकार आश्चर्य हो सकता है कि तमिलनाडु में LTTE के ढेरों प्रशिक्षण शिविर थे... जिसमें सबसे बड़ा था कोलाथुर का शिविर... इसके अतिरिक्त कर्नाटक, उत्तरप्रदेश (नैनीताल... तब नैनीताल UP में ही था) में भी प्रशिक्षण शिविर थे। प्रभाकरण बाकायदा RAW के अफसरों के साथ घूमता था... मैंने कहीं पढ़ा था कि वह महू के आर्मी प्रशिक्षण केंद्र भी गया था।
यह 80 के दशक के शुरुआत की बात है... LTTE दिन प्रतिदिन घातक होता चला गया... क्यूंकि उन्हें आर्मी स्तर का प्रशिक्षण और हथियार दिए जा रहे थे।
इंदिरा गाँधी की हत्या हुई... और उसके बाद खेल बिगड़ने लगा... राजीव गाँधी ने श्रीलंका सरकार और LTTE के बीच बात करवाई... लेकिन बात बनी नहीं। LTTE को लगने लगा था कि राजीव गाँधी उनके साथ खेल कर रहे हैं।
और जल्दी ही वह समय भी आया... जब इंदिरा गाँधी द्वारा पोषित LTTE का प्रभाकरण उनके बेटे का सबसे बड़ा दुश्मन बन गया था।
राजीव गाँधी ने पीस कीपिंग फ़ोर्स भेज दी... बिना किसी तैयारी के... कश्मीर के पहाड़ो पर तैनात यूनिट को रातो रात श्रीलंका के जंगलो में तैनात किया गया... हमारे 1165 सैनिक मारे गए थे इस पूरी प्रक्रिया में।
और इसके बाद तो LTTE और भारतीय सरकार के रिश्ते बेहद ख़राब हो गए थे... जिसका परिणीति राजीव गाँधी की हत्या में हुई।
बताइये... क्या यह देश के लिए क़ुरबानी थी? या अपने कुकर्मो का फल??
"राष्ट्रहित सर्वोपरि" 💪💪
जय श्री राम 🙏
हर हर महादेव 🔱🙏🚩